कक्षा 11 हिंदी ‘अक्क महादेवी के वचन’ सप्रसंग व्याख्या बारहवीं सदी के कन्नड़ ‘वीरशैव आंदोलन’ की प्रमुख शिव-भक्त कवयित्री अक्क महादेवी के आरोह (भाग-1) में संकलित दोनों ‘वचनों’ (हिंदी अनुवाद: केदारनाथ सिंह) का संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवयित्री: अक्क महादेवी (कन्नड़ की क्रांतिकारी शिव-भक्त संत कवयित्री) मूल विधा: वचन (कन्नड़ में गद्य-पद्य मिश्रित भक्ति-गीत) हिंदी ...
Read More »Author Archives: Puran Mal Kumhar
दुष्यंत कुमार ग़ज़ल ‘साए में धूप’ सप्रसंग व्याख्या
दुष्यंत कुमार ग़ज़ल ‘साए में धूप’ सप्रसंग व्याख्या हिंदी ग़ज़ल को नई पहचान और जन-आंदोलनों की आवाज़ बनाने वाले मूर्धन्य कवि एवं शायर दुष्यंत कुमार की आरोह (भाग-1) में संकलित प्रसिद्ध ग़ज़ल “कहाँ तो तय था चिरागाँ…” के प्रत्येक शेर की संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ शायर: दुष्यंत कुमार मूल ग़ज़ल संग्रह: साए में धूप (1975) ...
Read More »कवि त्रिलोचन रचित ‘चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती’ कविता का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य
चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती व्याख्या : त्रिलोचन प्रगतिशील काव्यधारा के प्रमुख कवि त्रिलोचन (त्रिलोचन शास्त्री) की आरोह (भाग-1) में संकलित यथार्थवादी एवं लोक-संवेदना से परिपूर्ण कविता ‘चंपा काले काले अच्छर नहीं चीन्हती’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: त्रिलोचन मूल काव्य संग्रह: धरती (1945) पाठ्यपुस्तक: आरोह (भाग-1) – कक्षा 11 ...
Read More »भवानी प्रसाद मिश्र रचित ‘घर की याद’ कविता का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य
भवानी प्रसाद मिश्र रचित ‘घर की याद’ कविता का सार, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य सहजता और बातचीत की शैली के अद्वितीय कवि भवानी प्रसाद मिश्र की प्रसिद्ध कविता ‘घर की याद’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रमुख काव्यांशों की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: भवानी प्रसाद मिश्र मूल काव्य संग्रह: गीत फरोश रचना काल: 1942 (भारत छोड़ो आंदोलन के ...
Read More »‘सुमित्रानंदन पंत’ की कविता ‘वे आँखें’ का सप्रसंग व्याख्या और काव्य-सौंदर्य
‘सुमित्रानंदन पंत’ की कविता ‘वे आँखें’ का सप्रसंग व्याख्या और काव्य-सौंदर्य छायावाद के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत के प्रगतिशील काव्य-दौर की अत्यंत चर्चित और मार्मिक कविता ‘वे आँखें’ का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक काव्यांश की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: सुमित्रानंदन पंत मूल काव्य संग्रह: युगवाणी (1939) पाठ्यपुस्तक: आरोह (भाग-1) – कक्षा 11 (अनिवार्य कोर) संदर्भ: प्रस्तुत कविता ...
Read More »आरोह भाग-1 के पाठ ‘रामनरेश त्रिपाठी’ की कविता ‘पथिक’ का संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या और काव्य-सौंदर्य
आरोह भाग-1 के पाठ ‘रामनरेश त्रिपाठी’ की कविता ‘पथिक’ का संदर्भ, प्रसंग, व्याख्या और काव्य-सौंदर्य छायावाद-पूर्व (द्विवेदी युगीन) स्वच्छंदतावादी काव्यधारा के प्रमुख कवि रामनरेश त्रिपाठी के खंडकाव्य ‘पथिक’ से संकलित काव्यांशों का संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: रामनरेश त्रिपाठी मूल स्रोत: खंडकाव्य पथिक (1920) पाठ्यपुस्तक: आरोह (भाग-1) – कक्षा 11 (अनिवार्य कोर) संदर्भ: प्रस्तुत काव्यांश ...
Read More »आरोह (भाग-1) में मीराबाई के प्रसिद्ध पद संदर्भ, प्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य
आरोह (भाग-1) में मीराबाई के प्रसिद्ध पद संदर्भ, प्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य भक्तिकाल की सगुण कृष्णभक्ति शाखा की अनन्य साधिका और प्रेम दीवानी मीराबाई के आरोह (भाग-1) में संकलित दोनों प्रसिद्ध पदों की संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवयित्री: मीराबाई मूल स्रोत: मीरा पदावली (नरोत्तमदास स्वामी द्वारा संपादित) पाठ्यपुस्तक: आरोह (भाग-1) – कक्षा ...
Read More »आरोह (भाग-1) में कबीरदास के प्रसिद्ध पद संदर्भ, प्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य
आरोह (भाग-1) में कबीरदास के प्रसिद्ध पद संदर्भ, प्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य भक्तिकाल की निर्गुण ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रतिनिधि कवि कबीरदास के प्रसिद्ध पद “हम तौ एक एक करि जाना…” का संदर्भ, प्रसंग, प्रत्येक पंक्ति की सप्रसंग व्याख्या (भावार्थ) एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ कवि: कबीरदास मूल स्रोत: कबीर वांग्मय (खंड-2, सबद) / कबीर ग्रंथावली पाठ्यपुस्तक: आरोह (भाग-1) – कक्षा ...
Read More »अंतरा (भाग-2)’ (ऐच्छिक) के अंतर्गत आने वाली सभी प्रमुख कविताओं के मूलभाव और उद्देश्य
अंतरा (भाग-2)’ (ऐच्छिक) के अंतर्गत आने वाली सभी प्रमुख कविताओं के मूलभाव और उद्देश्य ‘अंतरा (भाग-2)’ (ऐच्छिक) के अंतर्गत आने वाली इन सभी प्रमुख कविताओं के मूलभाव और गहन उद्देश्य को परीक्षा की दृष्टि से और अधिक विस्तार और स्पष्टता के साथ नीचे प्रस्तुत किया गया है। 1. जयशंकर प्रसाद (क) ‘देवसेना का गीत’ (स्कंदगुप्त नाटक से) विस्तृत मूलभाव: यह ...
Read More »विद्यापति पद ‘देख देख राधा रूप अपार’: सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य
विद्यापति पद ‘देख देख राधा रूप अपार’: सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य मैथिल कोकिल महाकवि विद्यापति के प्रसिद्ध पद “देख देख राधा रूप अपार…” का संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या (भावार्थ) एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ रचनाकार: महाकवि विद्यापति मूल ग्रंथ: विद्यापति पदावली भाषा: मैथिली (सुकोमल एवं संगीतमय पदावली) संदर्भ: प्रस्तुत पद विद्यापति द्वारा रचित ‘पदावली’ के रूप-वर्णन (नख-शिख वर्णन) प्रसंग ...
Read More »घनानंद के कवित्त और सवैया व्याख्या: अंतरा भाग-2(ghananand ke kavitt aur savaiya ki vyakhya)
घनानंद के कवित्त और सवैया व्याख्या: अंतरा भाग-2(ghananand ke kavitt aur savaiya ki vyakhya) रीतिकाल की रीतिमुक्त (स्वच्छंद) काव्यधारा के मूर्धन्य कवि और ‘प्रेम के पीर’ के अमर गायक घनानंद की अंतरा (भाग-2) में संकलित रचनाओं—कवित्त (1 व 2) और सवैया—का संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य: पाठ-परिचय एवं संदर्भ रचनाकार: महाकवि घनानंद काव्यधारा: रीतिकाल (रीतिमुक्त/स्वच्छंद काव्यधारा) भाषा: शुद्ध, ...
Read More »नागमती वियोग खंड बारहमासा: अगहन, पूस, माघ और फागुन की सप्रसंग व्याख्या एवं भावार्थ
नागमती वियोग खंड बारहमासा: अगहन, पूस, माघ और फागुन की सप्रसंग व्याख्या एवं भावार्थ भक्तिकाल की निर्गुण प्रेमाश्रयी (सूफ़ी) काव्यधारा के प्रतिनिधि महाकवि मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य पद्मावत के प्रसिद्ध ‘नागमती वियोग खंड’ से संकलित ‘बारहमासा’ के चारों महीनों (अगहन, पूस, माघ और फागुन) की सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ और विशेष: पाठ-परिचय एवं संदर्भ मूल ग्रंथ: पद्मावत (नागमती वियोग खंड) ...
Read More »भरत-राम का प्रेम और पद (तुलसीदास): संदर्भ, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य
भरत-राम का प्रेम और पद (तुलसीदास): संदर्भ, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य भक्तिकाल की सगुण रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि गोस्वामी तुलसीदास की अंतरा (भाग-2) में संकलित रचनाओं—‘भरत-राम का प्रेम’ (रामचरितमानस के अयोध्याकांड से) और ‘पद’ (गीतावली से)—का संदर्भ, प्रसंग, सप्रसंग व्याख्या, भावार्थ एवं काव्य-सौंदर्य: भाग 1: भरत-राम का प्रेम मूल ग्रंथ: रामचरितमानस (अयोध्याकांड) भाषा: अवधी छंद: दोहा और चौपाई ...
Read More »वसंत आया और तोड़ो (रघुवीर सहाय): सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य
वसंत आया और तोड़ो (रघुवीर सहाय): सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य नई कविता एवं समकालीन कविता के प्रमुख कवि रघुवीर सहाय की अंतरा (भाग-2) में संकलित दोनों कविताओं—’वसंत आया’ और ‘तोड़ो’—का मूलभाव, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: वसंत आया मूल काव्य संग्रह: लोग भूल गए हैं (1982 — इसी संग्रह पर कवि को 1984 का साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ था)। संदर्भ: ...
Read More »एक कम और सत्य – विष्णु खरे सप्रसंग व्याख्या भावार्थ एवं प्रश्न-उत्तर (Class 12 Hindi)
एक कम और सत्य – विष्णु खरे सप्रसंग व्याख्या भावार्थ एवं प्रश्न-उत्तर (Class 12 Hindi) समकालीन कविता के प्रखर कवि एवं अनुवादक विष्णु खरे की अंतरा (भाग-2) में संकलित दोनों कविताओं—‘एक कम’ और ‘सत्य’—का मूलभाव, सप्रसंग व्याख्या एवं काव्य-सौंदर्य: 1. एक कम मूल काव्य संग्रह: सबकी आवाज़ के पर्दे में (1994) संदर्भ: प्रस्तुत कविता समकालीन यथार्थवादी कवि विष्णु खरे द्वारा ...
Read More »