प्रश्न-पत्र

 निविदा (Tender) का अर्थ, उद्देश्य, प्रकार व प्रक्रिया(nivida (Tender) ka arth, uddeshya, prakar va prakriya)

 निविदा (Tender) का अर्थ, उद्देश्य, प्रकार व प्रक्रिया 1. निविदा का शाब्दिक अर्थ और परिभाषा शाब्दिक अर्थ: ‘निविदा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है – ‘निवेदन करना’, ‘प्रस्ताव देना’ या ‘सशर्त मूल्य प्रस्ताव जमा करना’। अंग्रेज़ी में इसे Tender या Quotations Call कहा जाता है। परिभाषा: किसी सरकारी, अर्ध-सरकारी या निजी संस्थान द्वारा अपने किसी निर्माण कार्य (Construction Work), सामग्री ...

Read More »

विज्ञप्ति (vigyapti/Press Release)

विज्ञप्ति (vigyapti/Press Release) ‘विज्ञप्ति’ सरकारी, प्रशासनिक और संस्थागत पत्राचार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और औपचारिक रूप है। 1. विज्ञप्ति का शाब्दिक अर्थ ‘विज्ञप्ति’ शब्द संस्कृत की ‘ज्ञा’ धातु में ‘वि’ (विशेष) उपसर्ग लगने से बना है। इसका शाब्दिक अर्थ है — “विशेष रूप से जानकारी देना”, “सूचना देना” या “सार्वजनिक घोषणा करना”। अंग्रेजी में इसे Communiqué या Press Note कहा ...

Read More »

विज्ञप्ति और प्रेस विज्ञप्ति में अंतर(vigyapti aur press vigyapti mein antar)

विज्ञप्ति और प्रेस विज्ञप्ति में अंतर विज्ञप्ति (Notification / Press Note) और प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) दोनों ही सूचना-प्रसारण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सामान्यतः दोनों को एक जैसा मान लिया जाता है, लेकिन इनके उद्देश्य, प्रेषित करने के तरीके और लक्षित पाठक वर्ग में स्पष्ट अंतर होता है। 1. मूल प्रकृति और उद्देश्य : विज्ञप्ति (Notification / Press Note) : ...

Read More »

देवनागरी लिपि के गुण एवं सीमाएँ(devnagri lipi ke gun evam seemaen)

देवनागरी लिपि के गुण एवं सीमाएँ देवनागरी लिपि विश्व की सबसे वैज्ञानिक, व्यवस्थित और परिमार्जित लिपियों में मानी जाती है। हालाँकि, प्रत्येक लिपि की तरह इसमें जहाँ अनेक अद्भुत गुण हैं, वहीं आधुनिक युग (विशेषकर टाइपिंग, डिजिटल प्रिंटिंग और त्वरित लेखन) की दृष्टि से इसकी कुछ व्यावहारिक सीमाएँ भी हैं। देवनागरी लिपि के प्रमुख गुण (Advantages) 1. पूर्णतः वैज्ञानिक और ...

Read More »

मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम(manak devnagri lipi aur hindi vartani ke pramukh niyam)

मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम केंद्रीय हिंदी निदेशालय (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने देवनागरी लिपि और वर्तनी में एकरूपता, स्पष्टता और वैज्ञानिकता लाने के लिए मानक हिंदी वर्तनी के विस्तृत नियम निश्चित किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य मुद्रण (Printing), कंप्यूटर टाइपिंग, प्रकाशन और पठन-पाठन में होने वाले भ्रम को दूर करना है। 1. संयुक्त ...

Read More »

 देवनागरी लिपि अर्थ विकास उपनाम प्रयोग एवं विशेषताएँ

 देवनागरी लिपि: अर्थ, विकास, उपनाम, प्रयोग एवं विशेषताएँ देवनागरी लिपि भारत की सबसे प्रमुख और वैज्ञानिक लिपि है। यह न केवल हिंदी, बल्कि संस्कृत, मराठी, नेपाली, मैथिली, कोंकणी जैसी कई प्रमुख भाषाओं को लिखने का माध्यम है। 1. देवनागरी लिपि का अर्थ ‘देव + नागरी’ : दो शब्दों के मेल से बना है – ‘देव’ + ‘नागरी’। नगर / नागर ...

Read More »

पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ (pashchimi hindi ki boliyan)

पश्चिमी हिंदी की बोलियाँ (शौरसेनी अपभ्रंश से विकसित) पश्चिमी हिंदी (शौरसेनी अपभ्रंश से विकसित) के अंतर्गत मुख्य रूप से 5 बोलियाँ (या उपभाषाएँ) आती हैं। इन्हें याद रखने और समझने की सुविधा के लिए दो वर्गों में बाँटा जाता है: 1. आकार-बहुल बोलियाँ (जिनमें ‘आ’ की ध्वनि अधिक होती है) खड़ी बोली (कौरवी) : यह आधुनिक मानक हिंदी, उर्दू और ...

Read More »

 पूर्वी हिंदी की बोलियाँ(purvi hindi ki boliyan)

 पूर्वी हिंदी की बोलियाँ पूर्वी हिंदी का विकास अर्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है। यह मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश के पूर्वी भागों में बोली जाती है। पूर्वी हिंदी के अंतर्गत तीन मुख्य बोलियाँ आती हैं, जिन्हें याद रखने के लिए एक सरल सूत्र ABC (A – अवधी, B – बघेली, C – छत्तीसगढ़ी) का प्रयोग किया ...

Read More »

भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना(bharopiy aur dravid bhasha-parivar ki tulna)

भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना 1. भारोपीय (Indo-European) भाषा-परिवार विस्तार व महत्त्व : यह संसार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण भाषा-परिवार है। विश्व की लगभग 45% से अधिक जनसंख्या इस परिवार की भाषाएँ बोलती है। प्रमुख शाखाएँ : इसे दो मुख्य वर्ग (सतम और केन्तुम) तथा कई शाखाओं में बाँटा गया है: भारतीय-आर्य (Indo-Aryan) : संस्कृत, पालि, प्राकृत, हिंदी, ...

Read More »

भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास(bhartiy-arya bhashaon ka itihaas)

भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास लगभग 3500 से अधिक वर्षों में फैला हुआ है। भाषाविदों (विशेषकर डॉ. धीरेन्द्र वर्मा, डॉ. भोलनाथ तिवारी और डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी) ने इसके विकासक्रम को मुख्य रूप से तीन ऐतिहासिक चरणों में विभाजित किया है: 1. प्राचीन भारतीय-आर्य भाषा काल (1500 ई.पू. से 500 ई.पू.) इस काल की मुख्य भाषा संस्कृत ...

Read More »

भाषा और व्याकरण का अंतर-संबंध(bhasha aur vyakaran ka antar-sambandh)

भाषा और व्याकरण का अंतर-संबंध भाषा और व्याकरण का संबंध अत्यंत गहरा, अन्योन्याश्रित (एक-दूसरे पर निर्भर) और अभिन्न है। यदि भाषा एक विशाल बहती हुई नदी है, तो व्याकरण उस नदी के दो किनारे (तट) हैं जो उसे बिखरने से रोकते हैं और सही दिशा प्रदान करते हैं। भाषा और व्याकरण के अंतर-संबंध के मुख्य बिंदु 1. भाषा का नियमन ...

Read More »

साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक भाषा में अंतर(sahityik bhasha aur samanya vyavharik bhasha mein antar)

साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक भाषा में अंतर साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक (लोक) भाषा दोनों ही विचारों और भावों की अभिव्यक्ति के माध्यम हैं, किंतु प्रयोग के उद्देश्य, शब्द-चयन, रचना विधान और सौंदर्य की दृष्टि से दोनों में व्यापक अंतर पाया जाता है। जहाँ सामान्य व्यावहारिक भाषा का मुख्य उद्देश्य दैनिक जीवन की सूचनाओं और विचारों का सहज आदान-प्रदान ...

Read More »

भाषा की मुख्य इकाइयाँ (bhasha ki mukhya ikaiyan)

भाषा की मुख्य इकाइयाँ (Units of Language) भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत वैज्ञानिक और रोचक व्यवस्था है। भाषा की रचना छोटी से छोटी ध्वनियों से लेकर बड़े-बड़े वाक्यों के संयोजन से होती है। भाषा की मुख्य रूप से पाँच इकाइयाँ मानी जाती हैं, जो नीचे से ऊपर के क्रम में (सिक्स से शिखर ...

Read More »

भाषा और बोली में अंतर(bhasha aur boli mein antar)

भाषा और बोली में अंतर भाषा और बोली दोनों ही विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम हैं, लेकिन उनके क्षेत्र, स्वरूप, व्याकरण और सामाजिक स्वीकृति में मौलिक अंतर होता है। सामान्यतः किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली स्थानीय वाणी ‘बोली’ कहलाती है, जबकि वही बोली जब विस्तृत क्षेत्र में फैलकर व्याकरणबद्ध और साहित्य समृद्ध हो जाती है, तो ‘भाषा’ का ...

Read More »

भाषा और लिपि में अंतर(bhasha aur lipi mein antar)

भाषा और लिपि में अंतर भाषा और लिपि दोनों ही मानव विचारों के संरक्षण और संप्रेषण के मुख्य आधार हैं। सामान्य शब्दों में, भाषा वह ध्वनि-प्रतीक है जिसे हम बोलते और सुनते हैं, जबकि लिपि वह दृश्य-प्रतीक है जिसे हम लिखते और देखते हैं। यदि भाषा ‘ध्वनि’ (Sound) है, तो लिपि उस ध्वनि का ‘चित्र’ या ‘चिह्न’ (Visual Sign) है। ...

Read More »
error: Content is protected !!