प्रश्न-पत्र

जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) 100 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर

जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) 100 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर ‘जूझ’ पाठ के लेखक कौन हैं? डॉ. आनंद यादव। ‘जूझ’ किस विधा की रचना है? आत्मकथात्मक उपन्यास / संस्मरण। ‘जूझ’ उपन्यास मूल रूप से किस भाषा में लिखा गया है? मराठी भाषा में। ‘जूझ’ का मूल मराठी शीर्षक क्या है? ‘झोंबी’ (जिसका अर्थ लड़ना या जूझना होता है)। ‘जूझ’ का मराठी ...

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 जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) का उद्देश्य व मूल संवेदना और प्रमुख पात्रों

 जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) मूल लेखक: डॉ. आनंद यादव मूल भाषा: मराठी (‘झोंबी’ उपन्यास से) हिंदी अनुवाद: केशव प्रथम वीर विधा: आत्मकथात्मक उपन्यास / संस्मरण प्रमुख पात्र: आनंदा (लेखक/कथानायक), माँ, दादा (पिता – रतनाप्पा), दत्ता जी राव देसाई (गाँव के प्रतिष्ठित मुखिया/जमींदार), रणनवरे मास्टर, मंत्री मास्टर (गणित अध्यापक व कक्षाध्यापक), वसंत पाटील (कक्षा मॉनिटर), न. वा. सौंदलगेकर मास्टर (मराठी अध्यापक ...

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सिल्वर वैडिंग कहानी पर आधारित 50-50 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर

सिल्वर वैडिंग कहानी पर आधारित 50-50 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के लेखक कौन हैं? मनोहर श्याम जोशी। कहानी के मुख्य पात्र यशोधर बाबू का पूरा नाम क्या है? वाई. डी. (यशोधर) पंत। यशोधर बाबू किस सरकारी विभाग में और किस पद पर कार्यरत हैं? गृह मंत्रालय (सेक्रेट्रिएट) में सेक्शन ऑफिसर। यशोधर बाबू की शादी किस तिथि को ...

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 सिल्वर वैडिंग कहानी का उद्देश्य व मूल संवेदना और प्रमुख पात्रों(silver vading kahani ka uddeshya va mool samvedna aur pramukh patron)

 सिल्वर वैडिंग (कहानी) लेखक: मनोहर श्याम जोशी विधा: आधुनिक सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कहानी पुस्तक: वितान भाग-2 (पूरक पाठ्यपुस्तक) प्रमुख पात्र: यशोधर बाबू (वाई. डी. पंत), कृष्णानंद पांडे (किशनदा), यशोधर बाबू की पत्नी, बड़ा बेटा (भूषण), दूसरा व तीसरा बेटा, पुत्री, गिरीश (साला), चड्डा (दफ्तरी सहकर्मी)। मूल विषय: पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap), आधुनिकता और परंपरा का द्वंद्व, मानवीय मूल्यों का क्षरण तथा वृद्धजनों ...

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 छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(chhota mera khet / bagulon ke pankh kavita ka uddeshya va mool samvedna)

 छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख (कविता) कवि: उमाशंकर जोशी मूल भाषा: गुजराती हिंदी रूपांतरण: रघुवीर चौधरी और भोलाभाई पटेल मूल विषय: ‘छोटा मेरा खेत’: कृषि-कर्म के रूपक में काव्य-सृजन प्रक्रिया का चित्रण तथा साहित्य के अक्षय रस का उद्घाटन। ‘बगुलों के पंख’: सांध्यकालीन आकाश में पंक्तिबद्ध उड़ते बगुलों के सम्मोहक व जादुई प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रात्मक अंकन। 1. ...

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कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप पाठ का विस्तृत सार एवं प्रमुख छंद-विश्लेषण

कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप कवि: गोस्वामी तुलसीदास काव्य-धारा: भक्तिकाल की सगुण काव्य-धारा (रामभक्ति शाखा) काव्य-भाषा: ब्रजभाषा (‘कवितावली’) तथा अवधी (‘रामचरितमानस’) मूल रचनाएँ: ‘कवितावली’ (उत्तर कांड) और ‘रामचरितमानस’ (लंका कांड) 1. पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना भाग-1: कवितावली (उत्तर कांड से) युगीन यथार्थ व आर्थिक विषमता का चित्रण: कलिकाल की बेकारी, भूख, गरीबी और ...

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 रुबाइयाँ काव्य का मूल उद्देश्य और मूल संवेदना(rubaiyan kavya ka mool uddeshya aur mool samvedna)

 रुबाइयाँ (काव्य) शायर: फ़िराक़ गोरखपुरी (मूल नाम: रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’) काव्य-रूप / छंद: रुबाई (उर्दू-फ़ारसी का चार पंक्तियों वाला लोकप्रिय छंद) मूल विषय: वात्सल्य रस, माँ-बच्चे का आत्मीय संबंध, भारतीय लोक-जीवन तथा दीवाली व रक्षाबंधन जैसे पावन पर्वों की सांस्कृतिक छटा। शायरी की विशेषताएँ: उर्दू शायरी को पारंपरिक रूमानी व दरबारी घेरे से निकालकर आम आदमी के लोक-जीवन, संस्कृति और ...

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 बादल राग कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(badal raag kavita ka uddeshya va mool samvedna)

 बादल राग (कविता) कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ मूल काव्य-संग्रह:‘अनामिका’ (यह कविता ‘अनामिका’ में छह खंडों में प्रकाशित है, यहाँ इसका छठा खंड संकलित है) विधा: प्रगतिशील / छायावादोत्तर मुक्त छंद कविता मूल विषय: क्रांति का आह्वान, पूँजीपतियों के आतंक-भवन का ध्वंस, शोषित किसान-मज़दूर (लघुमानव) की मुक्ति एवं नवनिर्माण। 1.पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना क्रांति का आह्वान: बादल को क्रांतिदूत ...

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 उषा कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(usha kavita ka uddeshya va mool samvedna)

 उषा (कविता) कवि: शमशेर बहादुर सिंह विधा: प्रयोगवादी नई कविता / बिंबप्रधान कविता काव्य-प्रवृत्ति: ‘कवियों के कवि’, ‘बिंबधर्मी कवि’, ‘उर्दू और हिंदी का दोआब’ मूल विषय: सूर्योदय से ठीक पूर्व के पल-पल बदलते प्राकृतिक सौंदर्य का ग्रामीण परिवेश से जुड़ा गतिशील शब्द-चित्र। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना प्रकृति की गतिशीलता का अंकन: सूर्योदय से ठीक पहले भोर के ...

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 कैमरे में बंद अपाहिज कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(camere mein band apahij kavita ka uddeshya va mool samvedna)

 कैमरे में बंद अपाहिज (कविता) कवि: रघुवीर सहाय काव्य-संग्रह: ‘लोग भूल गये हैं’ विधा: समकालीन व्यंग्य प्रधान नई कविता / नाटकीय एकलाप मूल विषय: दृश्य-संचार माध्यमों (टेलीविजन) का कारोबारी स्वार्थ, मानवीय संवेदनहीनता, पीड़ा का बाजारीकरण तथा शारीरिक चुनौती झेलते व्यक्तियों का शोषण। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना दृश्य-संचार माध्यमों की संवेदनहीनता का पर्दाफ़ाश: यह उजागर करना कि मीडिया ...

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कविता के बहाने / बात सीधी थी पर पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना

कविता के बहाने / बात सीधी थी पर कवि: कुँवर नारायण काव्य-धारा: ‘नयी कविता’ के प्रमुख हस्ताक्षर / नागर संवेदना के कवि मूल काव्य-संग्रह: ‘कविता के बहाने’ — ‘इन दिनों’ संग्रह से ‘बात सीधी थी पर’ — ‘कोई दूसरा नहीं’ संग्रह से 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना कविता 1: ‘कविता के बहाने’ यांत्रिकता के दौर में कविता का ...

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पतंग (कविता) का उद्देश्य व मूल संवेदना(patang (kavita) ka uddeshya va mool samvedna)

पतंग (कविता) कवि: आलोक धन्वा मूल काव्य-संग्रह: ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (1998, कवि का पहला और एकमात्र संग्रह) काव्य-रूप: यह एक लंबी कविता का तीसरा भाग है। मूल विषय: बालसुलभ इच्छाएँ, उमंगें, प्रकृति परिवर्तन तथा बच्चों का अदम्य साहस व निडरता। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना बाल-सुलभ उमंगों का चित्रण: आसमान में उड़ती पतंग के माध्यम से बच्चों ...

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आत्मपरिचय / दिन जल्दी-जल्दी ढलता है पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना

आत्मपरिचय / दिन जल्दी-जल्दी ढलता है (गीत) कवि: हरिवंश राय बच्चन काव्य-धारा: हालावाद / छायावादोत्तर गीतिकाव्य मूल स्रोत: ‘आत्मपरिचय’  तथा ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ (निशा निमंत्रण से) 1. पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना कविता 1: ‘आत्मपरिचय’(निशा निमंत्रण से) स्वयं की पहचान: यह प्रतिपादित करना कि स्वयं को जानना दुनिया को जानने से कहीं अधिक कठिन है। प्रीति-कलह का संबंध: ...

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 बाज़ार दर्शन (निबंध) पाठ का मूल उद्देश्य एवं विस्तृत पाठ-सार

 बाज़ार दर्शन (निबंध) लेखक: जैनेंद्र कुमार विधा: विचार-प्रधान निबंध मूल विषय: उपभोक्तावाद, बाज़ारवाद का मायाजाल, पैसे की व्यंग्य-शक्ति तथा बाज़ार की वास्तविक सार्थकता। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना उपभोक्तावादी संस्कृति पर प्रहार: बाज़ार के आकर्षण, दिखावे और अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह की अंधी दौड़ की निरर्थकता को उजागर करना। बाज़ार के जादू से मुक्ति का मार्ग: आवश्यकताओं की ...

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श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श-समाज विस्तृत पाठ-सार एवं प्रमुख वैचारिक बिंदु

श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श-समाज लेखक: बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर मूल रचना: ‘एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट’ (Annihilation of Caste, 1936) हिंदी रूपांतर: ललई सिंह यादव (शीर्षक: ‘जाति-भेद का उच्छेद’) ऐतिहासिक संदर्भ: यह भाषण ‘जाति-पाँति तोड़क मंडल’ (लाहौर) के 1936 के वार्षिक सम्मेलन के अध्यक्षीय भाषण हेतु लिखा गया था। क्रांतिकारी विचारों से आयोजकों की असहमति के ...

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