?जालन्धर का परिचय ? * जालन्धर नगर भोग नामक देश के ब्राह्मण थे (स स्क्य कं बुम् के अनुसार) * पश्चिम में स्थित सिंधु देश के ठाठ नगर के शूद्र निवासी थे। (तारानाथ के अनुसार) * जालंधर ने कुछ दिनों में नेपाल भी रहे । * जालंधर ने ओडियान में साधना करनी पड़ी थी जहाँ कच्छपा ने इन्हें बौद्ध तन्त्रों ...
Read More »इतिहास
विरूपा का परिचय(Virupa ka parichay)
? विरूपा का परिचय ? * विरूपा का समय-: संवत् 900 के लगभग( आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार ) * विरूपा के तीन नाम -: विरूपा,काल विरूपा और धर्मपाल भी थे और ये नालंदा ओडियान तथा चीन में भी प्रकट हुए थे ।(तारानाथ के अनुसार) * तंजूर में ...
Read More »कण्हपा का परिचय(Kanhapa ka parichay)
?कण्हपा का परिचय? * कण्हपा का समय :- संवत् 900 के उपरांत (आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार) * कण्हपा का समय :- 820 ईस्वी में , कर्नाटक के ब्राह्मण वंश में (डॉ. नगेंद्र के अनुसार) * कहण्पा का समय :- 1199 ई.( डॉ. बच्चन सिंह के अनुसार ) * कण्हपा का जन्म :- उड़ीसा में ( तारा नाथ के अनुसार) ...
Read More »डोम्भिपा का परिचय (Dombhipa ka parichay)
?डोम्भिपा का परिचय ? • डोम्भिपा का जन्म :- मगध के क्षेत्रीय वंश के 840 ईस्वी में लगभग। • इन्होंने विरूपा से दीक्षा ली। • डोम्भिपा के द्वारा रचित 21 ग्रंथ है। • इनमें प्रमुख ग्रंथ है :- 1. डोम्बिपागीतिका 2. योगचर्या 3. अक्षरद्विकोपदेश • डोम्भिपा की पंक्तियां :- ” गंगा जउना माझेरे बहर नाइ। तांहि बुड़िली मातंगि पोइआली ...
Read More »लुईपा का परिचय( Luipa ka parichay)
?लुईपा का परिचय? * लुईपा को तंजूर में भांगाली कहा गया है जिसके आधार पर म.म. हरप्रसाद शास्त्री तथा डॉ. विनीयतोष भट्टाचार्य इन्हें राठ देश के निवासी बंगाली कहते हैं किंतु राहु सांकृत्यायन ने भगांला से भागलपुर का प्रदेश का अर्थ लिया है। वे इन्हे मगधवासी कहते हैं। राजा धर्मपाल के दरबार में ...
Read More »शबरपा का परिचय(Shabarpa ka parichay)
?शबरपा का परिचय(Shabarpa ka parichay)? * शबरपा का जन्म -: 780 ईस्वी में,क्षत्रिय कुल में(डॉ. नगेंद्र के अनुसार) * शबरपा को “नव सराय” नाम तारानाथ ने दिया। * यह सरहपा की शिष्य परंपरा के तीसरे थे। * भांगल या बंगाल देश के थे। (सुम्प म्खन पो के अनुसार) * पूर्व भारत के एवं नर्तक जाति के (तारा नाथ के अनुसार ...
Read More »पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिलाएं(puraskar pane vali pratham mahilaen)
? पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिलाएं ? 1. *बुकर पुरस्कार जीतने वाली प्रथम महिला :- अरुंधति रॉय 2. *अंतरराष्ट्रीय बुकर प्राइज जीतने वाली प्रथम महिला :- गीतांजलि श्री 3. पद्म विभूषण पुरस्कार (हिन्दी) पाने वाली प्रथम महिला :- अमृता प्रीतम (दिल्ली, 2004 में) 4. पद्म भूषण पुरस्कार (हिन्दी) पाने वाली प्रथम महिला :- महादेवी वर्मा (उत्तर प्रदेश, 1956ई.) 5. पद्मश्री ...
Read More »आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के आलोचनात्मक ग्रंथ(Acharya Hazari Prasad Dwivedi ke aalochanatmak granth)
?आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ? ◆ सूर साहित्य (1930 ई.) ◆ हिन्दी साहित्य की भूमिका (1940 ई.) ◆ कबीर उदात्त (1941 ई.) ◆ हिन्दी साहित्य का आदिकाल (1952 ई.) ◆ सहज साधना (1963 ई.) ◆ कालिदास की लालित्य योजना (1965 ई.) ◆ मध्यकालीन बोध का स्वरूप (1970 ई.) ?हजारी प्रसाद द्विवेदी भारतीय साहित्य के प्रसिद्ध और ...
Read More »नंददुलारे वाजपेयी के आलोचनात्मक ग्रंथ(nandadulare vajapeyi ke aalochanatmak granth)
⭐ नंददुलारे वाजपेयी के आलोचनात्मक ग्रंथ⭐ ◆ जयशंकर प्रसाद (1940 ई.) ◆ साहित्य : बीसवीं शताब्दी (1942 ई.) ◆ प्रेमचंद, आधुनिक साहित्य (1950 ई.) ◆ महाकवि सूरदास (1952 ई.) ◆ नया साहित्य : नये प्रश्न (1955 ई.) ◆ महाकवि निराला (1965 ई.) ◆ नयी कविता (1973 ई.) ◆ कवि सुमित्रानंदन पंत (1976 ई.) ...
Read More »प्रयोगवाद का परिचय[prayogavad ka parichay]
◆ प्रयोगवाद का परिचय ◆ ◆ ‘प्रयोग’ का सामान्य अर्थ :- इस्तेमाल करना है, जैसे ‘खाने में सरसों के तेल का प्रयोग लाभप्रद होता है।’ ◆ साहित्य में प्रयोगवाद तार सप्तक’ (1943) में विशिष्ट अर्थ में प्रयुक्त हुआ। ◆ छायावादी काव्यान्दोलन और प्रगतिवादी काव्यान्दोलन की तरह प्रयोगवादी आन्दोलन भी मुख्यतः काव्य तक ही सीमित रहा। ◆ ‘तार सप्तक’ में अज्ञेय ...
Read More »पंच बिड़ाल क्या है?[panch bidal kya hai ]
?पंच बिड़ाल क्या है?[What is Panch Bidal?] ? बौद्ध शास्त्रों में निरूपित पंच प्रतिबंध(panch pratibandh) :- 1. आलस्य :- आलस्य का तात्पर्य – कार्यों, गतिविधियों या जिम्मेदारियों के प्रति प्रयास या ऊर्जा लगाने से बचने या विरोध करने की प्रवृत्ति से है। इसमें प्रेरणा की कमी, विलंब और उत्पादक कार्यों की तुलना में आलस्य या विश्राम को प्राथमिकता देना शामिल ...
Read More »प्रपद्यवाद /नकेनवाद का परिचय[prapadyavad/nakenavad ka parichay]
⭐प्रपद्यवाद /नकेनवाद का परिचय⭐ ◆ स्थापना :- 1956 ई. में, नलिन विलोचन शर्मा ने ◆ नकेनवाद को प्रपद्यवाद के नाम से भी जाना जाता है। ◆ इसे हिन्दी साहित्य में प्रयोगवाद की एक शाखा माना जाता है। ◆ इसके अन्तर्गत बिहार के तीन कवियों को शामिल किया जाता है:- 1. नलिन विलोचन शर्मा 2. केशरी कुमार 3. नरेश कुमार ★ ...
Read More »कविप्रिया रचना का परिचय[kavipriya rachana ka parichay]
◆कविप्रिया रचना का परिचय◆ ◆ कविप्रिया नाम का मतलब एक नदी होता है। ? कविप्रिया (काव्य, 1601ई. ):- ★ रीतिकाल के प्रमुख आचार्य और कवि केशवदास की रचना ★ कविप्रिया के ग्रंथ पर लिखित पंक्ति:- सगुन पदारथ अर्थयुत, सुबरनमय सुभसाज । कंठमाल ज्यो कविप्रिया, कंठ करो कविराज ।। ★ इस ग्रंथ प्रारंभ में केशवदास ने पहले श्री गणेश-वन्दना और फिर सरस्वती की ...
Read More »रघुवीर सहाय द्वारा लिखित स्त्री संबंधित कविताएं[raghuveer sahay dvara likhit stri sambandhit kavitaen]
◆ रघुवीर सहाय (1929-1990) हिंदी के प्रमुख साहित्यकारों में से एक थे। उन्होंने कविता, गद्य, नाटक और पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी रचनाएँ समाज, राजनीति, और मानवीय संवेदनाओं को बारीकी से छूती हैं। यहाँ कुछ प्रमुख स्त्री संबंधित कविताओं का परिचय दिया गया है:- ? रघुवीर सहाय द्वारा लिखित स्त्री संबंधित कविताएं ? ◆ नारी ...
Read More »विद्यानिवास मिश्र के निबन्ध संग्रह[ vidyanivas mishr ke nibandh sangrah]
⭐ विद्यानिवास मिश्र के निबन्ध संग्रह⭐ ◆ छितवन की छाँह (1953 ई.) ◆ हल्दी दूब (1955 ई.) ◆ कदम की फूली डाल (1956 ई.) ◆ तुम चन्दन हम पानी (1957 ई.) ◆ आँगन का पंछी और बनजारा मन (1963 ई.) ◆ मैंने सिल पहुॅचाई (1966 ई.) ◆ बसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972 ई.) ◆ मेरे राम का मुकुट ...
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