Author Archives: Puran Mal Kumhar

साहित्‍य अकादमी(sahit‍ya akadami) पुरस्कारों की शार्ट ट्रिक

[ ] साहित्‍य अकादमी में सम्बन्ध में जानकारी :- • भारत में साहित्‍य की राष्‍ट्रीय संस्‍था की स्‍थापना का प्रस्‍ताव विचाराधीन था। • भारत सरकार ने रॉयल एशियाटिक सोसायटी ऑफ़ बंगाल का साहित्‍य की राष्‍ट्रीय संस्‍था की स्‍थापना का प्रस्‍ताव 1944 में। • साहित्‍य अकादमी नामक राष्‍ट्रीय साहित्यिक संस्‍था की स्‍थापना का निर्णय लिया :- 15 दिसंबर 1952 के प्रस्ताव ...

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रीतिकाल का नामकरण(ritikal ka namakaran)

“रीतिकाल” का नामकरण साहित्य की विभिन्न कालों और उनके लेखकों के अनुसार किया जा सकता है। यह काल संस्कृत और हिंदी साहित्य में साहित्यिक उत्थान, विविधता, और अद्वितीयता की दिशा में उच्चारित होता है। क्रम संख्या नामकरण Short trick कवि 1. अलंकृत काल अलमी मिश्रबन्धु 2. कलाकाल कला रमाशंकर की डॉ. रमाशंकर शुक्ल‘रसाल’ 3. श्रृंगार काल श्रृंगार विश्व के हजार ...

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आदिकाल का नामकरण(aadikal ka namakaran)

“आदिकाल” एक साहित्यिक और ऐतिहासिक अवधारणा है, जिसे भारतीय साहित्य के प्रारंभिक युग के लिए प्रयोग किया जाता है। क्रम संख्या  आदिकाल का नामकरण शॉर्टट्रिक कवि 1. चारणकाल चारण जा जार्ज ग्रियर्सन 2. आरम्भिक काल आरम्भ मिश्र मिश्रबन्धु 3. वीरगाथा काल वीर राम आचार्य रामचन्द्र शुक्ल 4. सन्धि चारण काल सच्चा राम डॉ. रामकुमार वर्मा 5. आदिकाल आदि हजार आचार्य ...

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हिंदी साहित्य के प्रमुख गुरु और शिष्य(hindi sahity ke pramukh guru aur shishy)

हिंदी साहित्य में गुरु और शिष्य के संबंध बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं, जिन्होंने साहित्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। यहां कुछ प्रमुख गुरु-शिष्य संबंधों का उल्लेख किया जा रहा है: क्र.स शिष्य गुरु 1.         गोरखनाथ मत्स्येन्द्रनाथ 2.         डोम्बिपा विरूपा 3.         कुक्कुरिपा चर्पटीया 4.         कण्हपा जालंधरपा 5.         चर्पटनाथ गोरखनाथ 6.         रामानुज यमुनाचार्य 7.       ...

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संदेश रासक(sandesh rasak) का परिचय

• रचयिता :- अब्दुल रहमान/अद्दहमाण • अब्दुल रहमान का परिचय :- ◆ मीरसेन आरद्द का पुत्र ◆ स्थान :- मिच्छदेस (म्लेच्छ)[पश्चिमी पाकिस्तान] ◆ मुल्तान निवासी( नाथूराम प्रेमी के अनुसार) ◆ जाति :- जुलाहा ◆ समय :- 11वीं शताब्दी का कवि (राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार) ◆ 12वीं सदी के प्रथम मुस्लिम लेखक जो हिन्दी लिखता है । ◆ भारतीय भाषा मे ...

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अमीर खुसरो(ameer khusaro) का जीवन परिचय

• जन्म 1255ई. मृत्यु – 1324ई. • जन्म स्थान – एट जिला पटयाली गाँव(उत्तरप्रदेश) • अमीर खुसरो के पूर्वज तुर्की थे और बलखट देश से भारत आए थे। • 13वीं शताब्दी में जब दिल्ली पर गुलाम वंश का शासन था तब अमीर खुसरो के पिता बलख हजारा (बैक्ट्रिया) से भागकर भारत आ गए तथा एटा जिला के पटियाली नामक ग्राम ...

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रचनाओं संबंध में आलोचकों के विचार

क्रम संख्या रचना कहा जाता है 1.         कामायानी (1935,जयशंकर प्रसाद) मानवता का रसात्मक इतिहास (आचार्य नंददुलारे वाजपेयी) मानव चेतना के विकास का महाकाव्य (डॉ. नगेंद्र) छायावाद का उपनिषद् (शांतिप्रिय द्विवेदी) मानवता का रसात्मक महाकाव्य (आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा) नए युग का प्रतिनिधि काव्य  (नंददुलारे वाजपेयी)  आधुनिक सभ्यता का प्रतिनिधि काव्य (नामवर सिंह ने कहा) रहस्यवाद का पहला महाकाव्य ...

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 ढोला मारु रा दूहा (dhola maru ra dooha)

“ढोला मारु रा दूहा” एक प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत है। यह गीत राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है और इसे राजस्थान की धरोहर माना जाता है। इस गीत में “ढोला” का अर्थ होता है “ढोलक” जो एक परंपरागत राजस्थानी ढोलक है जो लोक गीतों के साथ बजाया जाता है। “मारु रा दूहा” में “मारु” राजस्थान के मारवाड़ी क्षेत्र का ...

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नाथ साहित्य या नाथ संप्रदाय(nath sahity ya nath sampraday)

• नाथ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में मिलता है। • अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में नाथ का अर्थ शरणदाता है। • नाथ शब्द का अर्थ(आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के द्वारा ) ‘ना’का अर्थ -अनादि रूप ‘थ’का अर्थ– स्थापित होना • नाथ पंथ के चरमोत्कर्ष का समय – 12वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी के अंत तक ( ...

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जैन साहित्य(jain sahity)

• कर्मकाण्डो से परे ,जाति वर्ण भेद से परे सबको मुक्ति का अधिकार प्राप्त करने का सन्देश जैन धर्म देता है। उत्तर भारत मे जैन धर्म के अनुयायी सर्वत्र ही है किन्तु 8वीं से 13वीं शती तक गुजरात मे जैन धर्म का व्यापक प्रभाव था। • जैन सबसे ज्यादा :– गुजरात और राजस्थान में • इनकी रचना की भाषा :- ...

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भविस्सयत्त कहा( कथा) का परिचय(bhavissayatt kaha( katha) ka parichay)

• भविस्सयत कथा अपभ्रंश के कथाओं में प्रसिद्ध ग्रंथ है । • रचयिता – धनपाल • धनपाल का परिचय :- ◆ धक्कड नामक वैश्य वंश में जन्म । ◆ पिता का नाम – माएसर (मातेश्वर) ◆ माता का नाम – धनश्री ◆ धनपाल को सरस्वती का वर प्राप्त हुआ। ◆ यह जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के अनुयायी थे। • ...

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स्वयंभू का जीवन परिचय(svayambhoo ka jeevan parichay)

• अपभ्रंश का वाल्मीकि • समय :- 8वीं शताब्दी • उत्तर के रहने वाले थे बाद में संरक्षण के साथ राष्ट्रकूट राज्यों में चले गए । • पिता का नाम :- मारुति देव • स्वयंभू के दो पत्नियां थी। • स्वयंभू के आश्रयदाता :- धनंजय और धवलाइया • प्रमुख ग्रंथ :- पउमचरिउ • जैन कवियों में बहुत प्रसिद्ध कवि • ...

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प्रबंध चिंतामणि(prabandh chintamani) का परिचय

प्रबंध चिंतामणि • 1304ई. में संस्कृत भाषा में जैन आचार्य मेरुतुंग द्वारा रचित है।(डॉ . बच्चन सिंह के अनुसार)   मेरुतुंग का परिचय • नागेंद्र गच्छ के आचार्य • गुरु का नाम – चंद्रप्रभ सुरी • प्रधान शिष्य – गुणचंद्र • अन्य प्रमुख ग्रंथ – महापुरुष चरित (इस ग्रंथ में ऋषभदेव,शांतिनाथ,नेमिनाथ,पार्श्वनाथ और महावीर इस प्रकार पांच तीर्थंकरों का संक्षिप्त चरित ...

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भरतेश्वर बाहुबली रास का परिचय(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ)

भरतेश्वर बाहुबली रास(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ) • रचयिता – शालिभद्रसुरी (भीमदेव द्वितीय के समय पाटण में हुए थे।) • रचना समय – 1185ई. में • रचना तिथि – संवत् 1231(मुनिजिन विजय के अनुसार) • 205 छन्दों में रचित। • खंडकाव्य • वीर रस प्रधान और अंत में शांत रस • 203 कड़ियां में रचित। • शालिभद्रसुरी ...

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श्रावकाचार का परिचय {shravakachar ka parichay}

श्रावकाचार:- • दिगम्बर जैन आचार्य देवसेन द्वारा कृत • समय 933ई. या सवंत् 990 • इसमें 250 दोहों में श्रावक धर्म का वर्णन। • गृहस्थ धर्म श्रावक धर्म का वर्णन केन्द्र है। • इसमें साहित्यिक तत्वों का अभाव है। • भाषा – अपभ्रंश • पंक्ति – जो जिण सासण भाषियउ सो मइ कहियउ सारु। जो पालइ सइ भाउ करि सो ...

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