महादेवी वर्मा जीवन परिचय, कृतित्व एवं काव्यगत विशेषताएँ “हिंदी साहित्य की मीरा और आधुनिक युग की महान नारीवादी लेखिका” (पुस्तकें: नीहार, रश्मि, नीरजा, दीपशिखा, यामा) 1. जीवन वृत्तांत – जन्म और जन्म स्थान जन्म : 26 मार्च, 1907 (होली के दिन) जन्म स्थान : फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश पारिवारिक पृष्ठभूमि : पिता – श्री गोविंद प्रसाद वर्मा (प्राध्यापक), माता – हेमरानी ...
Read More »Author Archives: Puran Mal Kumhar
अलंकार सम्प्रदाय (अलंकारवाद) नोट्स(alankar sampraday (alnkarvad) notes)
अलंकार सम्प्रदाय (अलंकारवाद) ☆ अलंकार सम्प्रदाय के प्रवर्तक आचार्य भामह माने जाते हैं। ☆ उन्होंने छठी शताब्दी में अपने प्रसिद्ध ग्रंथ “काव्यालंकार” की रचना की थी। ☆ आचार्य भामह ने ही सबसे पहले अलंकार को काव्य की आत्मा के रूप में प्रतिष्ठित किया था। 1. अलंकार शब्द का अर्थ ‘अलंकार’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है: अलं + ...
Read More »शब्द शक्ति काव्यशास्त्र(shabd shakti kavyashastra)
शब्द शक्ति (काव्यशास्त्र) परिभाषा: शब्द में अंतर्निहित अर्थ को प्रकट करने वाले व्यापार (कार्य) अथवा शब्द का निश्चयार्थक बोध कराने वाली शक्ति को शब्द शक्ति कहते हैं। ऐतिहासिक संदर्भ: शब्द शक्ति के लिए ‘शक्ति’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आचार्य विश्वनाथ ने किया। शब्द शक्ति के लिए ‘वृत्ति’ या ‘व्यापार’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आचार्य मम्मट ने किया। 1. सार्थक शब्दों ...
Read More »अतीत में दबे पाँव (यात्रा-वृत्तांत / निबंध) : 100 महत्वपूर्ण वन-लाइनर प्रश्नोत्तर
अतीत में दबे पाँव (यात्रा-वृत्तांत / निबंध) : 100 महत्वपूर्ण वन-लाइनर प्रश्नोत्तर ‘अतीत में दबे पाँव’ पाठ के लेखक कौन हैं? ओम थानवी। ‘अतीत में दबे पाँव’ किस विधा की रचना है? यात्रा-वृत्तांत / पुरातात्विक निबंध। ‘मुअनजो-दड़ो’ का शाब्दिक अर्थ क्या है? मुर्दों का टीला। मुअनजो-दड़ो वर्तमान में किस देश और किस प्रांत में स्थित है? पाकिस्तान के सिंध प्रांत ...
Read More »अतीत में दबे पाँव (यात्रा-वृत्तांत / निबंध) का उद्देश्य व मूल संवेदना एवं पाठ-सार
अतीत में दबे पाँव (यात्रा-वृत्तांत / निबंध) लेखक: ओम थानवी विधा: यात्रा-वृत्तांत / पुरातात्विक रिपोर्ताज पुस्तक: वितान भाग-2 (पूरक पाठ्यपुस्तक) मूल विषय: 5000 वर्ष प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के महानगर ‘मुअनजो-दड़ो’ का नगर-नियोजन, जल-संस्कृति, समाज-पोषित सौंदर्यबोध एवं आडंबरहीन जीवन-शैली का सजीव अंकन। 1. लेखक एवं पाठ की पृष्ठभूमि मुअनजो-दड़ो का परिचय: पाकिस्तान के सिंध प्रांत में स्थित ताम्रकाल का सबसे ...
Read More »जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) 100 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर
जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) 100 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर ‘जूझ’ पाठ के लेखक कौन हैं? डॉ. आनंद यादव। ‘जूझ’ किस विधा की रचना है? आत्मकथात्मक उपन्यास / संस्मरण। ‘जूझ’ उपन्यास मूल रूप से किस भाषा में लिखा गया है? मराठी भाषा में। ‘जूझ’ का मूल मराठी शीर्षक क्या है? ‘झोंबी’ (जिसका अर्थ लड़ना या जूझना होता है)। ‘जूझ’ का मराठी ...
Read More »जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) का उद्देश्य व मूल संवेदना और प्रमुख पात्रों
जूझ (आत्मकथात्मक उपन्यास अंश) मूल लेखक: डॉ. आनंद यादव मूल भाषा: मराठी (‘झोंबी’ उपन्यास से) हिंदी अनुवाद: केशव प्रथम वीर विधा: आत्मकथात्मक उपन्यास / संस्मरण प्रमुख पात्र: आनंदा (लेखक/कथानायक), माँ, दादा (पिता – रतनाप्पा), दत्ता जी राव देसाई (गाँव के प्रतिष्ठित मुखिया/जमींदार), रणनवरे मास्टर, मंत्री मास्टर (गणित अध्यापक व कक्षाध्यापक), वसंत पाटील (कक्षा मॉनिटर), न. वा. सौंदलगेकर मास्टर (मराठी अध्यापक ...
Read More »सिल्वर वैडिंग कहानी पर आधारित 50-50 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर
सिल्वर वैडिंग कहानी पर आधारित 50-50 महत्वपूर्ण वन-लाइनर (One-Liner) प्रश्नोत्तर ‘सिल्वर वैडिंग’ कहानी के लेखक कौन हैं? मनोहर श्याम जोशी। कहानी के मुख्य पात्र यशोधर बाबू का पूरा नाम क्या है? वाई. डी. (यशोधर) पंत। यशोधर बाबू किस सरकारी विभाग में और किस पद पर कार्यरत हैं? गृह मंत्रालय (सेक्रेट्रिएट) में सेक्शन ऑफिसर। यशोधर बाबू की शादी किस तिथि को ...
Read More »सिल्वर वैडिंग कहानी का उद्देश्य व मूल संवेदना और प्रमुख पात्रों(silver vading kahani ka uddeshya va mool samvedna aur pramukh patron)
सिल्वर वैडिंग (कहानी) लेखक: मनोहर श्याम जोशी विधा: आधुनिक सामाजिक-मनोवैज्ञानिक कहानी पुस्तक: वितान भाग-2 (पूरक पाठ्यपुस्तक) प्रमुख पात्र: यशोधर बाबू (वाई. डी. पंत), कृष्णानंद पांडे (किशनदा), यशोधर बाबू की पत्नी, बड़ा बेटा (भूषण), दूसरा व तीसरा बेटा, पुत्री, गिरीश (साला), चड्डा (दफ्तरी सहकर्मी)। मूल विषय: पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap), आधुनिकता और परंपरा का द्वंद्व, मानवीय मूल्यों का क्षरण तथा वृद्धजनों ...
Read More »छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(chhota mera khet / bagulon ke pankh kavita ka uddeshya va mool samvedna)
छोटा मेरा खेत / बगुलों के पंख (कविता) कवि: उमाशंकर जोशी मूल भाषा: गुजराती हिंदी रूपांतरण: रघुवीर चौधरी और भोलाभाई पटेल मूल विषय: ‘छोटा मेरा खेत’: कृषि-कर्म के रूपक में काव्य-सृजन प्रक्रिया का चित्रण तथा साहित्य के अक्षय रस का उद्घाटन। ‘बगुलों के पंख’: सांध्यकालीन आकाश में पंक्तिबद्ध उड़ते बगुलों के सम्मोहक व जादुई प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रात्मक अंकन। 1. ...
Read More »कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप पाठ का विस्तृत सार एवं प्रमुख छंद-विश्लेषण
कवितावली (उत्तर कांड से) / लक्ष्मण-मूर्च्छा और राम का विलाप कवि: गोस्वामी तुलसीदास काव्य-धारा: भक्तिकाल की सगुण काव्य-धारा (रामभक्ति शाखा) काव्य-भाषा: ब्रजभाषा (‘कवितावली’) तथा अवधी (‘रामचरितमानस’) मूल रचनाएँ: ‘कवितावली’ (उत्तर कांड) और ‘रामचरितमानस’ (लंका कांड) 1. पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना भाग-1: कवितावली (उत्तर कांड से) युगीन यथार्थ व आर्थिक विषमता का चित्रण: कलिकाल की बेकारी, भूख, गरीबी और ...
Read More »रुबाइयाँ काव्य का मूल उद्देश्य और मूल संवेदना(rubaiyan kavya ka mool uddeshya aur mool samvedna)
रुबाइयाँ (काव्य) शायर: फ़िराक़ गोरखपुरी (मूल नाम: रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’) काव्य-रूप / छंद: रुबाई (उर्दू-फ़ारसी का चार पंक्तियों वाला लोकप्रिय छंद) मूल विषय: वात्सल्य रस, माँ-बच्चे का आत्मीय संबंध, भारतीय लोक-जीवन तथा दीवाली व रक्षाबंधन जैसे पावन पर्वों की सांस्कृतिक छटा। शायरी की विशेषताएँ: उर्दू शायरी को पारंपरिक रूमानी व दरबारी घेरे से निकालकर आम आदमी के लोक-जीवन, संस्कृति और ...
Read More »बादल राग कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(badal raag kavita ka uddeshya va mool samvedna)
बादल राग (कविता) कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ मूल काव्य-संग्रह:‘अनामिका’ (यह कविता ‘अनामिका’ में छह खंडों में प्रकाशित है, यहाँ इसका छठा खंड संकलित है) विधा: प्रगतिशील / छायावादोत्तर मुक्त छंद कविता मूल विषय: क्रांति का आह्वान, पूँजीपतियों के आतंक-भवन का ध्वंस, शोषित किसान-मज़दूर (लघुमानव) की मुक्ति एवं नवनिर्माण। 1.पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना क्रांति का आह्वान: बादल को क्रांतिदूत ...
Read More »उषा कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(usha kavita ka uddeshya va mool samvedna)
उषा (कविता) कवि: शमशेर बहादुर सिंह विधा: प्रयोगवादी नई कविता / बिंबप्रधान कविता काव्य-प्रवृत्ति: ‘कवियों के कवि’, ‘बिंबधर्मी कवि’, ‘उर्दू और हिंदी का दोआब’ मूल विषय: सूर्योदय से ठीक पूर्व के पल-पल बदलते प्राकृतिक सौंदर्य का ग्रामीण परिवेश से जुड़ा गतिशील शब्द-चित्र। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना प्रकृति की गतिशीलता का अंकन: सूर्योदय से ठीक पहले भोर के ...
Read More »कैमरे में बंद अपाहिज कविता का उद्देश्य व मूल संवेदना(camere mein band apahij kavita ka uddeshya va mool samvedna)
कैमरे में बंद अपाहिज (कविता) कवि: रघुवीर सहाय काव्य-संग्रह: ‘लोग भूल गये हैं’ विधा: समकालीन व्यंग्य प्रधान नई कविता / नाटकीय एकलाप मूल विषय: दृश्य-संचार माध्यमों (टेलीविजन) का कारोबारी स्वार्थ, मानवीय संवेदनहीनता, पीड़ा का बाजारीकरण तथा शारीरिक चुनौती झेलते व्यक्तियों का शोषण। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना दृश्य-संचार माध्यमों की संवेदनहीनता का पर्दाफ़ाश: यह उजागर करना कि मीडिया ...
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