Author Archives: Puran Mal Kumhar

परमाल रासो (आल्हा खण्ड) का परिचय[paramal raso (aalha khand) ka parichay]

Trick :- पर जग • रचनाकार – जगनिक • समय – 13वीं शताब्दी • जगनिक महोबा नरेश परमाल के दरबारी कवि उनका उपस्थित काल :- 1173 ई. • विषय :- महोबा नरेश परमाल तथा उनके सामंत आल्हा और उदल के वैयक्तिक शौर्य का वर्णन। • गेय काव्य परम्परा का प्रबन्धकाव्य • प्रमुख रस – वीर रस (दूसरी रचना वीर गीत ...

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बीसलदेव रासो का परिचय(bisaldaio raso) ka parichay)

• trick :-बीस नर • रचनाकाल :- संवत् 1212 (आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार) संवत् 1073 (रामकुमार वर्मा के अनुसार) 1016 ई. (डॉ नगेंद्र के अनुसार) (संवत् सहस तिहत्तर जांनि, नाल्ह कबीसर सरसीय वाणि।) • रचनाकार – नरपति नाल्ह(1212 वि.स./1155ई.) • प्रमुख रस – श्रृंगार रस • रचना का काव्य रूप – गेह मुक्तक काव्य,वीर गीत(सर्वप्रथम वीर गीत मे लिखी ...

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शारंगधर का जीवन परिचय(sharangadhar ka jeevan parichay)

शारंगधर का जीवन परिचय(sharangadhar ka jeevan parichay) • शारंगधर का आयुर्वेद का ग्रंथ प्रसिद्ध है। • यह अच्छे कवि और सूत्रकार भी थे। • इन्होंने शारंगधर पद्धति के नाम से एक सुभाषित संग्रह भी बनाया और अपना परिचय भी दिया है। • रणथम्भौर के सुप्रसिद्ध वीर महाराज हम्मीरदेव के प्रधान सभासदों में राघवदेव थे। • राघव दास के तीन पुत्र- ...

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पृथ्वीराज रासो का परिचय(prthveeraj raso ka parichay)

Trick :- पृथ्वी चंद • रचनाकार – चंदबरदाई • कवि चंदवरदाई का परिचय :- • जन्म :- 1149 में • जन्म स्थान:- लाहौर में • मृत्यु :- 1192 में (पृथ्वीराज का जन्म एवं इनका जन्म एक ही दिन एवं मृत्यु भी एक साथ हुई ) • इष्ट देवी :- जालंधर देवी • पिता का नाम :- मतह (पूर्वजों की भूमि ...

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कवि चंदबरदाई का जीवन परिचय(kavi Chandbardai ka jeevan paricha)

कवि चंदबरदाई का जीवन परिचय • जन्म :- 1149 में • जन्म स्थान:- लाहौर में • मृत्यु :- 1192 में (पृथ्वीराज का जन्म एवं इनका जन्म एक ही दिन एवं मृत्यु भी एक साथ हुई ) • इष्ट देवी :- जालंधर देवी • पिता का नाम :- मतह (पूर्वजों की भूमि – पंजाब) • पत्नियों का नाम :- कमला और ...

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मार्क्सवाद मे आस्था रखने वाले कवि की शार्ट ट्रिक(marksavad me aastha rakhane vale kavi kI Short trick)

मार्क्सवाद में आस्था रखने वाले कई कवियों ने अपने काव्य में समाजवादी और आर्थिक न्याय के मूल्यों को प्रमोट किया है। मार्क्सवाद मे आस्था रखने वाले कवि की शार्ट ट्रिक राम के साथ राघव भी मार्क्सवाद मे आस्था रखते है। 1. रामविलास शर्मा (1912-2000) 2. केदारनाथ अग्रवाल (1911-2000) 3. रांगेय राघव(1923-1962) नकेनवाद साहित्यिक आंदोलन एक प्रकार का लोकप्रिय सामाजिक आंदोलन ...

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प्रगतिवादी कवियों की शार्ट ट्रिक(pragativadi kaviyon ki Short trick)

प्रगतिवादी सोच का मुख्य तत्त्व है ‘प्रगति’ या ‘विकास’। इस विचारधारा के अनुयायी मानते हैं कि मानव समाज का विकास निरंतर और स्थिर रूप से होना चाहिए, और इसके लिए तकनीकी, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उन्नति की दिशा में कठिन प्रयासों की आवश्यकता है। प्रगतिवादी कवियों की शार्ट ट्रिक  ◆ रांगेय राघव ने कहा अपनी प्रगति के लिए नकटी लोग ...

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प्रेम व मस्ती की कविता लिखने कवियों की शार्ट ट्रिक(prem va masti ki kavita likhane kaviyon ki Short trick)

. प्रेम व मस्ती की कविता लिखने वाले कवि:- ◆ हरि व राम की नरेन्द्र शर्मा प्रेम व मस्ती की कविता लिखते है। 1. हरिवंशराय बच्चन(1907-2003) 2. रामेश्वर शुक्ल अचंल(1915-1995) 3. नरेन्द्र शर्मा (1913-1989) 👉 पढ़ना जारी रखने के लिए यहाँ क्लिक करे। 👉 Pdf नोट्स लेने के लिए टेलीग्राम ज्वांइन कीजिए। 👉 प्रतिदिन Quiz के लिए Facebook ज्वांइन कीजिए।

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सांस्कृतिक गतिविधियों कवियों की शार्ट ट्रिक(sanskrtik gatividhiyon kaviyon ki Short Trick )

सांस्कृतिक गतिविधियों का अर्थ होता है समाज की सांस्कृतिक धाराओं और परंपराओं को बनाए रखने के लिए आयोजित की जाने वाली गतिविधियाँ। ये गतिविधियाँ रंगमंच, संगीत, नृत्य, कला, साहित्य, खान-पान, और खेल के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाती हैं। सांस्कृतिक गतिविधियों कवियों की शार्ट ट्रिक  ◆ सुभद्रा एवं राम ने बालकृष्ण को सांस्कृतिक गतिविधियों में दिन मे ...

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पृथ्वीराजरासो को अप्रमाणित,प्रमाणित एवं अर्द्ध प्रमाणित मानने वाले विद्वान

• पृथ्वीराजरासो को अप्रमाणित मानने वाले विद्वान:- ◆ Short Trick :- मुरारि श्यामदेव और रामकुमार शुक्ल ने अमृत मोती बूलर और ओझा को रासो की अप्रमाणिकता के लिए दिया। 1. मुरारिदीन (मुरारि) 2. कविराज श्यामलदास(श्याम) 3. मुंशीदेव(देव) 4. डॉ.रामकुमार वर्मा(रामकुमार) 5. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल(शुक्ल) 6. अमृतशील(अमृत) 7. मोती लाल मेनारिया(मोती) 8. डॉ.बूलर (बूलर) 9. डॉ.गौरीशंकर हीराचन्द ओझा(ओझा)। • पृथ्वीराजरासो को ...

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आदिकाल की प्रश्नोत्तरी(वन लाइनर)

• आदिकालीन साहित्य मे गद्य का प्राचीनम् ग्रन्थ उद्योतन सूरि कृति कुवलयनमाल कहा(कथा) है। • अंतस्साधनात्मक अनुभूतियो का संकेत करने वाली संधा या संध्या भाषा कहलाती है। • अद्वयव्रज तथा मुनि दन्त ने सिद्धो की भाषा को संधा या संध्या भाषा कहा था। • राजस्थानी बोलियो से मिश्रित ब्रजभाषा के रूप को पिंगल कहते है। • डॉ. मोती लाल मेनारिया ...

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वर्ण रत्नाकर(Varna Ratnakar)का परिचय

• रचनाकार – ज्योतिरीश्वर ठाकुर(13वी शताब्दी) • रचनाकाल – 14 वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् ( सुनीति कुमार के अनुसार) • आठ कल्लोलो (अध्यायों में) • मैथिली का विश्वकोश • मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना • इसमे लेखक ने हिन्दू दरबार और भारतीय जीवन का यथार्थ चित्रण किया गया है। • इसमें कुल 8 कल्लोल है:- नगर वर्णन,नायक का वर्णन,आस्थान वर्णन,ऋतु ...

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उक्तिव्यक्तिप्रकरण(Uktivyaktiprakaraṇa) का परिचय

• रचनाकार – महाराज गोविन्दचन्द्र (शासनकाल 1154ई.) के सभा पं.दामोदर शर्मा • 12वी शताब्दी  • अपूर्ण ग्रंन्थ • भाषा:- अपभ्रंश भाषा • भाषा सिखाने के हेतु(दामोदर शर्मा ने राजकुमारों को शिक्षा देने के लिए इस ग्रंथ की रचना की।) • राजकुमारों को स्थानीय भाषा का ज्ञान कराने के लिए इसे लिखा गया। • उक्ति शब्द की व्याख्या करते हुए मुनि ...

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आधुनिक काल का नामकरण(aadhunik kal ka namakaran)

आधुनिक काल के नामकरण में कुछ संदर्भात्मक तिथियाँ हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर, इसे किसी ऐतिहासिक घटना या विचारधारा के साथ जोड़ा जाता है जो एक समान या स्थायी चरित्रिक बदलाव का प्रतीक होता है। हिंदी साहित्य में, आधुनिक काल का नामकरण अक्सर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उत्तरार्ध में होता है, जिसकी सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक दृष्टि से ...

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रासो शब्द की उत्पत्ति( raaso shabd ki utpatti)

“रासो” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत साहित्य से जुड़ी है। यह शब्द “रस” (महसूसी अनुभव या भावना) से निकला है, जो साहित्यिक काव्य और नाट्य शास्त्र में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। “रासो” का उपयोग भारतीय साहित्य और नृत्य के संदर्भ में किया जाता है, विशेष रूप से कृष्ण लीला के सांस्कृतिक और धार्मिक कथाओं के लिए। “रास” के रूप और आयाम ...

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