💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई दिलचस्पी न लें, ...
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बालगोबिन भगत,माटी की मूरते से(Balgobin bhagat,Maatee kee mooraten rekhachitra se)
💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई दिलचस्पी न लें, उन्हें देखते ही मुँह मोड़ ...
Read More »देव, माटी की मूरते रेखाचित्र से(Dev,Maatee kee mooraten rekhachitra se)
💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई दिलचस्पी न लें, उन्हें देखते ही मुँह मोड़ ...
Read More »रूपा की आजी, माटी की मूरते रेखाचित्र से(roop ki aajee,Maatee kee mooraten rekhachitra se)
💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई दिलचस्पी न लें, उन्हें देखते ही मुँह मोड़ ...
Read More »मंगर, माटी की मूरते रेखाचित्र से(mangar,Maatee kee mooraten rekhachitra se)
💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई दिलचस्पी न लें, उन्हें देखते ही मुँह मोड़ ...
Read More »सरजू भैया, माटी की मूरते रेखाचित्र से(Sarju Bhaiya,Maatee kee mooraten rekhachitra se))
💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई दिलचस्पी न लें, उन्हें देखते ही मुँह मोड़ ...
Read More »बलदेव सिंह, माटी की मूरते रेखाचित्र से(Baldev Singh,maatee kee mooraten rekhachitra se)
💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई ...
Read More »रजिया , माटी की मूरते रेखाचित्र से(rajiya,maatee kee mooraten rekhachitra se)
💐माटी की मूरतें(रामवृक्ष बेनीपुरी) 💐 ◆ श्रीरामवृक्ष बेनीपुरी के विचार :- ● किसी बड़ या पीपल के पेड़ के नीचे, चबूतरे पर कुछ मूरतें रखी हैं- माटी की मूरतें! ● माटी की मूरतें न इनमें कोई खूबसूरती है, न रंगीनी। ● बौद्ध या ग्रीक रोमन मूर्तियों के हम शैदाई यदि उनमें कोई ...
Read More »संस्कृति और सौन्दर्य निबंध(sanskriti aur saundarya nibandh)
💐 संस्कृति और सौंदर्य (डॉ.नामवर सिंह)💐 ◆ प्रकाशन :- 1982ई. ,दुसरा परंपरा की खोज संग्रह से ◆ भारतीय संस्कृति का एक अध्याय :- अशोक के फूल (निबंध, हजारीप्रसाद द्विवेदी कृति) ◆ भारतीय संस्कृति के अध्याय का अनंगलेख पढ़नेवाले हिंदी में पहले व्यक्ति हैं :- हजारीप्रसाद द्विवेदी। ◆ पहली बार द्विवेदीजी को यह अनुभव हुआ कि ‘एक-एक फूल, एक-एक पशु, एक-एक ...
Read More »उठ जाग मुसाफिर निबंध(uth jaag musaaphir nibandh)
💐 उठ जाग मुसाफिर निबंध (विवेकीराय)💐 ◆ प्रकाशन :- 2012 ई. उठ जाग मुसाफिर निबंध संग्रह से। ◆ पिछली बार गया तो एक सवाल खड़ा मिला, ‘आपने इतना बड़ा पुस्तकालय गाँव में खड़ा तो कर दिया पर कोई पुस्तक पढ़नेवाला नहीं रहा तो उसका क्या होगा ?’ ◆ प्रश्न सुनकर मास्टर साहब अर्थात् जगदीश बाबू का चिरपरिचित मुक्तहास बिखर गया ...
Read More »उत्तरी फाल्गुनी के आस – पास निबंध (uttara phalguni ke aas paas nibandh)
💐उत्तराफाल्गुनी के आसपास(कुबेरनाथ राय) 💐 ◆ ललित निबंध ◆ वर्षा ऋतु की अंतिम नक्षत्र है :- उत्तराफाल्गुनी। ◆ हमारे जीवन में गदह-पचीसी सावन- मनभावन है, बड़ी मौज रहती है। * गदह-पचीसी का अर्थ :- गधा-पचीसी * गधा-पचीसी का अर्थ :-अज्ञानता की स्थिति, बेसिर पैर की बातें करना, अर्थहीन बातें करना। ◆ 27 वे साल में आते ही :- घनघोर भाद्रपद ...
Read More »मजदूरी और प्रेम निबंध(majduri aur prem nibandh)
💐 मजदूरी और प्रेम (सरदार पूर्ण सिंह) 💐 1. हल चलाने वाले का जीवन 2. गड़रिये का जीवन 3. मजदूर की मजदूरी 4. प्रेम-मजदूरी 5. मजदूरी और कला 6. मजदूरी और फकीरी 7. समाज का पालन करने वाली दूध की धारा 8. पश्चिमी सभ्यता का एक नया आदर्श 💐💐 1. हल चलाने वाले का जीवन 💐 ...
Read More »मेरे राम का मुकुट भीग रहा है निबंध(mere ram ka mukut bheeg raha hai niband)
💐 मेरे राम का मुकुट भीग रहा है 💐 ◆ ललित निबंधकार :- विद्यानिवास मिश्र ◆ प्रकाशन :- 1974 ई. ◆ ललित निबंध ◆ आकाश के नीचे भी खुलकर सांस लेने की जगह की कमी, जिस काम में लगकर मुक्ति पाना चाहता हूं। ◆ दिन ऐसे बीतते हैं, जैसे भूतों के सपनों की एक रील पर दूसरी रील चढ़ा ...
Read More »शिवमूर्ति निबंध(Shivmurti nibandh) प्रतापनारायण मिश्र
💐‘शिव मूर्ति’निबंध 💐 【प्रतापनारायण मिश्र 】 ◆ ग्रामदेव :- भगवान भूतनाथ ( अकथ्य ,अप्रतर्क्य एवं अचिन्त्य) ◆ भगवान भूतनाथ की सभी बातें सत्य हैं, अतः उनके विषय में जो कुछ कहा जाये सब सत्य है मनुष्य की भांति वे नाड़ी आदि बंधन से बद्ध नहीं हैं। ◆ भगवान भूतनाथ निराकार और प्रेम दृष्टि से हृदय मन्दिर में उनका ...
Read More »भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है निबंध, भारतेंदु हरिश्चंद्र(bhaaratavarshonnati kaise ho sakata)
💐भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है 💐 【भारतेंदु हरिश्चंद्र】 ◆ प्रकाशन :- 3 दिसंबर 1884ई. हरिश्चंद्र चन्द्रिका पत्रिका में ◆ छोटे से नगर बलिया में लेखक इतने मनुष्यों को एक बड़े उत्साह से एक स्थान पर देखते हैं। ◆ अभागे आलसी देश :- भारत देश को कहां है ◆ बलिया में जो कुछ लेखक ने देखा वह बहुत ही ...
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