जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत का मूलभाव और उद्देश्य
1. देवसेना का गीत
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मूलभाव (Central Idea):
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वेदना और एकाकीपन की अभिव्यक्ति: जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपनी विरह-वेदना, पारिवारिक त्रासदियों और संचित आशाओं के टूटने का मार्मिक चित्रण।
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अदम्य संघर्ष और स्वाभिमान: विषम परिस्थितियों और दुर्बल शरीर के बावजूद निराशा (प्रलय) के आगे घुटने न टेककर डटकर मुकाबला करना।
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तपस्या और विरक्ति: अंत समय में आए स्कंदगुप्त के प्रणय-निवेदन को ठुकराकर अपने आत्मसम्मान और देशसेवा के संकल्प पर अडिग रहना।
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कवि का उद्देश्य (Purpose):
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प्रेम में केवल पाने की इच्छा के बजाय त्याग, समर्पण और आत्म-बलिदान की गरिमा को स्थापित करना।
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एक ऐसी भारतीय नारी के अंतर्द्वंद्व और मानसिक दृढ़ता को उजागर करना, जो व्यक्तिगत सुखों को देश और कर्तव्य के लिए सहजता से न्योछावर कर देती है।
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मानवीय जिजीविषा और विषम परिस्थितियों में भी अपने शील व स्वाभिमान की रक्षा करने का संदेश देना।
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2. कार्नेलिया का गीत
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मूलभाव (Central Idea):
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सांस्कृतिक उदारता एवं ‘वसुधैव कुटुंबकम्’: भारत की शरणागत-वत्सलता, जहाँ विश्व के हर कोने से आने वाले पीड़ितों और अनजानों को आश्रय व प्रेम मिलता है।
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अलौकिक प्राकृतिक सुषमा: भारत की सुबह का अनुपम सौंदर्य, हरियाली, शीतल मलय पवन और प्रभात के सुखद वातावरण का मनोहारी वर्णन।
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करुणा और संवेदनशीलता: भारतवासियों के हृदय की गहरी सहानुभूति, जहाँ दूसरों के दुख को देखकर अपनी आँखों से करुणा-जल बहने लगता है।
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कवि का उद्देश्य (Purpose):
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राष्ट्रीय स्वाभिमान और गौरव-बोध: एक विदेशी पात्र (ग्रीक राजकुमारी) के मुख से भारत की महिमा का गान कराकर तत्कालीन पराधीन भारतीयों में आत्मगौरव और देशप्रेम की भावना जगाना।
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विश्व बंधुत्व का संदेश: भारत को एक भौगोलिक भू-भाग के बजाय करुणा, शांति, समन्वय और मानवता के वैश्विक आश्रय-स्थल के रूप में प्रस्तुत करना।
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छायावादी सौंदर्य-चेतना और चित्रात्मक भाषा के माध्यम से भारतीय प्रकृति और संस्कृति का उदात्त चित्र खींचना।
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