Author Archives: Puran Mal Kumhar

सरस्वती सम्मान प्राप्त हिन्दी के कवि(sarasvati samman prapt hindi ke kavi)

सरस्वती सम्मान

सरस्वती सम्मान:- ·       के.के. बिरला फाउंडेशन के द्वारा दिया जाता है। ·       स्थापना :- 1991 में ·       यह पुरस्कार प्रतिवर्ष भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं के भारतीय लेखों के पिछले 10 सालों के प्रकाशित रचनाओं के लिए दिया जाता है । ·       वर्तमान में पुरस्कार राशि:-15लाख₹ ·       के.के. बिरला फाउंडेशन के द्वारा दिया जाने वाला सर्वप्रथम सरस्वती ...

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मूर्ति देवी पुरस्कार पाने वाले हिंदी के कवि(moorti devI puraskar pane vale hindi ke kavi)

मूर्ति देवी पुरस्कार

                                                                  🔷मूर्ति देवी पुरस्कार🔷 भारतीय ज्ञानपीठ समिति द्वारा 1982 में मूर्ति देवी पुरस्कार देने का निर्णय किया। भारतीय ज्ञानपीठ के संस्थापक साहू शांति प्रसाद जैन की मां मूर्ति ...

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भारत भारती सम्मान सम्पूर्ण लिस्ट(bharat bharati samman sampoorn list)

भारत भारती सम्मान सम्पूर्ण लिस्ट

                                                           🔷भारत भारती सम्मान🔷 ·       उत्तर प्रदेश की हिंदी संस्था का सबसे बड़ा साहित्यिक सम्मान है। ·       यह उत्तर प्रदेश की हिंदी संस्थान, लखनऊ के माध्यम से हिंदी साहित्य के क्षेत्र में ...

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गोरखनाथ का जीवन परिचय(gorakhanath ka jeevan parichay)

गोरखनाथ

                                                                       🌺गोरखनाथ का जीवन परिचय 🌺 🌺समय – 845ई. (राहुल सांकृत्यायन के अनुसार) 🌺नौवीं शती( आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार) 🌺 13वीं शती (आचार्य रामचंद्र शुक्ल ...

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सरहपा का जीवन परिचय(sarahpa ka jeevan parichay)

सरहपा

                              🌺सरहपा का जीवन परिचय(sarahpa ka jeevan parichay)🌺 🌺सरहपा का समय :- 769 ई. या आठवीं शताब्दी में (राहुल सांस्कृत्यायन के अनुसार) 🌺 सरहपा की जाति ब्राह्मण थी। 🌺 सरहपा का जन्म :- पूर्व भारत के राज्ञी नामक नगरी में (सुम्पम्खन के अनुसार) 🌺 उड़ीसा( तिब्बती ...

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दलित साहित्य का विस्तार से वर्णन[dalit sahity ka vistar se varnan]

[ ] दलित शब्द का अर्थ :- • दलित शब्द की उत्पत्ति संस्कृत धातु रूप ‘दल’से हुई। जिसका अर्थ – तोड़ना, कुचलना । • दलित शब्द का पर्यायवाची :- दबा हुआ या जिसको दबाया गया हो । • मानक हिंदी कोश के अनुसार दलित शब्द का अर्थ:- जो दबाया गया हो। • हिंदी विश्वकोश के अनुसार :- दलित का अर्थ ...

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गांधीवादी दर्शन या विचारधारा(Gandhivadi darshan ya vicharadhara)

गांधीवादी दर्शन

🌺 गांधीवादी दर्शन या विचारधारा🌺  🌺 गांधीवादी दर्शन महात्मा गांधी द्वारा विकसित की गई ।    🌺व्यावहारिक आदर्शवाद पर जोर देने वाली।   🌺 गांधीवादी विचारधारा का प्रमुख उद्देश्य :- सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों के अनुसार व्यक्ति और समाज को बदलना।   🌺गांधीवादी विचारधारा के आधारभूत सिद्धांत सत्य और अहिंसा   🌺गांधीवादी विचारधारा के चार आधार:- सत्य,अहिंसा सर्वोदय और ...

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आदिवासी साहित्य पर लिखे गए उपन्यास(aadivasi sahity par likhe gae upanyas)

आदिवासी साहित्य

                                        🌺आदिवासी साहित्य(aadivasi saahity)🌺 🌺 आदिवासी शब्द का तात्पर्य:- वनवासी,जंगली। 🌺आदिवासी लोगों को भूमिपुत्र या वन पुत्र कहा जाता है। 🌺 भारत में आदिवासियों की संख्या अफ्रीका के बाद सबसे अधिक है। 🌺 आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में रखा जाता ...

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साठोत्तरी कविता की विशेषताएं और धूमिल saathottari kavita ki visheshataen aur dhoomil

                                          🌺 साठोत्तरी कविताओं की प्रवृत्तियां/विशेषताएं 🌺 🌺 साठोत्तरी कविता का साधारण अर्थ :- सन् 1960 के बाद की कविता। 🌺 साठोत्तरी कविता का तात्पर्य :- केवल के बाद की कविता से नहीं है बल्कि यह एक विशेष तेवर वाली ...

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नई कविताओं की प्रवृत्तियां( naee kavitayo ki pravatiya)

नई कविताओं की प्रवृत्तियां

🌺नई कविताओं की प्रवृत्तियां( naee kavitayo ki pravatiya)🌺 1. मानव मूल्य की विघटन की पुकार । 2. नव मानव की कल्पना। 3. आस्था – अनास्था का मिश्रण । 4. मानव लघुता और गरिमा का उल्लेख। 5. कवि का खंडित व्यक्तित्व। 6. काव्य भाषा- बातचीत की भाषा । 7. लघु कविता शैली- दो,तीन, चार पंक्तियों में समाप्त होने वाली लघु कविताएं ...

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प्रयोगवादी काव्य की प्रवृत्तियां( prayogavadi kavy ki pravatiya)

  🌺प्रयोगवादी काव्य की प्रवृत्तियां🌺 🌺प्रयोगवाद की जन्मदात्री पत्रिका – तार सप्तक 🌺 प्रयोगवाद को सर्वाधिक प्रभावित करने वाले:- अस्तित्ववाद 1. गहन वैयक्तिकता।   2. अतिशय बौद्धिकता।   3. व्यापक अनास्था की भावना।   4. आस्था तथा भविष्य के प्रति विश्वास।   5. सामाजिक यथार्थवाद।   6. क्षणवाद।   7. श्रृंगार का उन्मुक्त चित्रण।   8. कुंठा और निराशा का ...

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प्रगतिवादी काव्य की प्रवृत्तियां( pragativadi kavy ki pravatiya)

प्रगतिवादी काव्य की प्रवृत्तियां

                                            🌺 प्रगतिवादी काव्य की प्रवृत्तियां 🌺 🌺 जो काव्य मार्क्सवाद दर्शन को सामाजिक चेतना और भाव बोध को अपना लक्ष्य बनाकर चला उसे प्रगतिवाद कहा गया है। 🌺 प्रगतिवादी के अंतर्गत -: यथार्थवाद ,पदार्थवाद एवं समाजवाद शामिल है । ...

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छायावादी काव्य की प्रवृत्तियां( chhayavadi kavy ki pravatiya)

छायावादी काव्य

                  🌺   छायावादी काव्य की प्रवृत्तियां 🌺 1. आत्माभिव्यंजना /आत्माभिव्यक्ति की प्रधानता। 2. मै शैली /उत्तम पुरुष शैली । 3. मानवीय सौंदर्य का बोध । 4. प्रकृति के रम्य रूपों की रचना। 5. प्रकृति संबंधित बिम्बों की बहुलता । 6. स्वच्छंद कल्पना का नवोन्मेष। 7. रहस्य भावना। 8. अज्ञात व असीम ...

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द्विवेदी काल की प्रमुख प्रवृत्तियां (dvivedi kal ki pramukh pravrttiyan)

द्विवेदी युग

द्विवेदी काल (1900-1918) हिंदी साहित्य के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अवधि है। इस काल का नाम आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने हिंदी साहित्य को एक नया दृष्टिकोण और दिशा दी। इस काल की प्रमुख प्रवृत्तियाँ निम्नलिखित हैं:     🌺 द्विवेदी युगीन काल की प्रवृत्तियां🌺 1. आदर्श एवं नैतिकता का प्राधान्य। 2. राष्ट्रीयता अथवा ...

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भारतेंदु युगीन काल की प्रवृत्तियां( Bharatendu Yugin kal ki pravartiya)

भारतेंदु युगीन काल भारतेंदु युगीन काल की प्रवृत्तियांकी प्रवृतियां

भारतेंदु युग (Bharatendu Yug) भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण काल है, जो 1868 से 1893 ईसा पूर्व तक के लगभग अवधि को कवर करता है। इस काल में, भारतीय समाज में विभिन्न प्रकार की परिवर्तनात्मक प्रक्रियाएं हुईं थीं। यहाँ कुछ मुख्य प्रवृत्तियाँ हैं: भारतीय पुराणों का पुनर्जागरण: भारतेंदु युग में, भारतीय साहित्यकारों ने भारतीय पुराणों, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को ...

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