पत्रकारीय की परिभाषा और प्रकार(patrkariy ki paribhasha aur prakar)

पत्रकारीय लेखन जनसंचार माध्यमों का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह सामान्य साहित्यिक लेखन से काफी भिन्न होता है क्योंकि इसका सीधा संबंध वास्तविक घटनाओं, आंकड़ों और समय-सीमा से होता है।

  1. पत्रकारीय लेखन क्या है और इसकी परिभाषा

अर्थ:

पत्रकारीय लेखन से तात्पर्य ऐसे लेखन से है, जो समसामयिक घटनाओं, मुद्दों, सूचनाओं और विचारों को समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, रेडियो, टीवी या डिजिटल माध्यमों के जरिए पाठकों या दर्शकों तक पहुँचाने के लिए किया जाता है।

परिभाषा:

“पत्रकारीय लेखन वह जनसंचार-उन्मुख लेखन है, जिसके अंतर्गत पाठकों या श्रोताओं को जागरूक, सूचित और शिक्षित करने के लिए समसामयिक घटनाओं एवं तथ्यों का निष्पक्ष, सरल और संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया जाता है।”

    पत्रकार कितने प्रकार के होते हैं?

        पत्रकारिता में कार्य-शैली और अनुबंध (Contract) के आधार पर मुख्य रूप से तीन प्रकार के पत्रकार होते हैं:

  1. पूर्णकालिक पत्रकार (Full-Time Journalist):

    ये किसी समाचार संगठन (जैसे—दैनिक भास्कर, अमर उजाला, नवभारत टाइम्स आदि) में नियमित वेतनभोगी कर्मचारी के रूप में कार्य करते हैं।

    इन्हें संस्थान की ओर से मासिक वेतन मिलता है और ये केवल उसी संस्थान के लिए कार्य करने के लिए बाध्य होते हैं।

  2. अंशकालिक पत्रकार / स्ट्रिंगर (Part-Time Journalist / Stringer):

    ये पत्रकार किसी समाचार संगठन के लिए एक निश्चित मानदेय (Stipend/Honorarium) या अनुबंध के आधार पर काम करते हैं।

    इन्हें एक निश्चित क्षेत्र या विषय (जैसे तहसील, छोटा शहर या विशिष्ट बीट) की खबरें जुटाने का काम दिया जाता है।

  3. स्वतंत्र पत्रकार / फ्रीलांसर (Freelance Journalist):

    इनका संबंध किसी एक विशेष समाचार पत्र या संस्थान से स्थायी रूप से नहीं होता।

    ये स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और अलग-अलग समाचार पत्रों, पत्रिकाओं या डिजिटल पोर्टलों को अपने लेख या रिपोर्ट भेजते हैं। भुगतान इन्हें प्रति लेख या प्रति रिपोर्ट के हिसाब से मिलता है।

  4. पत्रकारीय और सृजनात्मक लेखन में अंतर

    पत्रकारीय लेखन (Journalistic Writing) और सृजनात्मक लेखन (Creative Writing – जैसे कविता, कहानी, उपन्यास) के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

आधार

पत्रकारीय लेखन

सृजनात्मक लेखन

मूल आधार

यह पूर्णतः तथ्यों, घटनाओं और आंकड़ों पर आधारित होता है।

यह कल्पना, भावनाओं और संवेदनाओं पर आधारित होता है।

उद्देश्य

पाठकों को सूचना देना, जागरूक करना और शिक्षित करना।

पाठकों को रसानुभूति कराना, आनंद देना और आत्म-अभिव्यक्ति।

शैली

मुख्य रूप से उल्टा पिरामिड शैली (Inverted Pyramid) का प्रयोग होता है।

कथात्मक, काव्यात्मक या वर्णनात्मक शैली का प्रयोग होता है।

भाषा

सरल, स्पष्ट, सीधी और आम बोलचाल की भाषा।

अलंकृत, प्रतीकात्मक, बिंबप्रधान और काव्यात्मक भाषा।

लेखक की छूट

लेखक को अपनी राय या कल्पना जोड़ने की अनुमति नहीं होती (संपादकीय/फीचर को छोड़कर)।

लेखक को पूर्ण स्वतंत्रता होती है कि वह जैसी चाहे कल्पना करे।

समय-सीमा

यह डेडलाइन (Deadline) से बंधा होता है; खबर समय पर ही उपयोगी होती है।

इसमें समय-सीमा का कोई कठोर बंधन नहीं होता।

स्थायित्व

इसका जीवन तात्कालिक होता है (आज का समाचार कल पुराना हो जाता है)।

यह कालजयी (Long-lasting) होता है; वर्षो बाद भी इसका महत्त्व बना रहता है।

 

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