Author Archives: Puran Mal Kumhar

केदारनाथ सिंह की कविता ‘बनारस’ और ‘दिशा’ सप्रसंग व्याख्या एवं शिल्प-सौंदर्य

केदारनाथ सिंह की कविता ‘बनारस’ और ‘दिशा’ सप्रसंग व्याख्या एवं शिल्प-सौंदर्य समकालीन कविता के प्रमुख हस्ताक्षर केदारनाथ सिंह की अंतरा (भाग-2) में संकलित दोनों रचनाओं—‘बनारस’ और ‘दिशा’—का मूलभाव, सप्रसंग व्याख्या एवं शिल्प-सौंदर्य: 1. बनारस मूल काव्य संग्रह: अकाल में सारस (1988 — इसी संग्रह पर कवि को 1989 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था)। संदर्भ: प्रस्तुत कविता समकालीन हिंदी ...

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अज्ञेय की कविता ‘ यह दीप अकेला’ और ‘मैंने देखा एक बूँद’ का मूलभाव और उद्देश्य

सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की दोनों प्रसिद्ध कविताओं का मूलभाव (Central Idea) और उद्देश्य (Purpose): 1. यह दीप अकेला मूलभाव (Central Idea): व्यष्टि का समष्टि में विलय: कविता का केंद्रीय भाव व्यक्ति (व्यष्टि) और समाज (समष्टि) के आंतरिक संबंधों को स्पष्ट करना है। ‘दीप’ समर्थ, गुणवान और स्वतंत्र व्यक्ति का प्रतीक है, जबकि ‘पंक्ति’ समाज की प्रतीक है। अहंकार का ...

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अज्ञेय की कविता ‘ यह दीप अकेला’ और ‘मैंने देखा एक बूँद’ सप्रसंग व्याख्या एवं विशेष

अज्ञेय की कविता ‘ यह दीप अकेला’ और ‘मैंने देखा एक बूँद’ सप्रसंग व्याख्या एवं विशेष सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ की अंतरा (भाग-2) में संकलित दोनों कविताओं—‘यह दीप अकेला’ और ‘मैंने देखा एक बूँद’—की सभी पंक्तियों की संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या एवं विशेष: 1. यह दीप अकेला मूल काव्य संग्रह: बावरा अहेरी (1954) संदर्भ: प्रस्तुत कविता प्रयोगवाद एवं नई कविता ...

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सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ‘गीत गाने दो मुझे’ और ‘सरोज स्मृति’ की सप्रसंग व्याख्या

सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की ‘गीत गाने दो मुझे’ और ‘सरोज स्मृति’ की सप्रसंग व्याख्या सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की अंतरा (भाग-2) में संकलित दोनों रचनाओं—‘गीत गाने दो मुझे’ और ‘सरोज स्मृति’—का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या, विशेष एवं मूलभाव: 1. गीत गाने दो मुझे मूल काव्य संग्रह: अर्चना (1950) संदर्भ: प्रस्तुत कविता छायावाद और प्रगतिवाद के प्रमुख कवि सूर्यकांत ...

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देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत में प्रमुख प्रतीक और बिंब

देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत में प्रमुख प्रतीक और बिंब 1. ‘देवसेना का गीत’ में प्रतीक और बिंब यह गीत मूलतः आंतरिक अंतर्द्वंद्व, वियोग और जीवन-संघर्ष का गीत है। इसमें प्रयुक्त प्रतीक और बिंब मानसिक अवस्थाओं और त्रासदियों को दृश्य रूप प्रदान करते हैं। प्रमुख प्रतीक (Symbols): ‘मधुकरियों की भीख’: यह जीवन भर संचित की गई छोटी-छोटी आशाओं, ...

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 देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत व्याख्या और काव्य-सौंदर्य

 देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत प्रसिद्ध कविता का संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या और काव्य-सौंदर्य 1. देवसेना का गीत स्रोत: नाटक स्कंदगुप्त (अंक 5, दृश्य 6) संदर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित नाटक ‘स्कंदगुप्त’ से उद्धृत हैं, जो अंतरा भाग-2 में ‘देवसेना का गीत’ शीर्षक के अंतर्गत संकलित हैं। प्रसंग: मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन देवसेना ...

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जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत का मूलभाव और उद्देश्य

जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित देवसेना का गीत और कार्नेलिया का गीत का मूलभाव और उद्देश्य 1. देवसेना का गीत मूलभाव (Central Idea): वेदना और एकाकीपन की अभिव्यक्ति: जीवन के अंतिम पड़ाव पर अपनी विरह-वेदना, पारिवारिक त्रासदियों और संचित आशाओं के टूटने का मार्मिक चित्रण। अदम्य संघर्ष और स्वाभिमान: विषम परिस्थितियों और दुर्बल शरीर के बावजूद निराशा (प्रलय) के आगे घुटने ...

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दी गई छवियों में संकलित सूक्तियों (उद्धरणों) के विषयवार व्यवस्थित नोट्स: 1. गुरु / शिक्षक अंधकार का नाश: जो गुरु अज्ञान रूपी रोग का अंजन (दवा) देकर अज्ञान के अंधकार को दूर नहीं करते, वे जन-रंजन नहीं कर पाते (अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ – हरिऔध सतसई)। ज्ञान का मूल्य: जो ज्ञान पैसे के लिए बिक जाता है, उसका मान घट जाता ...

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डॉ. प्रभा खेतान — साहित्यिक परिचय एवं प्रमुख रचनाएँ(dr. prabha khetan sahityik parichay evam pramukh rachnayen)

डॉ. प्रभा खेतान — साहित्यिक परिचय एवं प्रमुख रचनाएँ डॉ. प्रभा खेतान (1942–2009) समकालीन हिंदी साहित्य की अत्यंत प्रखर, निर्भीक और सशक्त नारीवादी कथाकार, कवयित्री, अनुवादक तथा विचारक थीं। उन्होंने अपनी रचनाओं में पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था, स्त्री की आर्थिक-दैहिक स्वायत्तता और महानगरीय जीवन की विसंगतियों का अत्यंत बेबाक और संवेदनात्मक अंकन किया। 1. संक्षिप्त जीवन परिचय विवरण तथ्य जन्म 1 ...

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रीतिकाल: रस एवं नायिका-भेद निरूपण (reetikal: ras evam nayika-bhed nirupan)

रीतिकाल: रस एवं नायिका-भेद निरूपण  रीतिकाल (संवत् 1700–1900 वि.) में लक्षण-ग्रंथ परंपरा के अंतर्गत रस और नायिका-भेद का शास्त्रीय, सूक्ष्म और बहुआयामी निरूपण हुआ। सामंती दरबारी परिवेश और शृंगार-प्रियता के कारण इस युग के आचार्यों ने संस्कृत काव्यशास्त्र की परंपरा को ब्रजभाषा में पद्यबद्ध रूप में प्रस्तुत किया। 1. रीतिकाल में रस-निरूपण का विस्तृत स्वरूप (क) आधार-ग्रंथ एवं दार्शनिक पृष्ठभूमि: ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र: प्रमुख रचनाएँ एवं पत्र-पत्रिकाएँ(bharatendu harishchandra: pramukh rachnayen evam patra-patrikaen)

भारतेन्दु हरिश्चंद्र: प्रमुख रचनाएँ एवं पत्र-पत्रिकाएँ इतिहास एवं पुरातत्व कश्मीर-कुसुम महाराष्ट्र देश का इतिहास रामायण का समय अग्रवालों की उत्पत्ति खत्रियों की उत्पत्ति बादशाह दर्पण बूँदी का राजवंश उदय-पुरोदय पुरावृत्त संग्रह दिल्ली दरबार कालचक्र इत्यादि पत्र-पत्रिकाएँ कवि वचन सुधा (1868 ई०) हरिश्चन्द्र मैगजीन (1873 ई०): यह बाद में ‘हरिश्चन्द्र चन्द्रिका’ के नाम से प्रकाशित हुई। बाला बोधिनी (1874 ई०): महिलाओं ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र के अनूदित नाटक(bharatendu harishchandra ke anudit natak)

भारतेन्दु हरिश्चंद्र के अनूदित नाटक भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने संस्कृत, प्राकृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं के कुल 8 महत्वपूर्ण नाटकों का हिंदी में अनुवाद किया। उनके द्वारा अनूदित नाटकों की सूची निम्नलिखित है: नाटक का नाम मूल भाषा / लेखक अनूदित रूप / विधा विद्यासुंदर (1868 ई.) बांग्ला (मूलतः संस्कृत चोरपंचाशिका पर आधारित) नाटक (प्रेम कथा) पाखंड विडंबन (1872 ई.) संस्कृत ...

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भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रमुख मौलिक नाटक(bharatendu harishchandra ke pramukh maulik natak)

भारतेन्दु हरिश्चंद्र के प्रमुख मौलिक नाटक आधुनिक हिंदी साहित्य और नाट्य विधा के जनक भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने कुल मिलाकर लगभग 17 नाटकों की रचना की, जिनमें 9 मौलिक नाटक (तथा प्रहसन/नाटिका) और शेष अनूदित नाटक हैं। नाटक का नाम रचना वर्ष विधा / नाट्य रूप प्रमुख विषय / विशेषता वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति 1873 ई. प्रहसन पाखंडी धर्मावलंबियों, मांस-मदिरा ...

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विलायत में दादाभाई नौरोजी को ‘काला’ कहे जाने पर बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की काव्य-पंक्तियाँ

दादाभाई नौरोजी पर बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ की ऐतिहासिक काव्य-टिप्पणी ब्रिटिश संसद (हाउस ऑफ कॉमन्स) के चुनाव (1892 ई.) के दौरान ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री लॉर्ड सैलिसबरी (Lord Salisbury) ने दादाभाई नौरोजी के लिए नस्लभेदी टिप्पणी करते हुए उन्हें “काला आदमी” (Black Man) कहा था। इस अपमानजनक वक्तव्य पर भारतेंदु युगीन प्रमुख साहित्यकार व राष्ट्रीय चेतना के अग्रदूत बदरीनारायण चौधरी ‘प्रेमघन’ ...

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हिंदी का मिल्टन और हिंदी का सबसे उद्दण्ड(hindi ka milton aur hindi ka sabse uddand)

हिंदी का मिल्टन :- केशवदास मिश्रबन्धुओं ने केशवदास को हिंदी का मिल्टन क्यों कहा? तुलना का आधार: प्रसिद्ध अंग्रेज़ी महाकवि जॉन मिल्टन (Paradise Lost के रचयिता) अपनी भाषा की शास्त्रीय गंभीरता, उच्च कल्पना, पांडित्य और दृष्टिहीनता के लिए जाने जाते हैं। हिंदी में आचार्य केशवदास को उनके असाधारण संस्कृत-निष्ठ पांडित्य, महाकाव्यात्मक भव्यता (रामचंद्रिका), क्लिष्ट शब्दावली और शास्त्रीय नियमों के कठोर ...

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