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कीर्ति लता का परिचय (Kirti Lata ka parichay)

🌺कीर्ति लता का परिचय🌺    * कीर्तिलता को कहाणी भी कहते है। * विद्यापति की प्रथम रचना   * रचनाकाल गणेश्वर की मृत्यु के बाद का है ,1380 (बाबूराम सक्सेना के अनुसार) * कीर्ति लता की रचना के समय विद्यापति की आयु 20 वर्ष की थी    * इसमें विद्यापति ने स्वयं को ‘खेलन कवि’ कहा है। खेलन का अभिप्रायः ...

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राउरवेलि(राउलवेल) का परिचय(Raurveli ka parichay)

🌺राउरवेलि(राउलवेल) का परिचय 🌺   * रचनाकाल – 10वीं शताब्दी( डॉ. नगेन्द्र के अनुसार)   * राउलवेल का अर्थ – राजकुल विलास(इसलिए शिलालेख के व्यक्ति राजकुल के प्रतीत होते है।)   *विषय:- सामन्त की नायिकाओं का नखशिख वर्णन।(सात नायिकाओं का)   * रचनाकार – रोड़ा   * हिन्दी का प्रथम चम्पू काव्य(गद्य-पद्य मिश्रण)   * शिलांकित(शिला या चट्टानो पर लिखा ...

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ढोला मारु रा दूहा कथा सार(Dhola Maru Ra Duha katha saar)

                                                              🌺ढोला मारु रा दूहा कथा सार🌺 कथा सारः– पूंगल देश में पिंगल नाम का राजा रहता था। उस समय नरवर पर नल का राज्य था। पिंगल के एक कन्या ...

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खुमानरासो का परिचय(Khumanraso ka parichay)

🌺 खुमानरासो का परिचय🌺 Trick :- खुद * रचनाकार – दलपति विजय(दौलत विजय भी कहा जा सकता है।) * नायक – खुमान द्वितीय (मेवाड के राजा) * समय – 9वीं शताब्दी(आ.शुक्ल के अनुसार) 17 वीं शताब्दी (डॉ. मोतीलाल मेनारिया के अनुसार) * छन्द – 5000 छन्दों में रचना की। * प्रमुख भाषा – राजस्थानी * प्रतिपाद्य राजशस्ति * यह ग्रन्थ ...

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प्रमुख आचार्यों और अलंकारों की संख्या(pramukh aachaaryon aur Acharyas and Alankars)

🌺प्रमुख आचार्यों और अलंकारों की संख्या 🌺   क्र.सं. आचार्यों के नाम आचार्यों के ग्रन्थ अलंकारों की संख्या 1.       भरतमुनि नाट्यशास्त्र 4 2.       अग्नि पुराण अग्नि पुराण 14   3.       वामन काव्यालंकार सूत्रवृत्ति 31   4.       दंडी काव्यादर्श 35 5.       भामह काव्यालंकार 38 6.       उद्भट काव्यालंकार सार- संग्रह 41   7.       रुद्रट काव्यालंकार ...

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बंसतविलास का परिचय(Basantvilas ka parichay )

🌺बंसतविलास का परिचय 🌺 * रचनाकार – अज्ञात(इसके रचयिता का पता नही चल सका है।) * प्रथम सम्पादक – केशवलाल हर्षादराय ध्रुव * प्रमुख रस – श्रृंगार रस * छन्द – 84 छन्द * इसमे प्रकृति और नारी पर बसन्त के मादक प्रभाव का चित्रण * जैनेतर फागु काव्य * गुजराती विद्वान केशव हर्षद ध्रुव ने सबसे पहलेवसंतविलास की एक सचित्र पांडुलिपि ...

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कृष्णा दास पयहारी का परिचय(Krishna Das Payhari ka parichay)

🌺 कृष्णा दास पयहारी का परिचय🌺 * जयपुर के प्रसिद्ध गलता नामक स्थान के महन्त।   * जाति दामिनी मां ब्राह्मण   * भाषा ब्रिज   * गुरु का नाम अनंतानंद * कृष्णदास केवल दूध ही पीते थे इसलिए पियारी कहलाते हैं कल आए आवरी भाव काल संवत 1556 से 1584 * आमेर के महाराज पृथ्वीराज के गुरु कापालिक संप्रदाय ...

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सूदन का परिचय(Sudan ka parichay)

🌺 सूदन का परिचय 🌺 *सूदन हिंदी के वीर रस के कवियों में प्रमुख कवि। * जाति – माथुर एवं मथुरा के निवासी थे। * पिता का नाम – वसंत ”मथुरापर का सुभ धाम, माथुर कुल उतपत्ति वर। पिता वसन्त सुनाम, सूदन जानहु सकर कवि।।” (सुजान चरित्र में ) * भरतपुर के राजा सूरजमल उपनाम सुजान सिंह के आश्रित थे। ...

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नागरीदास का परिचय (Nagaridas ka parichay )

🌺 नागरीदास का परिचय 🌺 *नागरीदास किशनगढ़ के महाराज राजसिंह के पुत्र और महाराजा मानसिंह के पौत्र। * जन्म- संवत् 1756   * असली नाम – सांवत सिंह   * कविता में नाम- नागरी, नागर,नागरी दास और नागरिया । * पुत्र सरदार सिंह का राज्य अभिषेक हो जाने के पश्चात नागरीदास वापस वृन्दावन चले गये और वहां कृष्ण भक्ति में ...

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पद्मावत का सार(padmavat ka saar)

🌺 पद्मावत का सार 🌺 * सिंहल अति सुंदर द्वीप है। अन्य द्वीपों से उसकी सुंदरता बढ़-चढ़कर है । * सिंहल द्वीप का राजा गंधर्वसेन है। उसका प्रताप चारों ओर फैला है। उसके पास असंख्य सेना है । * राजा गंधर्वसेन की रानी चंपावती को पदमावती नाम की अपूर्व सुंदरी कन्या उत्पन्न हुई। * पदमावती ने एक हीरामन नामक तोता ...

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 रिट्ठणेमि चरिउ (हरिवंश पुराण) का परिचय[Rittanemi Chariyu (Harivansh Purana) ka parichay]

🌺रिट्ठणेमि चरिउ (हरिवंश पुराण) का परिचय 🌺 • स्वयंभू द्वारा रचित  • विषय – तीर्थंकर नेमिनाथ के चरित्र का वर्णन। • कुल श्लोक – 18हजार श्लोक। • चार काण्डों और 112 सिंधियों में विभाजित है। • चार काण्डों में विभक्त :- 1. यादव कांड(20 संधियां) 2. कुरु कांड (20 संधियां) 3. युद्धकांड (20संधियां) फाल्गुन नक्षत्र तृतीया तिथी बुधवार और शिव ...

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भविस्सयत कथा का परिचय(Bhavishyat Katha ka parichay)

🌺भविस्सयत कथा का परिचय 🌺 • भविस्सयत कथा अपभ्रंश के कथाओं में प्रसिद्ध ग्रंथ है । * रचयिता – धनपाल * कुल सिंधिया – 22 सिंधिया • भविस्सयत कथा में श्रुतपंचमी व्रत के फलवर्णन स्वरूप भविस्सयत कथा का वर्णन है इसलिए इसे श्रुति पंचमी कथा भी कहते हैं। • अपभ्रंश भाषा के प्रकाशित होने वाले काव्यों में भविस्सयत कथा ग्रंथ ...

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पाहुड दोहा का परिचय(Pahud Doha ka parichay)

🌺पाहुड दोहा का परिचय🌺 * रचयिता- राम सिंह। * रचना समय :- संवत् 1794 अर्थात् 1737 ई. * भाषा- अपभ्रंश भाषा * कुल पद्यों की संख्या – 222 पद्यों में   *अत्यंत मधुर और सरल शैली से चैतन्यदेव का गुणगान गाते हुए बर्हिमुखता छुड़ाकर अंर्तमुखता उत्पन्न करती है।   * जैनियों ने ‘पाहुड’ शब्द का प्रयोग किसी विशेष विषय के ...

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मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना वर्ण रत्नाकर का परिचय(maithili gady ki pratham rachana Varna Ratnakar ka parichay)

🌺वर्ण रत्नाकर का परिचय🌺   * रचनाकार – ज्योतिरीश्वर ठाकुर(13वी शताब्दी) * रचनाकाल – 14 वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् ( सुनीति कुमार के अनुसार) * आठ कल्लोलो (अध्यायों में) * मैथिली का विश्वकोश * मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना * इसमे लेखक ने हिन्दू दरबार और भारतीय जीवन का यथार्थ चित्रण किया गया है। * इसमें कुल 8 कल्लोल है:- ...

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प्राकृत पैगलम् का परिचय(Prakrit Pagalam ka parichay)

🌺प्राकृत पैगलम् का परिचय🌺 * प्राकृत पैगलम् में प्राकृत और अपभ्रंश की स्फुट रचनाएं संग्रहित है । * छंद शास्त्र संबंधित पुस्तक * हिंदी में प्रारंभिक भाषा रूप और छंद को समझने के लिए यह प्रमाणित ग्रंथ है। * समय – 14वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् (डॉ .बच्चन सिंह के अनुसार) 15 वीं शताब्दी का आरंभ (सुनीति कुमार कू अनुसार) * ...

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