विज्ञप्ति (vigyapti/Press Release) ‘विज्ञप्ति’ सरकारी, प्रशासनिक और संस्थागत पत्राचार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और औपचारिक रूप है। 1. विज्ञप्ति का शाब्दिक अर्थ ‘विज्ञप्ति’ शब्द संस्कृत की ‘ज्ञा’ धातु में ‘वि’ (विशेष) उपसर्ग लगने से बना है। इसका शाब्दिक अर्थ है — “विशेष रूप से जानकारी देना”, “सूचना देना” या “सार्वजनिक घोषणा करना”। अंग्रेजी में इसे Communiqué या Press Note कहा ...
Read More »Tag Archives: reet hindi vyakaran
विज्ञप्ति और प्रेस विज्ञप्ति में अंतर(vigyapti aur press vigyapti mein antar)
विज्ञप्ति और प्रेस विज्ञप्ति में अंतर विज्ञप्ति (Notification / Press Note) और प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) दोनों ही सूचना-प्रसारण के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। सामान्यतः दोनों को एक जैसा मान लिया जाता है, लेकिन इनके उद्देश्य, प्रेषित करने के तरीके और लक्षित पाठक वर्ग में स्पष्ट अंतर होता है। 1. मूल प्रकृति और उद्देश्य : विज्ञप्ति (Notification / Press Note) : ...
Read More »मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम(manak devnagri lipi aur hindi vartani ke pramukh niyam)
मानक देवनागरी लिपि और हिंदी वर्तनी के प्रमुख नियम केंद्रीय हिंदी निदेशालय (शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार) ने देवनागरी लिपि और वर्तनी में एकरूपता, स्पष्टता और वैज्ञानिकता लाने के लिए मानक हिंदी वर्तनी के विस्तृत नियम निश्चित किए हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य मुद्रण (Printing), कंप्यूटर टाइपिंग, प्रकाशन और पठन-पाठन में होने वाले भ्रम को दूर करना है। 1. संयुक्त ...
Read More »भाषा और व्याकरण का अंतर-संबंध(bhasha aur vyakaran ka antar-sambandh)
भाषा और व्याकरण का अंतर-संबंध भाषा और व्याकरण का संबंध अत्यंत गहरा, अन्योन्याश्रित (एक-दूसरे पर निर्भर) और अभिन्न है। यदि भाषा एक विशाल बहती हुई नदी है, तो व्याकरण उस नदी के दो किनारे (तट) हैं जो उसे बिखरने से रोकते हैं और सही दिशा प्रदान करते हैं। भाषा और व्याकरण के अंतर-संबंध के मुख्य बिंदु 1. भाषा का नियमन ...
Read More »भाषा की मुख्य इकाइयाँ (bhasha ki mukhya ikaiyan)
भाषा की मुख्य इकाइयाँ (Units of Language) भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत वैज्ञानिक और रोचक व्यवस्था है। भाषा की रचना छोटी से छोटी ध्वनियों से लेकर बड़े-बड़े वाक्यों के संयोजन से होती है। भाषा की मुख्य रूप से पाँच इकाइयाँ मानी जाती हैं, जो नीचे से ऊपर के क्रम में (सिक्स से शिखर ...
Read More »भाषा और बोली में अंतर(bhasha aur boli mein antar)
भाषा और बोली में अंतर भाषा और बोली दोनों ही विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम हैं, लेकिन उनके क्षेत्र, स्वरूप, व्याकरण और सामाजिक स्वीकृति में मौलिक अंतर होता है। सामान्यतः किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली स्थानीय वाणी ‘बोली’ कहलाती है, जबकि वही बोली जब विस्तृत क्षेत्र में फैलकर व्याकरणबद्ध और साहित्य समृद्ध हो जाती है, तो ‘भाषा’ का ...
Read More »भाषा और लिपि में अंतर(bhasha aur lipi mein antar)
भाषा और लिपि में अंतर भाषा और लिपि दोनों ही मानव विचारों के संरक्षण और संप्रेषण के मुख्य आधार हैं। सामान्य शब्दों में, भाषा वह ध्वनि-प्रतीक है जिसे हम बोलते और सुनते हैं, जबकि लिपि वह दृश्य-प्रतीक है जिसे हम लिखते और देखते हैं। यदि भाषा ‘ध्वनि’ (Sound) है, तो लिपि उस ध्वनि का ‘चित्र’ या ‘चिह्न’ (Visual Sign) है। ...
Read More »राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर(rashtrabhasha aur rajbhasha mein antar)
राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर राष्ट्रभाषा और राजभाषा दोनों ही किसी देश की भाषाई व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालाँकि, सामान्य बोलचाल में लोग प्रायः इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि संवैधानिक, व्यावहारिक और कार्यात्मक दृष्टि से दोनों में मौलिक अंतर है। राष्ट्रभाषा का संबंध जहाँ पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और जन-सामान्य की स्वीकृति ...
Read More »व्याकरण (Grammar) अर्थ ,परिभाषा और व्याकरण के मुख्य अंग
व्याकरण (Grammar) भाषा के स्वरूप को समझने और उसे शुद्ध रूप में प्रयोग करने के लिए ‘व्याकरण’ का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। व्याकरण किसी भी भाषा का रीढ़ की हड्डी (Backbone) माना जाता है। 1. व्याकरण शब्द का अर्थ (Meaning of Vyakaran) ‘व्याकरण’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है। यह शब्द ‘वि’ + ‘आ’ + ‘कृ’ + ‘ल्यूट्’ ...
Read More »