व्याकरण

भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना(bharopiy aur dravid bhasha-parivar ki tulna)

भारोपीय और द्रविड़ भाषा-परिवार की तुलना 1. भारोपीय (Indo-European) भाषा-परिवार विस्तार व महत्त्व : यह संसार का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण भाषा-परिवार है। विश्व की लगभग 45% से अधिक जनसंख्या इस परिवार की भाषाएँ बोलती है। प्रमुख शाखाएँ : इसे दो मुख्य वर्ग (सतम और केन्तुम) तथा कई शाखाओं में बाँटा गया है: भारतीय-आर्य (Indo-Aryan) : संस्कृत, पालि, प्राकृत, हिंदी, ...

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भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास(bhartiy-arya bhashaon ka itihaas)

भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास भारतीय-आर्य भाषाओं का इतिहास लगभग 3500 से अधिक वर्षों में फैला हुआ है। भाषाविदों (विशेषकर डॉ. धीरेन्द्र वर्मा, डॉ. भोलनाथ तिवारी और डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी) ने इसके विकासक्रम को मुख्य रूप से तीन ऐतिहासिक चरणों में विभाजित किया है: 1. प्राचीन भारतीय-आर्य भाषा काल (1500 ई.पू. से 500 ई.पू.) इस काल की मुख्य भाषा संस्कृत ...

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भाषा और व्याकरण का अंतर-संबंध(bhasha aur vyakaran ka antar-sambandh)

भाषा और व्याकरण का अंतर-संबंध भाषा और व्याकरण का संबंध अत्यंत गहरा, अन्योन्याश्रित (एक-दूसरे पर निर्भर) और अभिन्न है। यदि भाषा एक विशाल बहती हुई नदी है, तो व्याकरण उस नदी के दो किनारे (तट) हैं जो उसे बिखरने से रोकते हैं और सही दिशा प्रदान करते हैं। भाषा और व्याकरण के अंतर-संबंध के मुख्य बिंदु 1. भाषा का नियमन ...

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साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक भाषा में अंतर(sahityik bhasha aur samanya vyavharik bhasha mein antar)

साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक भाषा में अंतर साहित्यिक भाषा और सामान्य व्यावहारिक (लोक) भाषा दोनों ही विचारों और भावों की अभिव्यक्ति के माध्यम हैं, किंतु प्रयोग के उद्देश्य, शब्द-चयन, रचना विधान और सौंदर्य की दृष्टि से दोनों में व्यापक अंतर पाया जाता है। जहाँ सामान्य व्यावहारिक भाषा का मुख्य उद्देश्य दैनिक जीवन की सूचनाओं और विचारों का सहज आदान-प्रदान ...

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भाषा की मुख्य इकाइयाँ (bhasha ki mukhya ikaiyan)

भाषा की मुख्य इकाइयाँ (Units of Language) भाषा केवल अभिव्यक्ति का साधन ही नहीं है, बल्कि यह एक अत्यंत वैज्ञानिक और रोचक व्यवस्था है। भाषा की रचना छोटी से छोटी ध्वनियों से लेकर बड़े-बड़े वाक्यों के संयोजन से होती है। भाषा की मुख्य रूप से पाँच इकाइयाँ मानी जाती हैं, जो नीचे से ऊपर के क्रम में (सिक्स से शिखर ...

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भाषा और बोली में अंतर(bhasha aur boli mein antar)

भाषा और बोली में अंतर भाषा और बोली दोनों ही विचारों के आदान-प्रदान के माध्यम हैं, लेकिन उनके क्षेत्र, स्वरूप, व्याकरण और सामाजिक स्वीकृति में मौलिक अंतर होता है। सामान्यतः किसी क्षेत्र विशेष में बोली जाने वाली स्थानीय वाणी ‘बोली’ कहलाती है, जबकि वही बोली जब विस्तृत क्षेत्र में फैलकर व्याकरणबद्ध और साहित्य समृद्ध हो जाती है, तो ‘भाषा’ का ...

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भाषा और लिपि में अंतर(bhasha aur lipi mein antar)

भाषा और लिपि में अंतर भाषा और लिपि दोनों ही मानव विचारों के संरक्षण और संप्रेषण के मुख्य आधार हैं। सामान्य शब्दों में, भाषा वह ध्वनि-प्रतीक है जिसे हम बोलते और सुनते हैं, जबकि लिपि वह दृश्य-प्रतीक है जिसे हम लिखते और देखते हैं। यदि भाषा ‘ध्वनि’ (Sound) है, तो लिपि उस ध्वनि का ‘चित्र’ या ‘चिह्न’ (Visual Sign) है। ...

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 भाषा के प्रकार(bhasha ke prakar)

 भाषा के प्रकार भाषा को समझने और उसका विश्लेषण करने के लिए विद्वानों ने इसे अलग-अलग दृष्टिकोणों से विभाजित किया है। ‘विचारों (अभिव्यक्ति) के आधार पर’ और ‘प्रयोग (क्षेत्र / कार्यात्मक) के आधार पर’ भाषा के रूपों को निम्नलिखित प्रकार से समझा जा सकता है: 1. विचारों (अभिव्यक्ति) के आधार पर भाषा के प्रकार मनुष्य अपने विचारों, भावों और संवेदनाओं ...

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राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर(rashtrabhasha aur rajbhasha mein antar)

राष्ट्रभाषा और राजभाषा में अंतर राष्ट्रभाषा और राजभाषा दोनों ही किसी देश की भाषाई व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालाँकि, सामान्य बोलचाल में लोग प्रायः इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि संवैधानिक, व्यावहारिक और कार्यात्मक दृष्टि से दोनों में मौलिक अंतर है। राष्ट्रभाषा का संबंध जहाँ पूरे राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और जन-सामान्य की स्वीकृति ...

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भाषा के प्रमुख रूप(bhasha ke pramukh roop)

भाषा के प्रमुख रूप भाषा समाज और संस्कृति के साथ लगातार विकसित होती है। प्रयोग, क्षेत्र और सामाजिक स्वीकृति के आधार पर भाषा के अलग-अलग रूप और भूमिकाएँ बन जाती हैं। 1. मानक भाषा (Standard Language) परिभाषा : व्याकरण के नियमों से सुव्यवस्थित, सर्वमान्य, और शिष्ट समाज द्वारा प्रयुक्त भाषा का रूप मानक भाषा कहलाता है। व्याख्या : जब किसी ...

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भाषा व्याकरण और उसके प्रमुख घटकों तथ्यात्मक बिंदु

भाषा, व्याकरण और उसके प्रमुख घटकों से जुड़े अति-महत्वपूर्ण तथ्यात्मक बिंदु (Factual Points) 1. इकाई आधारित मुख्य तथ्य (Smallest & Largest Units) भाषा की सबसे छोटी मौखिक इकाई : ध्वनि (Sound) भाषा की सबसे छोटी लिखित इकाई : वर्ण (Letter) अर्थ के आधार पर सबसे छोटी इकाई : शब्द (Word) भाव या अर्थ की दृष्टि से सबसे बड़ी / पूर्ण ...

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वाक्य विचार(vakya vichar )

वाक्य विचार (Syntax) व्याकरण का चौथा और सबसे अंतिम तथा पूर्ण अंग ‘वाक्य विचार’ (Syntax) है। 1. वाक्य विचार की परिभाषा (Definition) परिभाषा : “व्याकरण का वह विभाग जिसके अंतर्गत वाक्यों की रचना, उनके भेदों, वाक्यों के परस्पर संबंध, वाक्य-विश्लेषण (Synthesis) तथा विराम-चिह्नों के प्रयोग का विस्तार से अध्ययन किया जाता है, उसे ‘वाक्य विचार’ कहते हैं।” वाक्य (Sentence) क्या ...

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 शब्द विचार (Morphology)

 शब्द विचार (Morphology) व्याकरण के चार प्रमुख अंगों में से दूसरा सबसे महत्वपूर्ण अंग ‘शब्द विचार’ (Morphology) है। 1. शब्द विचार की परिभाषा (Definition) परिभाषा : “व्याकरण का वह विभाग जिसके अंतर्गत शब्दों की उत्पत्ति, बनावट, रूप परिवर्तन, भेदों और उनके अर्थ का विस्तार से अध्ययन किया जाता है, उसे शब्द विचार कहते हैं।” शब्द (Word) क्या है? एक या ...

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पद विचार (Syllable / Positional Analysis)

पद विचार (Syllable / Positional Analysis) व्याकरण का तीसरा प्रमुख और अत्यंत व्यावहारिक अंग ‘पद विचार’ (Syllable / Positional Analysis) है। Compiled by Puran Mal Kumhar 1. पद विचार की परिभाषा (Definition of Pad Vichar) परिभाषा : “व्याकरण का वह विभाग जिसके अंतर्गत वाक्यों में प्रयुक्त ‘पदों’, उनके भेदों, लिंग, वचन, कारक, काल तथा पद-परिचय (Parsing) के नियमों का विस्तार ...

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व्याकरण (Grammar) अर्थ ,परिभाषा और व्याकरण के मुख्य अंग

व्याकरण (Grammar) भाषा के स्वरूप को समझने और उसे शुद्ध रूप में प्रयोग करने के लिए ‘व्याकरण’ का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। व्याकरण किसी भी भाषा का रीढ़ की हड्डी (Backbone) माना जाता है। 1. व्याकरण शब्द का अर्थ (Meaning of Vyakaran) ‘व्याकरण’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है। यह शब्द ‘वि’ + ‘आ’ + ‘कृ’ + ‘ल्यूट्’ ...

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