नाथ साहित्य की प्रवृत्तियां(Nath Sahitya ki pravartiya) 1. हठयोग की साधना (काया साधना )पर बल । 2. साधनात्मक स्तर पर शून्यवाद की प्रतिष्ठा। 3. दर्शन के क्षेत्र में शैवमत का प्रतिपादन ।(साधनात्मक रहस्यवाद ) 4. प्रवृत्तिमूलक मार्ग के स्थान पर निवृत्ति मूलक मार्ग अपनाने पर बल। 5. वर्णाश्रम व्यवस्था पर तीखा प्रहार । 6. नारी को साधना के क्षेत्र से ...
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सिद्ध साहित्य की प्रवृतियां (sidh sahitya ki pravartiya)
सिद्ध साहित्य की प्रवृतियां (sidh sahitya ki pravartiya) 1. योग के क्षेत्र में काया साधना की विभिन्न भूमिकाओं का निरूपण 2. ज्ञान की उपेक्षा 3. शून्यवाद की प्रतिष्ठा 4. तांत्रिक साधना के रूप में मद्य -मैथुन का सेवन (वाममार्गी साधना पद्धति) 5. वर्णाश्रम व्यवस्था रूढियों एवं बाह्याडंबरो का खण्डन 6. शांत एवं श्रृंगार रस की प्रधानता 7. अंतर्मुखी साधना पर ...
Read More »आदिकाल की प्रवृत्तियां (Aadikal ki Pravartiya)
आदिकाल की प्रवृत्तियां (Aadikal ki Pravartiya) 1. ऐतिहासिकता का अभाव 2. युद्ध वर्णन में सजीवता 3. प्रमाणिकता में संदेह 4. वीर और संघर्ष का समन्वय (हम्मीर रासो और खुमान रासो में वीर रस के साथ संघर्ष के व्यक्ति हुई है। ) 5. आश्रयदाताओं की प्रशंसा 6. संकुचित राष्ट्रीयता 7. कल्पना की प्रचुरता 8. डिंगल – पिंगल भाषा का प्रयोग 9. ...
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