इतिहास

निबंध(nibandh) का अर्थ, परिभाषा,विशेषताएं

• आधुनिक युग में निबंध शब्द का प्रयोग :- अंग्रेजी के Essay शब्द के लिए प्रयुक्त है जो मूलतः फ्रेंच शब्द है जिसका अर्थ होता है रचनात्मक प्रयास या प्रयत्न। • अंग्रेजी के एसे (Essay) शब्द का पर्याय है। एसे शब्द की उत्पत्ति अंग्रेजी के फ्रांसीसी शब्द के एसेइस(Essais) के अनुकरण पर हुआ है। जिसका अर्थ:- प्रयास, प्रयत्न या परीक्षण ...

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हिंदी के रचनाकारों का जन्मकाल(hindi ke rachanakaron ka janmakal)

क्रम संख्या रचनाकार का जन्म रचनाकार 1.         1380ई. विद्यापति 2.         1388ई. (डॉ.रामकुमार वर्मा के अनुसार )   रैदास 3.         1398 ई. कबीर दास 4.         1418ई. धर्मदास 5.         1468ई. कुंभनदास 6.         1469ई. गुरुनानक 7.         1478ई. सूरदास 8.         1491ई. परमानन्ददास 9.           1492ई. जायसी 10.     1495ई. कृष्णादास 11.     1498ई. मीराबाई 12.   ...

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रासो साहित्य का परिचय(raso sahity ka parichay)

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के अनुसार प्रमुख 6 रासो ग्रन्थ बताये है:- • Trick :- बीस पृथ्वी पर खुमान और हम्मीर ने विजय प्राप्त कर ली। 1. बीसलदेवरासो (बीस) 2. पृथ्वीराजरासो (पृथ्वी) 3. परमालरासो (पर) 4. खुमानरासो (खुमान) 5. हम्मीररासो (हम्मीर) 6. विजयपालरासो(विजय) 1. बीसलदेवरासो [ trick :-बीस नर ] • रचनाकाल :- संवत् 1212 (आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार)   ...

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परमाल रासो (आल्हा खण्ड) का परिचय[paramal raso (aalha khand) ka parichay]

Trick :- पर जग • रचनाकार – जगनिक • समय – 13वीं शताब्दी • जगनिक महोबा नरेश परमाल के दरबारी कवि उनका उपस्थित काल :- 1173 ई. • विषय :- महोबा नरेश परमाल तथा उनके सामंत आल्हा और उदल के वैयक्तिक शौर्य का वर्णन। • गेय काव्य परम्परा का प्रबन्धकाव्य • प्रमुख रस – वीर रस (दूसरी रचना वीर गीत ...

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बीसलदेव रासो का परिचय(bisaldaio raso) ka parichay)

• trick :-बीस नर • रचनाकाल :- संवत् 1212 (आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार) संवत् 1073 (रामकुमार वर्मा के अनुसार) 1016 ई. (डॉ नगेंद्र के अनुसार) (संवत् सहस तिहत्तर जांनि, नाल्ह कबीसर सरसीय वाणि।) • रचनाकार – नरपति नाल्ह(1212 वि.स./1155ई.) • प्रमुख रस – श्रृंगार रस • रचना का काव्य रूप – गेह मुक्तक काव्य,वीर गीत(सर्वप्रथम वीर गीत मे लिखी ...

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पृथ्वीराज रासो का परिचय(prthveeraj raso ka parichay)

Trick :- पृथ्वी चंद • रचनाकार – चंदबरदाई • कवि चंदवरदाई का परिचय :- • जन्म :- 1149 में • जन्म स्थान:- लाहौर में • मृत्यु :- 1192 में (पृथ्वीराज का जन्म एवं इनका जन्म एक ही दिन एवं मृत्यु भी एक साथ हुई ) • इष्ट देवी :- जालंधर देवी • पिता का नाम :- मतह (पूर्वजों की भूमि ...

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पृथ्वीराजरासो को अप्रमाणित,प्रमाणित एवं अर्द्ध प्रमाणित मानने वाले विद्वान

• पृथ्वीराजरासो को अप्रमाणित मानने वाले विद्वान:- ◆ Short Trick :- मुरारि श्यामदेव और रामकुमार शुक्ल ने अमृत मोती बूलर और ओझा को रासो की अप्रमाणिकता के लिए दिया। 1. मुरारिदीन (मुरारि) 2. कविराज श्यामलदास(श्याम) 3. मुंशीदेव(देव) 4. डॉ.रामकुमार वर्मा(रामकुमार) 5. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल(शुक्ल) 6. अमृतशील(अमृत) 7. मोती लाल मेनारिया(मोती) 8. डॉ.बूलर (बूलर) 9. डॉ.गौरीशंकर हीराचन्द ओझा(ओझा)। • पृथ्वीराजरासो को ...

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वर्ण रत्नाकर(Varna Ratnakar)का परिचय

• रचनाकार – ज्योतिरीश्वर ठाकुर(13वी शताब्दी) • रचनाकाल – 14 वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् ( सुनीति कुमार के अनुसार) • आठ कल्लोलो (अध्यायों में) • मैथिली का विश्वकोश • मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना • इसमे लेखक ने हिन्दू दरबार और भारतीय जीवन का यथार्थ चित्रण किया गया है। • इसमें कुल 8 कल्लोल है:- नगर वर्णन,नायक का वर्णन,आस्थान वर्णन,ऋतु ...

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उक्तिव्यक्तिप्रकरण(Uktivyaktiprakaraṇa) का परिचय

• रचनाकार – महाराज गोविन्दचन्द्र (शासनकाल 1154ई.) के सभा पं.दामोदर शर्मा • 12वी शताब्दी  • अपूर्ण ग्रंन्थ • भाषा:- अपभ्रंश भाषा • भाषा सिखाने के हेतु(दामोदर शर्मा ने राजकुमारों को शिक्षा देने के लिए इस ग्रंथ की रचना की।) • राजकुमारों को स्थानीय भाषा का ज्ञान कराने के लिए इसे लिखा गया। • उक्ति शब्द की व्याख्या करते हुए मुनि ...

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आधुनिक काल का नामकरण(aadhunik kal ka namakaran)

आधुनिक काल के नामकरण में कुछ संदर्भात्मक तिथियाँ हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर, इसे किसी ऐतिहासिक घटना या विचारधारा के साथ जोड़ा जाता है जो एक समान या स्थायी चरित्रिक बदलाव का प्रतीक होता है। हिंदी साहित्य में, आधुनिक काल का नामकरण अक्सर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उत्तरार्ध में होता है, जिसकी सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक दृष्टि से ...

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रासो शब्द की उत्पत्ति( raaso shabd ki utpatti)

“रासो” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत साहित्य से जुड़ी है। यह शब्द “रस” (महसूसी अनुभव या भावना) से निकला है, जो साहित्यिक काव्य और नाट्य शास्त्र में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। “रासो” का उपयोग भारतीय साहित्य और नृत्य के संदर्भ में किया जाता है, विशेष रूप से कृष्ण लीला के सांस्कृतिक और धार्मिक कथाओं के लिए। “रास” के रूप और आयाम ...

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रीतिकाल का नामकरण(ritikal ka namakaran)

“रीतिकाल” का नामकरण साहित्य की विभिन्न कालों और उनके लेखकों के अनुसार किया जा सकता है। यह काल संस्कृत और हिंदी साहित्य में साहित्यिक उत्थान, विविधता, और अद्वितीयता की दिशा में उच्चारित होता है। क्रम संख्या नामकरण Short trick कवि 1. अलंकृत काल अलमी मिश्रबन्धु 2. कलाकाल कला रमाशंकर की डॉ. रमाशंकर शुक्ल‘रसाल’ 3. श्रृंगार काल श्रृंगार विश्व के हजार ...

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आदिकाल का नामकरण(aadikal ka namakaran)

“आदिकाल” एक साहित्यिक और ऐतिहासिक अवधारणा है, जिसे भारतीय साहित्य के प्रारंभिक युग के लिए प्रयोग किया जाता है। क्रम संख्या  आदिकाल का नामकरण शॉर्टट्रिक कवि 1. चारणकाल चारण जा जार्ज ग्रियर्सन 2. आरम्भिक काल आरम्भ मिश्र मिश्रबन्धु 3. वीरगाथा काल वीर राम आचार्य रामचन्द्र शुक्ल 4. सन्धि चारण काल सच्चा राम डॉ. रामकुमार वर्मा 5. आदिकाल आदि हजार आचार्य ...

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संदेश रासक(sandesh rasak) का परिचय

• रचयिता :- अब्दुल रहमान/अद्दहमाण • अब्दुल रहमान का परिचय :- ◆ मीरसेन आरद्द का पुत्र ◆ स्थान :- मिच्छदेस (म्लेच्छ)[पश्चिमी पाकिस्तान] ◆ मुल्तान निवासी( नाथूराम प्रेमी के अनुसार) ◆ जाति :- जुलाहा ◆ समय :- 11वीं शताब्दी का कवि (राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार) ◆ 12वीं सदी के प्रथम मुस्लिम लेखक जो हिन्दी लिखता है । ◆ भारतीय भाषा मे ...

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 ढोला मारु रा दूहा (dhola maru ra dooha)

“ढोला मारु रा दूहा” एक प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत है। यह गीत राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है और इसे राजस्थान की धरोहर माना जाता है। इस गीत में “ढोला” का अर्थ होता है “ढोलक” जो एक परंपरागत राजस्थानी ढोलक है जो लोक गीतों के साथ बजाया जाता है। “मारु रा दूहा” में “मारु” राजस्थान के मारवाड़ी क्षेत्र का ...

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