“ढोला मारु रा दूहा” एक प्रसिद्ध राजस्थानी लोकगीत है। यह गीत राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को दर्शाता है और इसे राजस्थान की धरोहर माना जाता है। इस गीत में “ढोला” का अर्थ होता है “ढोलक” जो एक परंपरागत राजस्थानी ढोलक है जो लोक गीतों के साथ बजाया जाता है। “मारु रा दूहा” में “मारु” राजस्थान के मारवाड़ी क्षेत्र का ...
Read More »Author Archives: Puran Mal Kumhar
नाथ साहित्य या नाथ संप्रदाय(nath sahity ya nath sampraday)
• नाथ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में मिलता है। • अर्थवेद तथा तैतिरीय ब्राह्मण में नाथ का अर्थ शरणदाता है। • नाथ शब्द का अर्थ(आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के द्वारा ) ‘ना’का अर्थ -अनादि रूप ‘थ’का अर्थ– स्थापित होना • नाथ पंथ के चरमोत्कर्ष का समय – 12वीं शताब्दी से 14वीं शताब्दी के अंत तक ( ...
Read More »जैन साहित्य(jain sahity)
• कर्मकाण्डो से परे ,जाति वर्ण भेद से परे सबको मुक्ति का अधिकार प्राप्त करने का सन्देश जैन धर्म देता है। उत्तर भारत मे जैन धर्म के अनुयायी सर्वत्र ही है किन्तु 8वीं से 13वीं शती तक गुजरात मे जैन धर्म का व्यापक प्रभाव था। • जैन सबसे ज्यादा :– गुजरात और राजस्थान में • इनकी रचना की भाषा :- ...
Read More »भविस्सयत्त कहा( कथा) का परिचय(bhavissayatt kaha( katha) ka parichay)
• भविस्सयत कथा अपभ्रंश के कथाओं में प्रसिद्ध ग्रंथ है । • रचयिता – धनपाल • धनपाल का परिचय :- ◆ धक्कड नामक वैश्य वंश में जन्म । ◆ पिता का नाम – माएसर (मातेश्वर) ◆ माता का नाम – धनश्री ◆ धनपाल को सरस्वती का वर प्राप्त हुआ। ◆ यह जैन धर्म के दिगंबर संप्रदाय के अनुयायी थे। • ...
Read More »स्वयंभू का जीवन परिचय(svayambhoo ka jeevan parichay)
• अपभ्रंश का वाल्मीकि • समय :- 8वीं शताब्दी • उत्तर के रहने वाले थे बाद में संरक्षण के साथ राष्ट्रकूट राज्यों में चले गए । • पिता का नाम :- मारुति देव • स्वयंभू के दो पत्नियां थी। • स्वयंभू के आश्रयदाता :- धनंजय और धवलाइया • प्रमुख ग्रंथ :- पउमचरिउ • जैन कवियों में बहुत प्रसिद्ध कवि • ...
Read More »प्रबंध चिंतामणि(prabandh chintamani) का परिचय
प्रबंध चिंतामणि • 1304ई. में संस्कृत भाषा में जैन आचार्य मेरुतुंग द्वारा रचित है।(डॉ . बच्चन सिंह के अनुसार) मेरुतुंग का परिचय • नागेंद्र गच्छ के आचार्य • गुरु का नाम – चंद्रप्रभ सुरी • प्रधान शिष्य – गुणचंद्र • अन्य प्रमुख ग्रंथ – महापुरुष चरित (इस ग्रंथ में ऋषभदेव,शांतिनाथ,नेमिनाथ,पार्श्वनाथ और महावीर इस प्रकार पांच तीर्थंकरों का संक्षिप्त चरित ...
Read More »भरतेश्वर बाहुबली रास का परिचय(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ)
भरतेश्वर बाहुबली रास(जैन साहित्य की रास परपंरा का प्रथम ग्रंथ) • रचयिता – शालिभद्रसुरी (भीमदेव द्वितीय के समय पाटण में हुए थे।) • रचना समय – 1185ई. में • रचना तिथि – संवत् 1231(मुनिजिन विजय के अनुसार) • 205 छन्दों में रचित। • खंडकाव्य • वीर रस प्रधान और अंत में शांत रस • 203 कड़ियां में रचित। • शालिभद्रसुरी ...
Read More »श्रावकाचार का परिचय {shravakachar ka parichay}
श्रावकाचार:- • दिगम्बर जैन आचार्य देवसेन द्वारा कृत • समय 933ई. या सवंत् 990 • इसमें 250 दोहों में श्रावक धर्म का वर्णन। • गृहस्थ धर्म श्रावक धर्म का वर्णन केन्द्र है। • इसमें साहित्यिक तत्वों का अभाव है। • भाषा – अपभ्रंश • पंक्ति – जो जिण सासण भाषियउ सो मइ कहियउ सारु। जो पालइ सइ भाउ करि सो ...
Read More »हिन्दी साहित्य की पद्धतियां(hindi sahity ki paddhatiyan)
हिन्दी साहित्य की पद्धतियां :- 1. वर्णानुक्रमी पद्धति:- यह वर्णो पर आधारित है।गार्सा द तासी एवं शिवसिंह सेंगर इसी पद्धति पर आधारित है। इसमें कवियों का वर्णन नाम के वर्णानुसार किया जाता है।अतः इसमें कवियों के जीवन परिचय के बारे में जानकारी तो मिलती है किन्तु साहित्य प्रवृत्तियों की उपेक्षा हो जाती है। (क) गार्सा द तासी:- ◆ ग्रन्थ – ...
Read More »आलवार भक्त(aalavar bhakt)
🌺आलवार भक्त(aalavar bhakt)🌺 🌺आलवार भक्तों की संख्याः- 12 🌺आलवार भक्तों की शॉर्टट्रिक :– सभूमधुरकविकुलमुनिविष्णु से मिलकर भक्ति करने का शगोदा को भ्रान्त होता है परन्तु भक्ताघ्रिरेण को पता नही रहता है। (1) सरोयोगी (स) (2) भूतयोगी (भू) (3)मधुर कवि (मधुर) (4) कुल शेखर (कविकुल) :- रामोपासक (5) मुनिवाहन(मुनि) (6) विष्णुचित (विष्णु):- रामोपासक (7) भक्तिसार(भक्ति) (8) शठकोप या नक्मालवार(श) :-रामोपासक (9) ...
Read More »UGC NET हिन्दी कहानियाँ की जानकारी (unit – 7)
क्र.स. कहानी कहानीकार प्रकाशन वर्ष प्रकाशन पत्रिका एवं कहानी संग्रह 1. चन्द्रदेव से मेरी बाते बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष) 1904 सरस्वती पत्रिका में प्रकाशन 2. दुलाई वाली बंग महिला (राजेन्द्र बाला घोष 1907 सरस्वती पत्रिका में प्रका. 3. एक टोकरी भर मिट्टी माधव राव सप्रे 1901 छतीसगढ़ मित्र पत्रिका में प्रका. 4. राही सुभद्रा कुमारी चौहान 1947 सीधे-साधे चित्र ...
Read More »विद्यापति(vidyapati) का जीवन परिचय
• जन्म :- 1380 ई. • जन्म स्थान :- बिसपी गांव ,मधुबनी जिला,बिहार • मृत्यु :- 1460ई. जनकपुर (नेपाल) • विद्यापति का पूरा नाम:- विद्यापति ठाकुर • पिता का नाम :- गणपति ठाकुर (गंगा भक्ति तरंगिणी के रचनाकार ) • माता का नाम :- हंसिनी देवी • विद्यापति के दो विवाह हुए थे :- पहली पत्नी से :- दो पुत्र ...
Read More »हेमचंद्र(hemachandr) का जीवन परिचय
• हेमचंद्र के का जन्म काल :- 1088- 1097( डॉ. बच्चन सिंह के अनुसार ) • गुजरात के एक प्रख्यात आचार्य। • चालुक्य वंश के प्रसिद्ध गुर्जर नरेश सिद्धराज जयसिंह के दरबार में बड़ा सम्मान था। • हेमचंद्र का जन्म:- गुजरात के अहमदाबाद से 7 मील दक्षिण पश्चिम में स्थित धुन्धुक्कपुर नगर में कार्तिक पूर्णिमा को रात्रि में विक्रम संवत ...
Read More »पुष्पदन्त(pushpadant) का जीवन परिचय
🌺 पुष्पदन्त(pushpadant) का जीवन परिचय 🌺 • समय :- 10 वीं शताब्दी (बच्चन के अनुसार) • बरार के आसपास रहने वाले थे बाद में राष्ट्रकूटों की राजधानी मान्यखेट(मलखेड) चले गये।मान्यखेट में 972ई. तक रहे/ मान्यखेट में 14 वर्ष तक रहे। • दिल्ली के निकटवर्ती यौधेय के निवासी।(राहुल सांकृत्यायन के अनुसार) • पिता का नाम:- केशव भट्ट • माता का नाम:- ...
Read More »संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हिंदी के कवि(sangeet natak akadami puraskar se sammanit hindi ke kavi)
संगीत नाटक अकादमी परिचय :- संगीत, नृत्य और नाटक के लिए भारत की राष्ट्रीय अकादमी भारत द्वारा स्थापित कला की पहली राष्ट्रीय अकादमी है। अकादमी का उद्घाटन :- 28 जनवरी 1953 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के द्वारा। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय की स्थापना :- 1959 में संगीत नाटक अकादमी एक स्वायत्त निकाय है(भारत सरकार का) उद्देश्य और उद्देश्य ...
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