कविता के बहाने / बात सीधी थी पर कवि: कुँवर नारायण काव्य-धारा: ‘नयी कविता’ के प्रमुख हस्ताक्षर / नागर संवेदना के कवि मूल काव्य-संग्रह: ‘कविता के बहाने’ — ‘इन दिनों’ संग्रह से ‘बात सीधी थी पर’ — ‘कोई दूसरा नहीं’ संग्रह से 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना कविता 1: ‘कविता के बहाने’ यांत्रिकता के दौर में कविता का ...
Read More »Author Archives: Puran Mal Kumhar
पतंग (कविता) का उद्देश्य व मूल संवेदना(patang (kavita) ka uddeshya va mool samvedna)
पतंग (कविता) कवि: आलोक धन्वा मूल काव्य-संग्रह: ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (1998, कवि का पहला और एकमात्र संग्रह) काव्य-रूप: यह एक लंबी कविता का तीसरा भाग है। मूल विषय: बालसुलभ इच्छाएँ, उमंगें, प्रकृति परिवर्तन तथा बच्चों का अदम्य साहस व निडरता। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना बाल-सुलभ उमंगों का चित्रण: आसमान में उड़ती पतंग के माध्यम से बच्चों ...
Read More »आत्मपरिचय / दिन जल्दी-जल्दी ढलता है पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना
आत्मपरिचय / दिन जल्दी-जल्दी ढलता है (गीत) कवि: हरिवंश राय बच्चन काव्य-धारा: हालावाद / छायावादोत्तर गीतिकाव्य मूल स्रोत: ‘आत्मपरिचय’ तथा ‘दिन जल्दी-जल्दी ढलता है’ (निशा निमंत्रण से) 1. पाठ का मूल उद्देश्य व संवेदना कविता 1: ‘आत्मपरिचय’(निशा निमंत्रण से) स्वयं की पहचान: यह प्रतिपादित करना कि स्वयं को जानना दुनिया को जानने से कहीं अधिक कठिन है। प्रीति-कलह का संबंध: ...
Read More »बाज़ार दर्शन (निबंध) पाठ का मूल उद्देश्य एवं विस्तृत पाठ-सार
बाज़ार दर्शन (निबंध) लेखक: जैनेंद्र कुमार विधा: विचार-प्रधान निबंध मूल विषय: उपभोक्तावाद, बाज़ारवाद का मायाजाल, पैसे की व्यंग्य-शक्ति तथा बाज़ार की वास्तविक सार्थकता। 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना उपभोक्तावादी संस्कृति पर प्रहार: बाज़ार के आकर्षण, दिखावे और अनावश्यक वस्तुओं के संग्रह की अंधी दौड़ की निरर्थकता को उजागर करना। बाज़ार के जादू से मुक्ति का मार्ग: आवश्यकताओं की ...
Read More »श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श-समाज विस्तृत पाठ-सार एवं प्रमुख वैचारिक बिंदु
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा / मेरी कल्पना का आदर्श-समाज लेखक: बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर मूल रचना: ‘एनिहिलेशन ऑफ़ कास्ट’ (Annihilation of Caste, 1936) हिंदी रूपांतर: ललई सिंह यादव (शीर्षक: ‘जाति-भेद का उच्छेद’) ऐतिहासिक संदर्भ: यह भाषण ‘जाति-पाँति तोड़क मंडल’ (लाहौर) के 1936 के वार्षिक सम्मेलन के अध्यक्षीय भाषण हेतु लिखा गया था। क्रांतिकारी विचारों से आयोजकों की असहमति के ...
Read More »भक्तिन (संस्मरणात्मक रेखाचित्र) पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना
भक्तिन (संस्मरणात्मक रेखाचित्र) लेखिका: महादेवी वर्मा मूल संग्रह: ‘स्मृति की रेखाएँ’ विधा: संस्मरणात्मक रेखाचित्र 1. पाठ का उद्देश्य व मूल संवेदना स्त्री-संघर्ष व अस्मिता की अभिव्यक्ति: पितृसत्तात्मक समाज में एक असहाय व स्वाभिमानी स्त्री के आजीवन संघर्ष को रेखांकित करना। रूढ़ियों व सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार: बाल-विवाह, विधवा-समस्या, पुत्र-मोह, पारिवारिक छल-कपट और ग्रामीण पंचायतों के अमानवीय व पक्षपाती फैसलों को ...
Read More »काले मेघा पानी दे : विस्तृत विश्लेषण एवं परीक्षा नोट्स
काले मेघा पानी दे : विस्तृत विश्लेषण एवं परीक्षा नोट्स यहाँ धर्मवीर भारती द्वारा रचित संस्मरण ‘काले मेघा पानी दे’ (कक्षा 12वीं, आरोह भाग-2) के विस्तृत, विश्लेषणात्मक एवं परीक्षा-उपयोगी नोट्स दिए गए हैं। 1.सामान्य परिचय एवं संदर्भ लेखक: डॉ. धर्मवीर भारती विधा: संस्मरण (आत्मकथात्मक संस्मरण) प्रमुख पात्र: लेखक (किशोर आयु में), जीजी (लेखक की माँ की उम्र की स्नेही ...
Read More »पहलवान की ढोलक प्रसिद्ध आंचलिक कहानी(pahalwaan ki dholak prasiddh aanchalik kahani)
पहलवान की ढोलक : विस्तृत विश्लेषण एवं परीक्षा नोट्स यहाँ फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ द्वारा रचित प्रसिद्ध आंचलिक कहानी ‘पहलवान की ढोलक’ (कक्षा 12वीं, NCERT आरोह भाग-2 एवं विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु) के विस्तृत और परीक्षा-उपयोगी नोट्स दिए गए हैं। 1.सामान्य परिचय एवं संदर्भ लेखक: फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ (हिन्दी के मूर्धन्य आंचलिक कथाकार) विधा: आंचलिक कहानी मुख्य पात्र: लुट्टन सिंह (पहलवान), चाँद सिंह ...
Read More »शिरीष के फूल (निबंध विश्लेषण व परीक्षा-उपयोगी नोट्स)
शिरीष के फूल (निबंध विश्लेषण व परीक्षा-उपयोगी नोट्स) ‘शिरीष के फूल’ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा रचित एक प्रतिनिधि ललित निबंध (Personal/Cultural Essay) है, जो उनके प्रसिद्ध निबंध-संग्रह ‘कल्पलता’ (1951 ई.) में संकलित है। यह निबंध कक्षा 12वीं (NCERT आरोह भाग-2) सहित विभिन्न शिक्षक भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं (RPSC, UGC NET, UP TGT/PGT) के पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा है। 1. ...
Read More »आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रमुख निबंध(acharya hajari prasad mandal ke pramukh nibandh)
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के प्रमुख निबंध आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी में ललित निबंध (Personal/Belles-lettres Essay) परंपरा के प्रवर्तक और शीर्षस्थ निबंधकार हैं। उनके निबंधों में गंभीर पांडित्य, सांस्कृतिक इतिहास-बोध, लोक-चेतना और सहज विनोदप्रियता का अपूर्व संगम दिखाई देता है। 1. निबंध-संग्रहों का संक्षिप्त विवरण निबंध संग्रह प्रकाशन वर्ष निबंधों की संख्या मुख्य विशेषताएं / प्रमुख निबंध अशोक के ...
Read More »आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास(acharya hajari prasad dwivedi ke upanyas)
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के उपन्यास आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी हिन्दी के शीर्षस्थ ऐतिहासिक-सांस्कृतिक उपन्यासकार हैं। उन्होंने इतिहास और कल्पना के अद्भुत समन्वय द्वारा प्राचीन भारतीय संस्कृति, दर्शन, नारी-गरिमा और लोकजीवन को अपने उपन्यासों में जीवंत किया है। संक्षिप्त तुलनात्मक तालिका उपन्यास प्रकाशन वर्ष ऐतिहासिक पृष्ठभूमि / आधार मुख्य विषय / केन्द्रीय दर्शन प्रमुख पात्र बाणभट्ट की आत्मकथा 1946 ई. ...
Read More »आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जीवन परिचय(acharya hajari prasad dwivedi ka jeevan parichay)
1. सामान्य परिचय एवं जीवन-वृत्त जन्म: 19 अगस्त, 1907 ई. | ग्राम: आरत दूबे का छपरा (ओझवलिया), जिला: बलिया (उत्तर प्रदेश) बचपन का नाम: वैद्यनाथ द्विवेदी उपनाम: व्योमकेश माता-पिता: श्रीमती ज्योतिष्मति एवं पं. अनमोल द्विवेदी (संस्कृत, फारसी व ज्योतिष के प्रकांड विद्वान) विवाह: 1927 ई. (श्रीमती भगवती देवी के साथ) शिक्षा: 1920: मिडिल परीक्षा (प्रथम श्रेणी) 1923: काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ...
Read More »शब्द शक्ति शब्द का निश्चयार्थक ज्ञान :– शब्द शक्ति जो सुन पड़े वही शब्द तथा उस शब्द से जो समझ में आए वही अर्थ :– शब्द शक्ति शब्दों के अंतर्निहित अर्थ को प्रकट करने वाले व्यापार (कार्य) :– शब्द शक्ति शब्द का अर्थ बोध कराने वाली शक्ति :– शब्द शक्ति ‘शक्ति’ शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम :– आचार्य विश्वनाथ ने किया। ...
Read More »अलंकारों के मुख्य भेद(alankaron ke mukhya bhed)
अलंकारों के मुख्य भेद हिंदी साहित्य में अलंकारों के मुख्य रूप से तीन भेद होते हैं: शब्दालंकार अर्थालंकार उभयालंकार 1. शब्दालंकार के अंतर्गत आने वाले अलंकार: अनुप्रास अलंकार यमक अलंकार श्लेष अलंकार वक्रोक्ति अलंकार 2. अर्थालंकार के अंतर्गत आने वाले अलंकार: अतिशयोक्ति अलंकार भ्रांतिमान अलंकार संदेह अलंकार विभावना अलंकार विरोधाभास अलंकार याद रखने की ट्रिक (अर्थालंकार के लिए):“बढ़ा-चढ़ाकर (अतिशयोक्ति), भ्रम ...
Read More »परमाल रासो (आल्हा खण्ड) का परिचय[paramal raso (aalha khand) ka parichay]-II
परमाल रासो (आल्हा खण्ड) का परिचय-II ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (महोबा का युद्ध – 1182 ई.) यह संपूर्ण काव्य-प्रसंग चंदेल शासक परमर्दिदेव (परमाल) के काल और दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान के मध्य हुए ऐतिहासिक महोबा युद्ध (सिरसागढ़ एवं महोबा का घेरा) से जुड़ा है। आल्हा और ऊदल का निष्कासन: राजा परमाल ने माहिल (रानी मल्हना के भाई) के षड्यंत्र में आकर ...
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