. प्रेम व मस्ती की कविता लिखने वाले कवि:- ◆ हरि व राम की नरेन्द्र शर्मा प्रेम व मस्ती की कविता लिखते है। 1. हरिवंशराय बच्चन(1907-2003) 2. रामेश्वर शुक्ल अचंल(1915-1995) 3. नरेन्द्र शर्मा (1913-1989) 👉 पढ़ना जारी रखने के लिए यहाँ क्लिक करे। 👉 Pdf नोट्स लेने के लिए टेलीग्राम ज्वांइन कीजिए। 👉 प्रतिदिन Quiz के लिए Facebook ज्वांइन कीजिए।
Read More »Author Archives: Puran Mal Kumhar
सांस्कृतिक गतिविधियों कवियों की शार्ट ट्रिक(sanskrtik gatividhiyon kaviyon ki Short Trick )
सांस्कृतिक गतिविधियों का अर्थ होता है समाज की सांस्कृतिक धाराओं और परंपराओं को बनाए रखने के लिए आयोजित की जाने वाली गतिविधियाँ। ये गतिविधियाँ रंगमंच, संगीत, नृत्य, कला, साहित्य, खान-पान, और खेल के माध्यम से सामाजिक और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाती हैं। सांस्कृतिक गतिविधियों कवियों की शार्ट ट्रिक ◆ सुभद्रा एवं राम ने बालकृष्ण को सांस्कृतिक गतिविधियों में दिन मे ...
Read More »पृथ्वीराजरासो को अप्रमाणित,प्रमाणित एवं अर्द्ध प्रमाणित मानने वाले विद्वान
• पृथ्वीराजरासो को अप्रमाणित मानने वाले विद्वान:- ◆ Short Trick :- मुरारि श्यामदेव और रामकुमार शुक्ल ने अमृत मोती बूलर और ओझा को रासो की अप्रमाणिकता के लिए दिया। 1. मुरारिदीन (मुरारि) 2. कविराज श्यामलदास(श्याम) 3. मुंशीदेव(देव) 4. डॉ.रामकुमार वर्मा(रामकुमार) 5. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल(शुक्ल) 6. अमृतशील(अमृत) 7. मोती लाल मेनारिया(मोती) 8. डॉ.बूलर (बूलर) 9. डॉ.गौरीशंकर हीराचन्द ओझा(ओझा)। • पृथ्वीराजरासो को ...
Read More »आदिकाल की प्रश्नोत्तरी(वन लाइनर)
• आदिकालीन साहित्य मे गद्य का प्राचीनम् ग्रन्थ उद्योतन सूरि कृति कुवलयनमाल कहा(कथा) है। • अंतस्साधनात्मक अनुभूतियो का संकेत करने वाली संधा या संध्या भाषा कहलाती है। • अद्वयव्रज तथा मुनि दन्त ने सिद्धो की भाषा को संधा या संध्या भाषा कहा था। • राजस्थानी बोलियो से मिश्रित ब्रजभाषा के रूप को पिंगल कहते है। • डॉ. मोती लाल मेनारिया ...
Read More »वर्ण रत्नाकर(Varna Ratnakar)का परिचय
• रचनाकार – ज्योतिरीश्वर ठाकुर(13वी शताब्दी) • रचनाकाल – 14 वीं शताब्दी का पूर्वाद्धर् ( सुनीति कुमार के अनुसार) • आठ कल्लोलो (अध्यायों में) • मैथिली का विश्वकोश • मैथिली गद्य की सर्वप्रथम रचना • इसमे लेखक ने हिन्दू दरबार और भारतीय जीवन का यथार्थ चित्रण किया गया है। • इसमें कुल 8 कल्लोल है:- नगर वर्णन,नायक का वर्णन,आस्थान वर्णन,ऋतु ...
Read More »उक्तिव्यक्तिप्रकरण(Uktivyaktiprakaraṇa) का परिचय
• रचनाकार – महाराज गोविन्दचन्द्र (शासनकाल 1154ई.) के सभा पं.दामोदर शर्मा • 12वी शताब्दी • अपूर्ण ग्रंन्थ • भाषा:- अपभ्रंश भाषा • भाषा सिखाने के हेतु(दामोदर शर्मा ने राजकुमारों को शिक्षा देने के लिए इस ग्रंथ की रचना की।) • राजकुमारों को स्थानीय भाषा का ज्ञान कराने के लिए इसे लिखा गया। • उक्ति शब्द की व्याख्या करते हुए मुनि ...
Read More »आधुनिक काल का नामकरण(aadhunik kal ka namakaran)
आधुनिक काल के नामकरण में कुछ संदर्भात्मक तिथियाँ हो सकती हैं, लेकिन आमतौर पर, इसे किसी ऐतिहासिक घटना या विचारधारा के साथ जोड़ा जाता है जो एक समान या स्थायी चरित्रिक बदलाव का प्रतीक होता है। हिंदी साहित्य में, आधुनिक काल का नामकरण अक्सर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उत्तरार्ध में होता है, जिसकी सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, और सांस्कृतिक दृष्टि से ...
Read More »रासो शब्द की उत्पत्ति( raaso shabd ki utpatti)
“रासो” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत साहित्य से जुड़ी है। यह शब्द “रस” (महसूसी अनुभव या भावना) से निकला है, जो साहित्यिक काव्य और नाट्य शास्त्र में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है। “रासो” का उपयोग भारतीय साहित्य और नृत्य के संदर्भ में किया जाता है, विशेष रूप से कृष्ण लीला के सांस्कृतिक और धार्मिक कथाओं के लिए। “रास” के रूप और आयाम ...
Read More »साहित्य अकादमी(sahitya akadami) पुरस्कारों की शार्ट ट्रिक
[ ] साहित्य अकादमी में सम्बन्ध में जानकारी :- • भारत में साहित्य की राष्ट्रीय संस्था की स्थापना का प्रस्ताव विचाराधीन था। • भारत सरकार ने रॉयल एशियाटिक सोसायटी ऑफ़ बंगाल का साहित्य की राष्ट्रीय संस्था की स्थापना का प्रस्ताव 1944 में। • साहित्य अकादमी नामक राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था की स्थापना का निर्णय लिया :- 15 दिसंबर 1952 के प्रस्ताव ...
Read More »रीतिकाल का नामकरण(ritikal ka namakaran)
“रीतिकाल” का नामकरण साहित्य की विभिन्न कालों और उनके लेखकों के अनुसार किया जा सकता है। यह काल संस्कृत और हिंदी साहित्य में साहित्यिक उत्थान, विविधता, और अद्वितीयता की दिशा में उच्चारित होता है। क्रम संख्या नामकरण Short trick कवि 1. अलंकृत काल अलमी मिश्रबन्धु 2. कलाकाल कला रमाशंकर की डॉ. रमाशंकर शुक्ल‘रसाल’ 3. श्रृंगार काल श्रृंगार विश्व के हजार ...
Read More »आदिकाल का नामकरण(aadikal ka namakaran)
“आदिकाल” एक साहित्यिक और ऐतिहासिक अवधारणा है, जिसे भारतीय साहित्य के प्रारंभिक युग के लिए प्रयोग किया जाता है। क्रम संख्या आदिकाल का नामकरण शॉर्टट्रिक कवि 1. चारणकाल चारण जा जार्ज ग्रियर्सन 2. आरम्भिक काल आरम्भ मिश्र मिश्रबन्धु 3. वीरगाथा काल वीर राम आचार्य रामचन्द्र शुक्ल 4. सन्धि चारण काल सच्चा राम डॉ. रामकुमार वर्मा 5. आदिकाल आदि हजार आचार्य ...
Read More »हिंदी साहित्य के प्रमुख गुरु और शिष्य(hindi sahity ke pramukh guru aur shishy)
हिंदी साहित्य में गुरु और शिष्य के संबंध बहुत महत्वपूर्ण रहे हैं, जिन्होंने साहित्य के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। यहां कुछ प्रमुख गुरु-शिष्य संबंधों का उल्लेख किया जा रहा है: क्र.स शिष्य गुरु 1. गोरखनाथ मत्स्येन्द्रनाथ 2. डोम्बिपा विरूपा 3. कुक्कुरिपा चर्पटीया 4. कण्हपा जालंधरपा 5. चर्पटनाथ गोरखनाथ 6. रामानुज यमुनाचार्य 7. ...
Read More »संदेश रासक(sandesh rasak) का परिचय
• रचयिता :- अब्दुल रहमान/अद्दहमाण • अब्दुल रहमान का परिचय :- ◆ मीरसेन आरद्द का पुत्र ◆ स्थान :- मिच्छदेस (म्लेच्छ)[पश्चिमी पाकिस्तान] ◆ मुल्तान निवासी( नाथूराम प्रेमी के अनुसार) ◆ जाति :- जुलाहा ◆ समय :- 11वीं शताब्दी का कवि (राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार) ◆ 12वीं सदी के प्रथम मुस्लिम लेखक जो हिन्दी लिखता है । ◆ भारतीय भाषा मे ...
Read More »अमीर खुसरो(ameer khusaro) का जीवन परिचय
• जन्म 1255ई. मृत्यु – 1324ई. • जन्म स्थान – एट जिला पटयाली गाँव(उत्तरप्रदेश) • अमीर खुसरो के पूर्वज तुर्की थे और बलखट देश से भारत आए थे। • 13वीं शताब्दी में जब दिल्ली पर गुलाम वंश का शासन था तब अमीर खुसरो के पिता बलख हजारा (बैक्ट्रिया) से भागकर भारत आ गए तथा एटा जिला के पटियाली नामक ग्राम ...
Read More »रचनाओं संबंध में आलोचकों के विचार
क्रम संख्या रचना कहा जाता है 1. कामायानी (1935,जयशंकर प्रसाद) मानवता का रसात्मक इतिहास (आचार्य नंददुलारे वाजपेयी) मानव चेतना के विकास का महाकाव्य (डॉ. नगेंद्र) छायावाद का उपनिषद् (शांतिप्रिय द्विवेदी) मानवता का रसात्मक महाकाव्य (आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने कहा) नए युग का प्रतिनिधि काव्य (नंददुलारे वाजपेयी) आधुनिक सभ्यता का प्रतिनिधि काव्य (नामवर सिंह ने कहा) रहस्यवाद का पहला महाकाव्य ...
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