Author Archives: Puran Mal Kumhar

लम्बी कविताएं (Long poems)

क्र.सं लम्बी कविताएं कवि 1.         संशय की लम्बी रात (नाट्य शैली पर रचित) नरेश मेहता 2.         समय देवता (मेरा समर्पित एकांत काव्य संग्रह से ) नरेश मेहता 3.         राम की शक्ति पूजा (अनामि का काव्य संग्रह से) निराला 4.         नेवला (कारागार के सर्न्दभ में) त्रिलोचन 5.         पतंग (दुनिया रोज बनती है काव्य संग्रह से ) ...

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हिन्दी की प्रमुख पत्र – पत्रिकाओं का परिचय(hindi ki pramukh patr – patrikaon ka parichay)

◆ सर्वप्रथम भारत में प्रिंटिग प्रेस लाने का श्रेय पुर्तग़ालियों को दिया जाता है। ◆ भारत में सबसे पहले प्रेस :- गोवा में (जनवरी,1556 -57 ई.) (यह प्रेस पुर्तगाल से अबीसीनिया के लिए भेजा गया था। उन दिनों में स्वेज नहर नहीं बनी थी और अबीसीनिया के लिए भारत होकर जाना पड़ता था। अबीसीनिया के लिए मनोनीत पेट्रिआर्क प्रेस के ...

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हिंदी साहित्य में सरस्वती पत्रिका का योगदान(hindi sahity me sarasvati patrika ka yogadan)

★ सरस्वती पत्रिका कालिदास के इस वाक्य का उद्घोष करती है :- ” सरस्वती श्रुति महत्ती न हीयताम् “ ★ 1900 ई. में चिंतामणि घोष के द्वारा, इलाहाबाद से ★ इंडियन प्रेस(इलाहाबाद) के अध्यक्ष :- चिंतामणि घोष ★ मासिक पत्रिका ★ चिंतामणि घोष ने अगस्त 1899 ई. में नागरी प्रचारिणी सभा(काशी) से अनुरोध किया कि सचित्र हिंदी मासिक पत्रिका सरस्वती ...

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दादू दयाल का जीवन परिचय(dadoo dayal ka jeevan parichay)

💐जन्म 💐 • जन्म:- फागुन सुदी बृहस्पतिवार संवत् 1601 ( सन् 1544ई.) • जन्म :- 1544 ई. ( डॉ. बडथ्याल, आचार्य रामचंद्र शुक्ल, आचार्य परशुराम चतुर्वेदी और नगेंद्र के अनुसार) • जन्म स्थान:- अहमदाबाद (गुजरात) 💐मृत्यु 💐 • मृत्यु :- जेठ सदी आठ शनिवार संवत् 1660 (सन् 1603 ई.) • शरीर छोड़ा :- भराने(जयपुर) स्थान पर   💐जाति 💐 ◆ ...

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आदिकाल का नामकरण( aadikal kal namakaran)

आदिकाल को हिंदी में “आरम्भिक काल” भी कहा जाता है। यह समय की एक अवधि है जो मानव इतिहास के प्रारंभिक दौर को संकेतित करती है। आदिकाल की अवधि में मानव समाज की विकास की शुरुआत होती है, जिसमें लोग चिकित्सा, खेल, कला, और धर्म के क्षेत्र में उत्साही रहते हैं। यह काल कई नामों से जाना जाता है, जैसे ...

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गैंग्रीन / रोज़ कहानी(gaingreen/roz kahani)

• कथाकार :- अज्ञेय • कहानी का संकलन :- विपथगा कहानी संग्रह में • प्रकाशन :- 1990 में, (नेशनल पब्लिशिंग हॉउस, दिल्ली से ) • इस कहानी सर्वप्रथम गैंग्रीन नाम से प्रकाशित हुआ लेकिन बाद में इसका शीर्षक बदलकर रोज़ कर दिया। • कहानी तीन भागों में ★ प्रथम भाग में :- मालती की बाह्य स्थिति   ★ दूसरे भाग में :- मालती के मनः स्थिति का चित्रण ★ ...

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हिंदी के कवियों की जन्म सन् (शॉर्ट ट्रिक)

◆ विद्या रैदास की और  कबीर का धर्म कुंभनदास के गुरु ने दिये। 1. विद्यापति – 1380 ई. 2. रैदास – 1388 ई. ( डॉ. रामकुमार वर्मा के अनुसार) 3. कबीर दास – 1398 ई. 4. धर्मदास – 1418 ई. 5. कुंभनदास – 1468 ई. 6. गुरूनानक – 1469 ई. ◆ सूर परमानंद प्राप्त करने के लिए जासी कृष्णा एवं ...

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मैला आँचल उपन्यास के पात्रों का महत्वपूर्ण कथन(maila aanchal upanyaas ke Patro ka mahatvapoorn kathan)

1. डॉ.प्रशान्त का कथन:- • “दिल नाम की कोई चीज आदमी के शरीर में है,हमें नहीं मालूम। पता नहीं आदमी लंग्स को दल कहता है या हॉट को। जो भी हो हार्ट ,लंग्स,लीवर का प्रेम से कोई संबंध नहीं है।” • “क्या करेगा वह संजीवनी बूटी खोजकर ? उसे नही चाहिए संजीवनी। भूख और बेबसी से छटपटाकर मरने से अच्छा ...

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मैला आँचल उपन्यास के पात्रों का परिचय ( maila aanchal upanyas ke Patron ka parichay )

★ पुरुष पात्र (प्रमुख) :- 1. तहसीलदार विश्वनाथ प्रसाद 2. डॉ. प्रशांत कुमार 3. ठाकुर रामकिरपाल सिंघ 4. महंत सेवादास 5. महंत रामदास 6. कालीचरण 7. बालदेव 8. सुमरितदास 9. चलित्तर कर्मकार 10. जोतखी(ज्योतिषा) 11. खिलावन सिंह यादव 12. बावन दास(बौनदास) ★ स्त्री पात्र (प्रमुख) :- 1. कमली(कमला) 2. लछमी 3. फुलिया 4. रामपियरिया 5. ममता   ★ पुरुष पात्र ...

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मैला आँचल उपन्यास का सारांश और उद्देश्य( maila aanchal upanyas ka saraansh aur uddeshy)

• प्रकाशन:- अगस्त, 1954ई . समता प्रकाशन, पटना से • उपन्यासकार :- फणीश्वरनाथ रेणु • कुल पृष्ठ :- 250 • कुल खण्ड :- 2 • कुल परिछेद : 67 • उपन्यास की कथा भूमि उत्तरी बिहार का पूर्णिया अंचल है और कथाकाल आजादी के कुछ बरस बाद का। • पहले खंड में :- स्वतंत्रतापुर्ण के गांव का चित्रण। • द्वितीय ...

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त्यागपत्र उपन्यास के पात्रोंं का महत्वपूर्ण कथन(tyagpatr upanyas ke patro ka mahatvapoorn kathan)

1. मृणाल के कथन :- • “मैं नहीं बुआ होना चाहती। बुआ। छीः देख, चिड़िया कितनी ऊंची उड़ जाती है। मैं चिड़िया होना चाहती हूं।” • “तुम सब लोगों के लिए मैं पराई हूं, तेरी मां ने मुझे धक्का देकर पराया बना दिया है।” • “कन्या जाति क्या अपने पिता के घर ही होती है? मैं कोई निराली जनमी हूं?” ...

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त्यागपत्र उपन्यास के पात्रोंं का परिचय(tyagpatr upanyas ke patro ka parichay

• त्यागपत्र उपन्यास के पात्र 1. प्रमोद 2. मृणाल(प्रमोद की बुआ) 3. प्रमोद के पिता 4. प्रमोद के माता 5. शीला (मृणाल की सहेली) 6. शीला का भाई ( मृणाल का प्रेमी) 7. प्रमोद के फूफा 8. कोयले वाला बनिया 9. राजनंदनी 1. प्रमोद का परिचय • प्रमोद के पिता प्रतिष्ठा वाले थे। • प्रमोद की माता अत्यंत कुशल ग्रहणी। ...

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त्यागपत्र उपन्यास का सारांश और उद्देश्य(tyagapatr upanyas ka saransh aur uddeshy)

◆ जैनेंद्र का तीसरा उपन्यास ◆ प्रकाशन वर्ष:- 1937 ई. ◆ मुंबई से निकलने वाली हिंदी ग्रंथ रत्नाकर के लिए उसके संपादक प्रेमीजी के अनुरोध पर लिखा गया था । ◆ 1965 में अभिनंदन समारोह में त्यागपत्र का नाट्य रूपांतर का मंचन भी हुआ था। ◆ आत्मकथात्मक शैली में लिखा हुआ बहुत ही मार्मिक और संवेदनशील उपन्यास। ◆ त्यागपत्र उपन्यास ...

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बाणभट्ट की आत्मकथा के पात्रों का महत्वपूर्ण कथन

1. बाणभट्ट के प्रमुख कथन:- • “निपुणिका बहुत अधिक सुंदर नहीं थी। उसका रंग अवश्य शेफालिका के कुसुमनाल के रंग से मिलता था परंतु उसके की सबसे बड़ी चारुता संपत्ति उसकी आंखें और अंगुलियां की थी।अंगुलियां को मैं बहुत महत्वपूर्ण सौदर्योपादान समझता हूं । नटी की प्रणामांजलि और पताक मुद्राओं को सफल बनाने में पतली छरहरी अंगुलियां अद्भुत प्रभाव डालती ...

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बाणभट्ट की आत्मकथा के पात्रों का परिचय(banbhatt ki aatmakatha ke patro ka parichay)

◆ पुरुष पात्र :- 1. बाणभट्ट :- ◆ बाणभट्ट का परिचय ◆ • मगध प्रदेश के प्रख्यात वात्स्यायन वंश      से उत्पन्न हुआ था। • बाणभट्ट की पिता :- चित्रभानु भट्ट एक     उद्भट पंडित  • मूल नाम:- दक्ष भट्ट • चचेरा भाई का नाम :- उड्डपति • पंडित वात्स्यायन वंशी जयंत भट्ट के     पौत्र • अल्पायु में ...

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