शब्द शक्ति काव्यशास्त्र(shabd shakti kavyashastra)

 शब्द शक्ति (काव्यशास्त्र)

परिभाषा: शब्द में अंतर्निहित अर्थ को प्रकट करने वाले व्यापार (कार्य) अथवा शब्द का निश्चयार्थक बोध कराने वाली शक्ति को शब्द शक्ति कहते हैं। ऐतिहासिक संदर्भ:
  • शब्द शक्ति के लिए ‘शक्ति’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आचार्य विश्वनाथ ने किया
  • शब्द शक्ति के लिए ‘वृत्ति’ या ‘व्यापार’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आचार्य मम्मट ने किया

1. सार्थक शब्दों के भेद, शब्द शक्तियाँ और उनके अर्थ

साहित्यशास्त्र में सार्थक शब्दों को तीन भागों में विभाजित किया गया है, जिनसे क्रमशः तीन शब्द शक्तियाँ और तीन प्रकार के अर्थ प्राप्त होते हैं:
क्र.सं. सार्थक शब्द का स्वरूप संबंद्ध शब्द शक्ति प्राप्त अर्थ (अर्थ का नाम) स्वरूप / उदाहरण
1.
वाचक शब्द
अभिधा
वाच्यार्थ / मुख्यार्थ
सीधा, लोक-प्रसिद्ध अर्थ (उदा. गाय, घर, पुस्तक)
2.
लाक्षणिक (लक्षक) शब्द
लक्षणा
लक्ष्यार्थ
मुख्य अर्थ बाधित होने पर लक्षणों पर आधारित अर्थ (उदा. वह तो शेर है)
3.
व्यंजक शब्द
व्यंजना
व्यंग्यार्थ / ध्वन्यार्थ
संदर्भ व परिस्थिति के अनुसार छुपा हुआ तीसरा अर्थ (उदा. संध्या हो गई)

2. अभिधा शब्द शक्ति

परिभाषा व स्वरूप: जिस शब्द शक्ति के द्वारा शब्द के साक्षात् संकेतित मुख्य या लोक-प्रसिद्ध अर्थ (वाच्यार्थ/डिक्शनरी मीनिंग) का बोध होता है, उसे अभिधा शब्द शक्ति कहते हैं। इसे काव्य की ‘प्रथमा’ शक्ति भी कहा जाता है क्योंकि यह सबसे पहले मुख्य अर्थ का बोध कराती है
अभिधा के अंतर्गत शब्दों के तीन भेद:
  1. रूढ़ शब्द: जिनके खंड नहीं किए जा सकते (उदा. हाथ, गाय, घर)
  2. यौगिक शब्द: जो दो या अधिक सार्थक शब्दों के योग से बनते हैं (उदा. पाठ + शाला = पाठशाला)
  3. योगरूढ़ शब्द: जो यौगिक होते हुए भी किसी विशेष अर्थ के लिए रूढ़ हो चुके हैं (उदा. पंकज / जलज = कमल)
अभिधा से जुड़े काव्यशास्त्रीय तत्व:
  • प्रसाद गुण: सरल, सुबोध व स्पष्ट रचना जिसे पढ़ते ही अर्थ तुरंत समझ में आ जाए (उदा. पानी बरसा, धरती हरी हुई)
  • यमक अलंकार: जहाँ एक ही शब्द की पुनरावृत्ति हो और प्रत्येक बार उसका सीधा (अभिधात्मक) अर्थ अलग निकले (उदा. कनक कनक ते सौ गुनी…—एक कनक = सोना, दूसरा कनक = धतूरा)
  • दृष्टांत अलंकार: उपमेय और उपमान वाक्यों में बिंब-प्रतिबिंब भाव होना, जहाँ एक बात की पुष्टि सीधी भाषा में दूसरी बात से की जाती है (उदा. मन मलिन तन सुंदर कैसे, विष रस भरा कनक घट जैसे)
  • कवि देव का मत: रीतिकाल के कवि देव ने अभिधा की महत्ता में लिखा है— अभिधा उत्तम काव्य है, मध्य लक्षणा लीन। अधम व्यंजना रस विरस, उलटी कहत प्रवीन॥

3. लक्षणा शब्द शक्ति

परिभाषा एवं अनिवार्य शर्तें: जब वाक्य में शब्द का मुख्य अर्थ (वाच्यार्थ) लेने में बाधा उत्पन्न हो, और रूढ़ि (परंपरा) या किसी विशेष प्रयोजन के कारण मुख्य अर्थ से संबंधित कोई दूसरा अर्थ (लक्ष्यार्थ) ग्रहण किया जाता है, वहाँ लक्षणा शब्द शक्ति होती है
लक्षणा के तीन प्रमुख लक्षण/शर्तें:
  1. मुख्यार्थ में बाधा उत्पन्न होना
  2. लक्ष्यार्थ का मुख्य अर्थ से कोई न कोई संबंध होना
  3. उसके मूल में कोई ‘रूढ़ि’ (परंपरा/मुहावरा) या ‘प्रयोजन’ (विशेष उद्देश्य) होना
लक्षणा के दो प्रमुख भेद:
(क) रूढ़ा लक्षणा (रूढ़ी शब्द शक्ति): जहाँ बिना किसी विशेष प्रयोजन के, केवल भाषा की पुरानी परंपरा, रूढ़ि, लोक-प्रसिद्धि या मुहावरों के आधार पर लक्ष्यार्थ ग्रहण किया जाता है। प्रमुख उदाहरण:
  • पंजाब वीर है। (पंजाब भूमि नहीं, बल्कि पंजाब के निवासी वीर हैं)
  • राजस्थान जाग उठा। (राजस्थान राज्य नहीं, वहाँ की जनता में चेतना आई है)
  • बाज़ार बंद है। (स्थान नहीं, दुकानें बंद हैं)
  • लाल पगड़ी आ रही है। (पोशाक नहीं, पुलिस का सिपाही आ रहा है)
  • वह हवा से बातें करता है। (मुहावरा: बहुत तेज दौड़ता है)
  • उसने मेरी नाक काट दी। (मुहावरा: प्रतिष्ठा नष्ट करना)
  • चोर पुलिस को देखते ही नौ दो ग्यारह हो गया। (मुहावरा: भाग जाना)
(ख) प्रयोजनवती लक्षणा: जहाँ मुख्य अर्थ बाधित होने पर किसी खास उद्देश्य, चमत्कारी प्रभाव या सौंदर्य उत्पन्न करने के लिए लाक्षणिक अर्थ ग्रहण किया जाता है। प्रमुख उदाहरण:
  • उसका घर गंगा पर है। (बाधा: पानी पर घर असंभव; प्रयोजन: घर का गंगा जैसा अत्यंत पवित्र, शांत व शीतल होना)
  • शिशु शेर का बच्चा है। (प्रयोजन: बालक में अदम्य साहस व तेज दिखाना)
  • दुर्योधन तो साक्षात् गिद्ध था। (प्रयोजन: दुर्योधन की अत्यंत लोलुप, नीच व विनाशकारी दृष्टि दिखाना)
  • यह महल उदास है। (प्रयोजन: महल के वैभव के उजड़ने और राजपरिवार के गहरे शोक को सजीव करना)
  • उषा सुनहले तीर बरसती। (प्रयोजन: प्रातःकाल सूर्य की सुनहरी किरणों के फैलाव को गतिशील रूप देना)
मानवीकरण अलंकार से संबंध: मानवीकरण अलंकार में निर्जीव प्रकृति इंसानी कार्य नहीं कर सकती (मुख्यार्थ में बाधा), और कवि प्रकृति को सजीव बनाने के विशेष प्रयोजन से ऐसा लिखता है; अतः प्रत्येक मानवीकरण अलंकार के पीछे प्रयोजनवती लक्षणा कार्यरत होती है (उदा. मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के)

4. व्यंजना शब्द शक्ति

परिभाषा व स्वरूप: जब अभिधा और लक्षणा दोनों अपना अर्थ देकर शांत हो जाती हैं, और प्रसंग, परिस्थिति, वक्ता या श्रोता के अनुसार एक नया, गूढ़ और छिपा हुआ तीसरा अर्थ (व्यंग्यार्थ/ध्वन्यार्थ) प्रकट होता है, वहाँ व्यंजना शब्द शक्ति होती है। व्यंजना को काव्यशास्त्र में ‘उत्तम काव्य’ या ‘ध्वनि काव्य’ माना जाता है
व्यंजना के दो प्रमुख भेद:
(क) शाब्दी व्यंजना: जहाँ व्यंग्यार्थ किसी विशेष शब्द पर टिका होता है। यदि उस शब्द को हटाकर उसका पर्यायवाची रख दिया जाए, तो व्यंग्यार्थ नष्ट हो जाता है। (यह मुख्य रूप से श्लेष और वक्रोक्ति अलंकार में होती है)। प्रमुख उदाहरण:
  1. रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥ (यहाँ तीसरे ‘पानी’ के तीन अर्थ हैं: मोती के लिए चमक, मनुष्य के लिए इज्जत, चून/आटे के लिए जल। ‘पानी’ की जगह ‘जल’ रखने पर श्लेष नष्ट हो जाएगा)
  2. चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न सनेह गंभीर। को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर॥ (‘वृषभानुजा’ = राधा / गाय; ‘हलधर के बीर’ = कृष्ण / सांड)
  3. चरन धरत चिंता करत, चितवत चारहुँ ओर। सुबरन को खोजत फिरत, कवि, व्यभिचारी, चोर॥ (‘सुबरन’ = सुंदर अक्षर, सुंदर रूप-रंग, सोना)
  4. मंगन को देखि पट देत बार-बार है। (‘पट’ = वस्त्र / किवाड़)
  5. अजो तऱ्यौना ही रह्यो, श्रुति सेवत इक अंग… (‘तऱ्यौना’ = कान का आभूषण / जिसका उद्धार न हुआ हो; ‘श्रुति’ = कान / वेद)
(ख) आर्थी व्यंजना: जहाँ व्यंग्यार्थ किसी खास शब्द पर नहीं, बल्कि पूरे वाक्य के ‘अर्थ’ या प्रसंग (समय, स्थान, वक्ता-श्रोता) पर निर्भर करता है। पर्यायवाची शब्द रख देने पर भी व्यंग्यार्थ बना रहता है। प्रमुख उदाहरण:
  1. संध्या हो गई है। / सूरज डूब गया। (पुजारी = पूजा का समय; चरवाहा = घर लौटने का समय; गृहिणी = दीया जलाने का समय; चोर = चोरी की तैयारी का समय)
  2. शाम के आठ बज गए। (दुकानदार = दुकान बंद करने का समय; छात्र = भोजन/विश्राम का समय)
  3. घर में केवल एक मुट्ठी अनाज बचा है। (व्यंग्यार्थ: परिवार में घोर दरिद्रता है, तुरंत धन/अन्न की व्यवस्था करो)
  4. वह देखो, तुम्हारे पूज्य पिताजी आ रहे हैं। (दो शरारती मित्रों के लिए व्यंग्यार्थ: बातें बंद करो, सीधे बन जाओ और किताब खोलो)
  5. सघन कुंज छाया सुखद, सीतल मंद समीर। मनु ह्वै जात अजौं वहै, वा यमुना के तीर॥ (व्यंग्यार्थ: कृष्ण-वियोग में गोपियों की पूर्वस्मृतियों और मिलन की तीव्र तड़प)

5. तीनों शब्द शक्तियों का तुलनात्मक सार

तुलना का बिंदु अभिधा शब्द शक्ति लक्षणा शब्द शक्ति व्यंजना शब्द शक्ति
मूल शर्त
लोक-प्रसिद्ध सीधा अर्थ होना
मुख्य अर्थ में बाधा व संबंध होना
मुख्यार्थ व लक्ष्यार्थ के बाद नया अर्थ निकलना
प्राप्त अर्थ
वाच्यार्थ / मुख्यार्थ
लक्ष्यार्थ
व्यंग्यार्थ / ध्वन्यार्थ
प्रयुक्त शब्द
वाचक शब्द
लक्षक शब्द
व्यंजक शब्द
अर्थों की संख्या
केवल एक निश्चित अर्थ
एक लक्षित अर्थ
संदर्भानुसार अनेक अर्थ
काव्य में स्थान
साधारण / अधम काव्य
मध्यम काव्य
उत्तम काव्य / ध्वनि काव्य
संक्षिप्त सूत्र
वस्तु का नाम बताती है
वस्तु के गुण/दोष (लक्षण) बताती है
छिपे हुए भाव या रहस्य को खोलती है

6. कठिन एवं पारिभाषिक शब्दों के अर्थ

शब्द अर्थ
निश्चयार्थक
जो निश्चित और स्पष्ट अर्थ का ज्ञान कराए
अन्तर्निहित
भीतर छिपा हुआ / समाया हुआ
व्यापार / वृत्ति
कार्य-प्रणाली / मानसिक क्रिया / बौद्धिक चेष्टा
अभीष्ट अर्थ
चाहा गया या मुख्य भावार्थ
वाच्यार्थ / मुख्यार्थ
शब्द का प्राथमिक, सीधा व शब्दकोश-सम्मत अर्थ
लक्ष्यार्थ
लक्षणों, गुणों या सादृश्यता पर आधारित अर्थ
व्यंग्यार्थ / ध्वन्यार्थ
संदर्भ और प्रसंग के आधार पर निकलने वाला गूढ़, सांकेतिक अर्थ
रूढ़ि
लोक-परंपरा / वर्षों से समाज में चला आ रहा प्रचलन
प्रयोजन
विशेष उद्देश्य / लक्ष्य
साक्षात् संकेतित
बिना किसी मध्यस्थता के सीधे व्यक्त किया गया अर्थ
सुबोधता
सरलता से समझ में आने का गुण
बिंब-प्रतिबिंब भाव
दो कथनों का एक-दूसरे की परछाईं या पुष्टिकारक रूप में प्रस्तुत होना
काकु
बोलने वाले के कंठ-स्वर या उच्चारण के लहजे का उतार-चढ़ाव

7. परीक्षा-उपयोगी मुख्य बिंदु (Quick Revision Points)

  • मुहावरे और लोकोक्तियाँ प्रायः रूढ़ा लक्षणा के अंतर्गत आती हैं (उदा. अंधे की लाठी, नौ दो ग्यारह होना)
  • मानवीकरण अलंकार में अनिवार्य रूप से प्रयोजनवती लक्षणा होती है
  • श्लेष अलंकार और वक्रोक्ति अलंकार वाले काव्यांशों में प्रायः शाब्दी व्यंजना पाई जाती है
  • समय सूचक वाक्य (जैसे घड़ी में चार बज गए, शाम हो गई) विभिन्न व्यक्तियों के संदर्भ में आर्थी व्यंजना के उत्कृष्ट उदाहरण होते हैं

‘शब्द शक्ति’ विषय पर आधारित 50 रिक्त स्थान पूर्ति प्रश्न उत्तर सहित प्रस्तुत हैं

  1. शब्द में अंतर्निहित अर्थ को प्रकट करने वाले व्यापार को __________ कहते हैं।
    उत्तर: शब्द शक्ति
  2. शब्द शक्ति के लिए ‘शक्ति’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग आचार्य __________ ने किया।
    उत्तर: विश्वनाथ
  3. शब्द शक्ति के लिए ‘वृत्ति’ या ‘व्यापार’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग आचार्य __________ ने किया।
    उत्तर: मम्मट
  4. शब्द शक्तियाँ मुख्य रूप से __________ प्रकार की होती हैं।
    उत्तर: तीन
  5. साक्षात् सांकेतिक या लोक-प्रसिद्ध मुख्य अर्थ का बोध कराने वाली शक्ति को __________ कहते हैं।
    उत्तर: अभिधा
  6. अभिधा शब्द शक्ति से निकलने वाले अर्थ को __________ या मुख्यार्थ कहा जाता है।
    उत्तर: वाच्यार्थ
  7. अभिधा शब्द शक्ति में प्रयुक्त शब्द को __________ शब्द कहते हैं।
    उत्तर: वाचक
  8. अभिधा शब्द शक्ति को काव्य की __________ शक्ति भी कहा जाता है।
    उत्तर: प्रथमा
  9. ‘गाय घास चर रही है’—इस वाक्य में __________ शब्द शक्ति है।
    उत्तर: अभिधा
  10. जिन शब्दों के सार्थक खंड नहीं किए जा सकते, वे __________ शब्द कहलाते हैं।
    उत्तर: रूढ़
  11. दो या दो से अधिक सार्थक शब्दों के योग से बने शब्द __________ कहलाते हैं।
    उत्तर: यौगिक
  12. ‘पंकज’ और ‘जलज’ शब्द अभिधा के __________ भेद के अंतर्गत आते हैं।
    उत्तर: योगरूढ़
  13. अभिधा शब्द शक्ति का संबंध मुख्य रूप से काव्य के __________ गुण से होता है।
    उत्तर: प्रसाद
  14. “अभिधा उत्तम काव्य है, मध्य लक्षणा लीन…” यह प्रसिद्ध पंक्ति रीतिकाल के कवि __________ की है।
    उत्तर: देव
  15. मुख्य अर्थ में बाधा उपस्थित होने पर जो अर्थ ग्रहण किया जाता है, उसे __________ कहते हैं।
    उत्तर: लक्ष्यार्थ
  16. लक्षणा शब्द शक्ति में प्रयुक्त शब्द को __________ शब्द कहा जाता है।
    उत्तर: लक्षक
  17. लक्षणा शब्द शक्ति के मुख्य रूप से __________ भेद होते हैं।
    उत्तर: दो (रूढ़ा लक्षणा और प्रयोजनवती लक्षणा)
  18. परंपरा या लोक-प्रसिद्धि के आधार पर अर्थ ग्रहण करने वाली लक्षणा को __________ कहते हैं।
    उत्तर: रूढ़ा लक्षणा
  19. किसी विशेष उद्देश्य या प्रभाव को प्रकट करने के लिए प्रयुक्त लक्षणा को __________ कहते हैं।
    उत्तर: प्रयोजनवती लक्षणा
  20. “वह लड़का तो बिल्कुल गधा है”—यहाँ ‘गधा’ शब्द में __________ शब्द शक्ति है।
    उत्तर: लक्षणा
  21. “राजस्थान जाग उठा”—इस वाक्य में __________ लक्षणा शब्द शक्ति है।
    उत्तर: रूढ़ा
  22. “लाल पगड़ी आ रही है”—यहाँ ‘लाल पगड़ी’ का लाक्षणिक अर्थ __________ है।
    उत्तर: पुलिस का सिपाही
  23. भाषा में प्रयुक्त अधिकांश मुहावरे और लोकोक्तियाँ __________ लक्षणा के अंतर्गत आते हैं।
    उत्तर: रूढ़ा
  24. “उसका घर गंगा पर है”—इस वाक्य में __________ लक्षणा शब्द शक्ति है।
    उत्तर: प्रयोजनवती
  25. “उसका घर गंगा पर है” में घर की __________ और शीतलता प्रकट करने का प्रयोजन है।
    उत्तर: पवित्रता
  26. “मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के”—इस पंक्ति में __________ अलंकार के कारण प्रयोजनवती लक्षणा है।
    उत्तर: मानवीकरण
  27. प्रत्येक मानवीकरण अलंकार के मूल में __________ शब्द शक्ति कार्यरत होती है।
    उत्तर: प्रयोजनवती लक्षणा
  28. अभिधा और लक्षणा के शांत हो जाने पर जो तीसरा गूढ़ अर्थ प्रकट होता है, उसे __________ कहते हैं।
    उत्तर: व्यंग्यार्थ (या ध्वन्यार्थ)
  29. व्यंजना शब्द शक्ति में प्रयुक्त शब्द को __________ शब्द कहते हैं।
    उत्तर: व्यंजक
  30. काव्यशास्त्र में व्यंजना शब्द शक्ति को __________ काव्य की श्रेणी में रखा गया है।
    उत्तर: उत्तम (या ध्वनि)
  31. व्यंजना शब्द शक्ति के मुख्य रूप से __________ भेद होते हैं।
    उत्तर: दो (शाब्दी व्यंजना और आर्थी व्यंजना)
  32. जहाँ व्यंग्यार्थ किसी विशिष्ट शब्द पर टिका हो और शब्द बदलते ही चमत्कार नष्ट हो जाए, वहाँ __________ व्यंजना होती है।
    उत्तर: शाब्दी
  33. जहाँ व्यंग्यार्थ शब्द पर नहीं बल्कि उसके अर्थ पर निर्भर हो, वहाँ __________ व्यंजना होती है।
    उत्तर: आर्थी
  34. शाब्दी व्यंजना मुख्य रूप से __________ और वक्रोक्ति अलंकार वाले पदों में पाई जाती है।
    उत्तर: श्लेष
  35. “रहिमन पानी राखिए…” दोहे की तीसरी पंक्ति के ‘पानी’ शब्द में __________ व्यंजना है।
    उत्तर: शाब्दी
  36. “को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर”—इस पद में __________ व्यंजना शब्द शक्ति है।
    उत्तर: शाब्दी
  37. “संध्या हो गई है”—इस वाक्य में प्रसंगानुसार अलग-अलग अर्थ निकलने के कारण __________ व्यंजना है।
    उत्तर: आर्थी
  38. “सूरज डूब गया”—चोर के लिए इसका व्यंग्यार्थ __________ की तैयारी का समय होना है।
    उत्तर: चोरी
  39. “घर में केवल एक मुट्ठी अनाज बचा है”—इस वाक्य का व्यंग्यार्थ परिवार की घोर __________ को दर्शाता है।
    उत्तर: दरिद्रता (या गरीबी)
  40. जिस शब्द शक्ति में बुद्धि पर कोई जोर नहीं पड़ता और अर्थ तत्काल समझ आता है, वह __________ है।
    उत्तर: अभिधा
  41. जिस शब्द शक्ति में केवल एक ही निश्चित अर्थ प्राप्त होता है, वह __________ कहलाती है।
    उत्तर: अभिधा
  42. संदर्भ और श्रोता के अनुसार जिसके अनेक अर्थ निकल सकते हैं, वह __________ शब्द शक्ति है।
    उत्तर: व्यंजना
  43. “बाज़ार बंद है”—यहाँ ‘बाज़ार’ का लक्ष्यार्थ बाज़ार की __________ से है।
    उत्तर: दुकानें
  44. बोलने वाले के कंठ-स्वर या लहजे के उतार-चढ़ाव को काव्यशास्त्र में __________ कहा जाता है।
    उत्तर: काकु
  45. “दुर्योधन तो साक्षात् गिद्ध था”—यहाँ दुर्योधन की __________ दृष्टि प्रकट करने का प्रयोजन है।
    उत्तर: लोलुप (या नीच/विनाशकारी)
  46. “चरन धरत चिंता करत…” में ‘सुबरन’ शब्द के तीन अर्थ होने के कारण __________ व्यंजना है।
    उत्तर: शाब्दी
  47. उपमेय और उपमान वाक्यों में बिंब-प्रतिबिंब भाव होने पर __________ अलंकार बनता है।
    उत्तर: दृष्टांत
  48. लक्षणा शब्द शक्ति में मुख्यार्थ और लक्ष्यार्थ के बीच कोई न कोई __________ होना अनिवार्य है।
    उत्तर: संबंध
  49. “वह तो हवा से बातें करता है”—इस वाक्य का लाक्षणिक अर्थ बहुत __________ दौड़ना है।
    उत्तर: तेज़
  50. शब्द शक्ति के संक्षिप्त सूत्र के अनुसार, अभिधा वस्तु का नाम बताती है, लक्षणा गुण/दोष बताती है और व्यंजना __________ को खोलती है।
    उत्तर: छिपे हुए भाव (या रहस्य)

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