Author Archives: Puran Mal Kumhar

जीवनी(jeevanee)परिभाषा,विशेषताऐं और प्रमुख जीवनी

💐जीवनी का अर्थ :- • जीवनी शब्द का अंग्रेजी पर्याय ‘लाइफ’ (जीवन) अथवा ‘बायोग्राफी’ (अपने जीवन) है। हिंदी में इसे जीवन चरित अथवा जीवन चरित्र भी कहा जाता है। • जीवनी का शाब्दिक अर्थ :- जीवन की व्याख्या 💐जीवनी की विशेषताएं :- 1. जीवनी एक गद्य विधा है जो कल्पित न होकर पूर्णतः सत्य कथानक पर आधारित है। 2. इसका ...

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रिपोतार्ज(ripotaarj) परिभाषा, विशेषताऐं और प्रमुख रिपोतार्ज【 shirt trick】

💐रिपोतार्ज का प्रारम्भ :- • 1936 में द्वितीय विश्व के समय • हिंदी में प्रथम रिपोतार्ज लेखक :- शिवदान सिंह चौहान • हिंदी का प्रथम रिपोतार्ज :-लक्ष्मीपुरा (दिसम्बर,1938, रूपाभ पत्रिका,शिवदान सिंह चौहान) • रिपोतार्ज के जनक :- इलिया एहरेनवर्ग (रूसी साहित्यकार) 💐 रिपोर्ताज का अर्थ :- • फ़्राँसीसी भाषा का शब्द है • अंग्रेज़ी शब्द ‘रिपोर्ट’ से इसका गहरा सम्बन्ध ...

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रेखाचित्र और संस्मरण(rekhachitr aur sansmaran) परिभाषा,विशेषताऐं एवं प्रमुख रेखाचित्र और संस्मरण

💐💐रेखाचित्र का अर्थ :- • रेखाचित्र को अंग्रेजी के ‘स्केच’ के पर्यायवाची के रुप में हिंदी में प्रयुक्त किया जाता है। • रेखा चित्र को शब्दचित्र भी कहा जाता है। 💐💐 रेखाचित्र की परिभाषा:- • साहित्य में जिसे रेखाचित्र कहा जाता है वह वास्तविक में रेखाओं का चित्र न होकर शब्दों का चित्र होता है जिसमें न्यूनतम शब्दों के माध्यम ...

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एकांकी(ekaanki) परिभाषा ,विशेषताओं एवं प्रमुख एकांकी 【short trick】

            💐 एकांकी का अर्थ 💐 • एकांकी का शाब्दिक अर्थ :- एक अंक वाला • एकांकी वास्तव में कार्य – व्यापार द्वारा रंगमंच पर अभिनीय जीवन के एक पहलू का घटना, एक परिस्थिति विशेष का चित्रण है। • हिंदी साहित्य में ‘वन एक्ट प्ले’ के अर्थ में एकांकी का प्रयोग शुरू हुआ। • यूरोप ...

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आत्मकथा की परिभाषा और विशेषता एवं प्रमुख आत्मकथा की short trick

                       💐आत्मकथा💐 • आत्मकथा हिंदी गद्य की महत्वपूर्ण विधाएं है। • आत्मकथा से आशय उस रचना से है जिसमें कोई प्रसिद्ध व्यक्ति अपनी कथा को स्वयं रोचक शैली में लिखता है। • स्वयं से लेखक के द्वारा लेखक के जीवन की कथा आत्मकथा का रचनाकार कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति समाज में ...

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भक्तिकाल के कवियों के सम्बन्ध में प्रमुख कथन (bhakti kaal ke kaviyon ke bare me pramukh kathan)

◆ आ. रामचंद्र शुक्ल के कथन :- 💐💐 कबीर बारे में कथन :- • “कबीर ने अपनी झाड़-फटकर के द्वारा हिन्दुओं और मुसलमानों के कट्टरपन को दूर करने का जो प्रयास किया वह अधिकतर चिढ़ाने वाला सिद्ध हुआ,  हृदय को स्पर्श करने वाला नहीं।” • “ज्ञानमार्ग की बातें कबीर ने हिंदू साधु, संन्यासियों से ग्रहण की जिनमें सूफियों के सत्संग ...

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भक्ति आंदोलन के उद्भव एवं विकास से संबंधित मत(bhakti aandolan kee udbhav aur vikaas se sambandhit mat )

★ भक्ति आंदोलन के उद्भव एवं विकास से संबंधित मत :- • भक्ति का सर्वप्रथम उल्लेख श्वेताश्वेतर उपनिषद् (6/33) में मिलता है। • भारतीय धार्मिक साहित्य में भक्ति का उदय वैदिक काल से ही दिखाई पड़ता है। • भक्ति साहित्य के सभी विद्वानों ने भक्ति आंदोलन का प्रारंभ दक्षिण भारत से माना है। श्रीमद्भागवत पुराण में :- ” उत्पन्ना द्रविड ...

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भक्ति शब्द की उत्पत्ति, परिभाषा और भेद (bhakti shabd ki utpatti, paribhaasha aur bhed)

★ भक्ति शब्द की व्युत्पत्ति :- • भक्ति शब्द संस्कृत के ‘भज्’ सेवायाम् धातु में ‘ क्तिन्’ प्रत्यय लगाने पर बनता है। • जिसका अर्थ ‘सेवा करना’ या ‘भजना’ है, अर्थात् श्रद्धा और प्रेमपूर्वक इष्ट देवता के प्रति आसक्ति। • “भक्ति शब्द की व्युत्पत्ति ‘भज्’ से की जा सकती है”।(भज् का अर्थ :- भाग लेना)【 मोनियर विलियम के अनुसार】 • भक्ति शब्द का ...

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अंधेरे में कविता का सारांश(kavita mein kavita ka saraansh)

• रचयिता :- मुक्तिबोध • लंबी कविता • मुक्तिबोध की अंतिम कविता • लिखी गयी :- 1952 से 1962 के बीच, अंतिम संशोधन 1962 में • पहला प्रकाशन :- आशंका के द्वीप अंधेरे में, शीर्षक से कल्पना पत्रिका में, नवंबर 1964 में • काव्य नायक (दो नायक) :- (1.) काव्य नायक :- में (2.) स्वप्न का नायक :- अन्य • ...

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रस का स्वरूप(ras ka svarup)

• रस अखंड है। • रस स्वप्रकाशानंद है। • रस चिन्मय है। • रस सचेतन अथवा प्राणवान् आनंद है। • रस अपने आकर से अभिन्न है। • रस वेद्यान्तर स्पर्शशून्य है • रस (काव्यास्वाद) को ब्रह्मास्वाद न कहकर उसका सहोदर कहा जाता है। • रस लोकोत्तर चमत्कार का प्राण है। • रस अपने आकार से अभिन्न रूप से आस्वादित किया ...

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काव्य हेतु(kavy hetu)

◆ हेतु का शाब्दिक अर्थ :- कारण ◆ काव्य हेतु का अर्थ :- जिनके के कारण काव्य का सृजन होता है। ◆ काव्य हेतु की परिभाषा :- काव्य रचना का सामर्थ्य उत्पन्न कर देने वाले कारण ही काव्य हेतु कहलाते है। ◆ काव्य हेतु के भेद :- 3 1. प्रतिभा 2. व्युत्पत्ति 3. अभ्यास ■ प्रतिभा,व्युत्पत्ति और अभ्यास मानने वाले ...

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भारतीय काव्यशास्त्र आर्चाय का क्रम(जन्म के अनुसार),bharatiy kavyashastree archee ka kram(janm ke anusaar)

◆आचार्य का शताब्दी वर्ष 【सम संख्या में 】   ◆ आचार्य का शताब्दी वर्ष 【 विषम संख्या में 】 ◆ शॉर्ट ट्रिक्सः- • भरतमुनि के भाग का दंड वामन को मिला। भरतमुनि (2वीं), भा – भामह (6वीं), दंड – दण्डी (7 वीं) वामन (8वीं)   • राज्य का आनंद शंका और रौद्र से नहीं अनुभव या उद्भव से होता है। 【9वीं】 ...

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हिन्दी भाषा के संबंध में विद्वानों के कथन(hindi bhasha ke sambandh me vidvano ke kathan)

हिन्दी भाषा

• अंग्रेजी सीखकर जिन्होंने विशिष्टता प्राप्त की है, सर्वसाधारण के साथ उनके मत का मेल नहीं होता। हमारे देश में सबसे बढ़कर जातिभेद वही है, श्रेणियों में परस्पर अस्पृश्यता इसी का नाम है।”                     रवीन्द्रनाथ ठाकुर • “भारतवर्ष में सभी विद्याएं सम्मिलित परिवार के समान पारस्परिक सद्भाव लेकर रहती आई हैं।”    ...

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महाभोज उपन्यास का सारांश ,पात्र परिचय और कथन(mahabhoj upanyas ka saraansh, patr parichay aur kathan)

• प्रकाशन :- 1979 ई. • 9 परिच्छेदों में • कुल पृष्ठ :- 183 • कुल पात्र:- 35 • राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित उपन्यास • 1976 ई.के चुनाव पद्धतियों पर आधारित उपन्यास • महाभोज उपन्यास के बीज मन्नू भंडारी की ‘अलगाव'[त्रिशंकु,1978 ई. कहानी संग्रह में] कहानी में विद्यमान है। • मन्नु भंडारी ने महाभोज उपन्यास का नाटक रूपांतरित(1983ई.) भी किया। ...

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हिन्दी के प्रमुख कवियों के उपनाम(hindi ke pramukh kaviyon ke upanam)

1.       क्रम संख्या       कवि                  उपनाम 2.              स्वयंभू      अपभ्रंश का वाल्मीकि      अपभ्रंश का कालिदास      (डॉ.भयाणी के अनुसार) 3.         पुष्पदंत अपभ्रंश का भवभूति (शिवसिंह सेगंर के अनुसार) अभिमान मेरु (पुष्पदंत ने स्वयं को कहा) 4.         कबीर की भाषा भाषा का ...

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